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खरीफ सीजन से पहले एक्शन में प्रशासन, 16 दुकानों पर छापा, 5 को नोटिस, खाद को लेकर राजनीति भी हुई तेज

Action Taken Regarding Fertilizer: आगामी खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए रायगढ़ जिले में किसानों को समय पर और उचित दर पर खाद उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। इसी कड़ी में खाद, बीज और कीटनाशक विक्रेताओं के खिलाफ निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। बीते दो दिनों में प्रशासन की टीम ने जिले के 16 उर्वरक विक्रय केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान कई जगह अनियमितताएं सामने आई हैं। इसके चलते 5 दुकानों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जिनमें गोयल फर्टिलाइजर रायगढ़, किसान इंटरप्राइजेज रायगढ़, अन्नपूर्णा खाद भंडार धरमजयगढ़, विक्की खाद भंडार सूपा (पुसौर) और नरेश ट्रेडर्स सेमरा (पुसौर) शामिल हैं। इन सभी विक्रेताओं को तय समय के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं।

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प्रशासन ने खाद के भंडारण और वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए जिला स्तरीय निगरानी दल का गठन भी किया है। इस टीम की जिम्मेदारी सहायक संचालक कृषि को दी गई है, जो नियमित रूप से दुकानों का निरीक्षण करेंगे। किसानों की सुविधा के लिए कृषि विभाग ने एक कंट्रोल रूम भी शुरू किया है। किसान कार्यालय समय में टोल फ्री नंबर 07762-220213 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जिनका जल्द समाधान करने का दावा किया गया है। जिला प्रशासन का कहना है कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण खाद उचित दाम पर उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है। किसी भी तरह की गड़बड़ी या कालाबाजारी पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। (Action Taken Regarding Fertilizer)

 

खाद को लेकर सियासत भी गरमाई

खाद के मुद्दे पर सियासत भी तेज हो गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस बार खाद संकट और गहरा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार की पर्याप्त तैयारी नहीं है और लोगों को गैस की तरह खाद के लिए भी लाइन में लगना पड़ सकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार वर्मी कम्पोस्ट को बढ़ावा दे रही थी, लेकिन वर्तमान सरकार इस दिशा में काम नहीं कर रही है। इस परमंत्री केदार कश्यप ने कहा कि सरकार कालाबाजारी रोकने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने माना कि वैश्विक परिस्थितियों के कारण खाद की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है, लेकिन प्रदेश में कमी न हो इसके लिए लगातार कोशिशें जारी हैं। खरीफ सीजन से पहले प्रशासन की सख्ती और राजनीतिक बयानबाजी के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार किसानों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में खाद मिल पाएगी या नहीं।

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