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छत्तीसगढ़ विधानसभा में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पेश, नेता प्रतिपक्ष महंत ने जताई आपत्ति, विपक्ष ने किया कार्यवाही का बहिष्कार

Religious Freedom Bill 2026: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के 14वें दिन गृहमंत्री विजय शर्मा ने सदन में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पेश किया। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार हंगामा देखने को मिला। विधेयक पेश होने के तुरंत बाद नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने इस पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि देश के 11 राज्यों में इसी तरह के कानूनों से जुड़े मामले पहले से सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं, ऐसे में इस विषय पर फिलहाल चर्चा नहीं होनी चाहिए। महंत ने मांग की कि इस विधेयक को सीधे सदन में पारित करने के बजाय विधानसभा की प्रवर समिति को सौंपा जाए, ताकि समीक्षा की जा सके।

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विपक्ष की आपत्ति पर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि विधेयक पूरी तरह विधि सम्मत है और इसमें किसी प्रकार की कानूनी बाधा नहीं है। वहीं गृहमंत्री विजय शर्मा ने भी विपक्ष के तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस तरह के कानूनों पर कोई रोक नहीं लगाई है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने यह नहीं कहा है कि नए कानून नहीं बनाए जा सकते। राज्य सरकार को कानून बनाने का पूरा अधिकार है। उन्होंने यह भी बताया कि विधेयक को लेकर पहले से फीडबैक लिया गया है और सभी को सहमति के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

आसंदी ने खारिज की आपत्ति

नेता प्रतिपक्ष की आपत्ति को आसंदी ने खारिज कर दिया। इसके बाद विपक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए पूरे दिन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया। आसंदी के फैसले से नाराज विपक्षी विधायक सदन से बाहर निकल गए और विधानसभा परिसर में नारेबाजी करते हुए विरोध जताया। वहीं सत्ता पक्ष के विधायकों ने भी विपक्ष के खिलाफ नारे लगाए, जिससे माहौल और ज्यादा गर्मा गया। गृहमंत्री ने विपक्ष के बहिष्कार को लेकर कहा कि जब भी कोई गंभीर चर्चा होती है, विपक्ष बहिर्गमन कर देता है। इसे पलायन कहा जाना चाहिए। उन्हें आदिवासी समाज की पीड़ा से कोई मतलब नहीं है। (Religious Freedom Bill 2026)

बता दें कि छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 का उद्देश्य राज्य में अवैध धर्मांतरण पर रोक लगाना और इसके खिलाफ सख्त कानूनी प्रावधान लागू करना है। धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को लेकर शुरू हुआ यह विवाद आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। फिलहाल विपक्ष के बहिष्कार के चलते सदन में इस महत्वपूर्ण विधेयक पर व्यापक चर्चा नहीं हो सकी, लेकिन राजनीतिक बयानबाजी का दौर जारी है। वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि इस पर चर्चा होगी और पास भी होगा। दरअसल, छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में लगातार धर्मांतरण के मामले सामने आने के बाद सरकार ने कानून बनाने का फैसला लिया है।

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