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श्रीनगर-लेह हाईवे पर एवलांच से 12 वाहन दबे, 7 लोगों की मौत, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

Avalanche in Jammu Kashmir: जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर-लेह हाईवे पर शुक्रवार दोपहर भीषण एवलांच आ गया। यह घटना जोजिला पास के जीरो प्वाइंट के पास करीब शाम 4 बजे हुई, जिसमें 12 से ज्यादा वाहन 6 फीट से ज्यादा बर्फ में दब गए। इस हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत हो गई है। जबकि कई लोग बर्फ में फंसे रहे। पुलिस और बचाव टीमों ने घटना के तुरंत बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया। अब तक 5 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, जिन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनकी हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है।

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बताया जा रहा है कि एक ट्रक भी बर्फ में फंस गया था, जिसमें सवार लोगों को समय रहते बाहर निकाल लिया गया। राहत और बचाव कार्य अभी भी जारी है। सड़क से बर्फ और मलबा हटाने का काम तेजी से किया जा रहा है। एवलांच के बाद हाईवे पर जमी मोटी बर्फ को हटाने का काम जारी है। प्रशासन की कोशिश है कि जल्द से जल्द यातायात बहाल किया जाए, हालांकि मौसम और बर्फबारी की स्थिति इसमें चुनौती बनी हुई है। इस बीच मौसम विभाग ने कई राज्यों में खराब मौसम की चेतावनी दी है। (Avalanche in Jammu Kashmir)

28 मार्च को अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं बिहार के कुछ इलाकों में आंधी-तूफान के साथ ओलावृष्टि हो सकती है। 29 मार्च को हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब और दिल्ली में 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने का अनुमान है। इसके अलावा बिहार, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और उत्तराखंड में बिजली गिरने के साथ आंधी-तूफान की आशंका जताई गई है। जम्मू-कश्मीर में जोजिला पास और श्रीनगर-लेह हाईवे जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में एवलांच की घटनाएं नई नहीं हैं। (Avalanche in Jammu Kashmir)

हर साल सर्दियों और मौसम बदलने के दौरान यहां कई छोटे-बड़े हिमस्खलन होते रहते हैं, जिनमें जान-माल का नुकसान भी सामने आता है। पहले भी इस मार्ग पर कई बार वाहन बर्फ में दब चुके हैं और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने पड़े हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक लगातार बर्फबारी, तापमान में उतार-चढ़ाव और तेज हवाएं एवलांच की मुख्य वजह होती हैं। ऐसे में प्रशासन और मौसम विभाग समय-समय पर अलर्ट जारी करते रहते हैं, लेकिन जोखिम भरे इलाकों में आवाजाही पूरी तरह रोक पाना चुनौती बना रहता है। ताजा हादसा एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि संवेदनशील पहाड़ी रास्तों पर यात्रा के दौरान सुरक्षा उपायों को और सख्त करने की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को कम किया जा सके।

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