आधुनिकता के दौर में भी बुनियादी सुविधाओं से महरूम छत्तीसगढ़ का ये आदिवासी गांव, बिजली और सड़क बना सपना

Bimalta Village of Korba: कोरबा जिले को छत्तीसगढ़ का पावर हब कहा जाता है, लेकिन जिले के वनांचल क्षेत्र का बिमलता गांव आज भी बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। आजादी के 79 साल बीत चुके हैं और छत्तीसगढ़ के निर्माण को 26 साल हो चुके हैं, लेकिन इस गांव में आज तक सड़क और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंच पाई हैं। जिले के वनांचल क्षेत्रों के कई गांवों के लोग आज भी पक्की सड़क, बिजली और पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं। ऐसे ही गांवों में बिमलता भी शामिल हैं, जो कोरबा जनपद पंचायत नकिया की अंतर्गत आता है। जिला मुख्यालय से लगभग 75 किमी दूर इस आदिवासी गांव में उजाले और सुगम आवागमन के लिए आज भी सुविधाएं न के बराबर हैं।
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गांव के करीब 400 निवासी आज भी आदिम युग जैसी परिस्थितियों में जीने को मजबूर हैं। अंधेरा होते ही जंगल का डर गांव में छा जाता है। घरों में लगाए गए सोलर पैनल तेज हवाओं में उड़ जाते हैं या टूट जाते हैं। जब यह भी नाकाफी हो, तब ग्रामीण ढिबरी और कंडील जलाकर अपने घरों को रोशन करते हैं। गांव में बिजली के लिए एक भी पोल नहीं है। मोबाइल या टॉर्च चार्ज करने के लिए लोग दूसरे गांवों पर निर्भर हैं। पढ़ाई करने वाले बच्चे भी सोलर चार्ज की बैटरी और एलएडी टॉर्च की रोशनी पर आश्रित हैं। दिन में तो पढ़ाई संभव है, लेकिन रात के अंधेरे में बच्चों को बीच में पढ़ाई छोड़नी पड़ती है। सड़क की हालत भी गंभीर है। पगडंडी जैसी सड़क में बड़े-बड़े गड्ढे और पत्थर ग्रामीणों के सब्र की परीक्षा लेते हैं। (Bimalta Village of Korba)

गंभीर बीमारियों या प्रसूति के समय मरीजों और महिलाओं को खाट पर लाद कर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है और कभी-कभी जीवन संकट में पड़ जाता है। गर्मी में पीने के पानी के लिए भी ग्रामीणों को 2-2.5 किमी दूर नदी से पानी लाना पड़ता है। पूर्व सरपंच फूलसिंह मंझवार ने बताया कि हम कई बार अपनी मांगें सरकारी दफ्तर और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाते रहे, लेकिन अब तक कागज में लिखी मांगें धरातल पर नहीं उतरी। ऐसा लगता है कि गांव में बुनियादी सुविधाओं को देखने की मेरी इच्छा अधूरी ही रहेगी। वहीं वर्तमान सरपंच रमिला मंझवार ने कहा कि कुछ दिन पहले कोरबा कलेक्टर का काफिला गांव आया था और उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही सड़क और बिजली आएगी, लेकिन इतने समय के बाद भी कोई कार्य शुरू नहीं हुआ है। (Bimalta Village of Korba)

सरपंच के पति करम सिंह मंझवार ने कहा कि आज के युग में हमारे लोग टीवी, फ्रिज और कूलर जैसी सुविधाओं से वंचित हैं। बच्चों को टीवी क्या होता है, यह भी नहीं पता। चुनाव आते हैं, नेता वादे करते हैं, लेकिन जीतने के बाद गायब हो जाते हैं। आधुनिकता के दौर में भी बिमलता के आदिवासी आज ढिबरी और कंडील के सहारे जीवन यापन करने को मजबूर हैं। बिजली, सड़क और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं न मिलने से बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। प्रशासन और नेताओं के आश्वासन के बावजूद यह गांव आज भी आजादी के अमृतकाल में बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। बिमलता की कहानी सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि उन तमाम आदिवासी और दूर-दराज के ग्रामीणों की है, जो आधुनिक भारत में भी विकास की रौशनी से दूर हैं। बिमलता की कहानी सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि उन तमाम आदिवासी और दूर-दराज के ग्रामीणों की है, जो आधुनिक भारत में भी विकास से महरूम हैं।




