छत्तीसगढ़ में अवैध धर्मांतरण पर कड़ा कानून, भारी जुर्माना और कड़ी सजा का प्रावधान

Law on Illegal Conversion: छत्तीसगढ़ विधानसभा में अवैध धर्मांतरण के खिलाफ सख्त कानून बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026 सदन में पेश किया गया। इसे लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। विधेयक पेश होते ही विपक्ष ने इस पर आपत्ति जताई और मांग की कि इसे पहले विधानसभा की प्रवर समिति के पास भेजा जाए, ताकि विस्तार से इसकी समीक्षा की जा सके। हालांकि आसंदी ने विपक्ष की इस मांग को खारिज कर दिया। इससे नाराज होकर विपक्ष ने पूरे दिन की सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया। विपक्ष की अनुपस्थिति में ही सदन में विधेयक पर चर्चा जारी रही, जिसके बाद विधेयक पारित कर दिया गया। विधेयक पारित होते ही भाजपा विधायकों ने जय-जय श्री राम के नारे लगाए। अब यह विधेयक राज्यपाल की मंजूरी के लिए लोकभवन भेजा जाएगा।
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राज्यपाल की अनुमति मिलते ही यह कानून लागू हो जाएगा। विधेयक को लेकर नेताओं के अलग-अलग बयान सामने आए हैं। पूर्व डिप्टी CM टीएस सिंहदेव ने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य स्पष्ट नहीं है और किसी भी धर्म को कोई खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश है। वहीं PCC चीफ दीपक बैज ने सवाल उठाते हुए कहा कि बीजेपी सरकार 2006 में भी ऐसा बिल लाई थी, जो सालों तक लंबित रहा। 2006 से 2018 तक बीजेपी की सरकार थी। 20 साल के बाद उस बिल को वापस राज्यपाल ने भेज दिया। 20 साल बीजेपी की सरकार रही तो बिल को पेंडिंग करने का क्या मतलब था। इसका जवाब सरकार को देना चाहिए। दूसरी ओर बीजेपी सांसद भोजराज नाग ने इस विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ और देश के लिए जरूरी और लाभकारी कानून है, जिससे सभी वर्गों को फायदा मिलेगा। (Law on Illegal Conversion)
क्या हैं विधेयक के प्रमुख प्रावधान
इस विधेयक में जबरन, प्रलोभन या धोखे से धर्मांतरण कराने पर सख्त सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। अगर कोई व्यक्ति महिमामंडन, झूठ, दबाव, लालच या किसी भी तरह के कपटपूर्ण तरीके से धर्म परिवर्तन कराता है, तो इसे अवैध माना जाएगा। अगर कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है तो उसे पहले जिला मजिस्ट्रेट या संबंधित अधिकारी को सूचना देनी होगी। इस प्रस्ताव की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी और 30 दिनों के भीतर आपत्तियां दर्ज कराने का मौका दिया जाएगा। विधेयक में प्रलोभन, दबाव, सामूहिक धर्मांतरण और डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण जैसी परिभाषाएं भी स्पष्ट की गई हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि अपने पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा। अंतरधार्मिक विवाह के मामलों में भी नियम तय किए गए हैं। ऐसे विवाह कराने वाले धर्मगुरु या जिम्मेदार व्यक्ति को विवाह से 8 दिन पहले संबंधित अधिकारी को जानकारी देनी होगी। अधिकारी यह जांच करेगा कि विवाह का उद्देश्य धर्मांतरण तो नहीं है।
अवैध धर्मांतरण कराने पर सजा का प्रावधान
अवैध धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपए जुर्माना लगाया जाएगा। अगर पीड़ित महिला, नाबालिग या एससी-एसटी और ओबीसी वर्ग से है तो सजा 10 से 20 साल की जेल और कम से कम 10 लाख रुपए जुर्माना होगा। सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में 10 साल से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इस विधेयक के तहत आने वाले अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे और मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालय में की जाएगी। कुल मिलाकर छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026 राज्य में धर्मांतरण को लेकर सख्त नियंत्रण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, लेकिन इसे लेकर राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। अब सबकी नजर राज्यपाल की मंजूरी पर टिकी हुई है। (Law on Illegal Conversion)



