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अक्षय तृतीया पर सूरजपुर में रोके गए 10 बाल विवाह, समझाइश के साथ अभिभावकों को दी गई चेतावनी

Child Marriages Prevented: छत्तीसगढ़ में अक्षय तृतीया के अवसर पर बड़ी संख्या में शादी समारोह आयोजित होते हैं। इस बीच सूरजपुर जिला प्रशासन ने बाल विवाह रोकने के लिए सख्त और सुनियोजित अभियान चलाया। कलेक्टर श्री एस. जयवर्धन के निर्देश पर गठित उड़नदस्ता दलों ने पूरे जिले में सक्रिय निगरानी रखी, जिसके परिणामस्वरूप 10 बाल विवाह समय रहते रुकवाए गए। यह कार्रवाई ‘बाल विवाह मुक्त सूरजपुर’ के संकल्प की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

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दरअसल, अक्षय तृतीया को विवाह का अत्यंत शुभ मुहूर्त माना जाता है, जिसके कारण इस दिन बाल विवाह की आशंका भी ज्यादा रहती है। इसे ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने पहले से ही रणनीति तैयार कर ली थी। कलेक्टर के निर्देश पर सभी विकासखंडों में विशेष उड़नदस्ता दल बनाए गए, जिनमें प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस, महिला और बाल विकास विभाग, चाइल्ड लाइन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और ग्राम स्तर के कर्मचारी शामिल थे। इन टीमों ने गांव-गांव जाकर विवाह समारोहों की जांच की और संदिग्ध मामलों पर तुरंत कार्रवाई की। इसी दौरान 10 जगहों पर बाल विवाह होते पाए गए, जिन्हें मौके पर ही रोक दिया गया। (Child Marriages Prevented)

अभियान के दौरान चार दिनों के भीतर जिले के चार विकासखंडों में बाल विवाह रोकने की कार्रवाई की गई, जिसमें भैयाथान विकासखंड के 4, रामानुजनगर विकासखंड के 2, , प्रतापपुर विकासखंड के 2 और ओडगी विकासखंड के 2 मामले शामिल हैं। इन मामलों में कुछ ऐसे विवाह भी शामिल थे, जिनमें बालक और बालिका दोनों ही कानूनी उम्र से कम थे। उदाहरण के तौर पर 17 साल के लड़के और 14 साल की लड़की की भी शादी रोकी गई। प्रशासन ने सिर्फ विवाह रुकवाने तक ही सीमित न रहकर अभिभावकों को जागरूक करने पर भी जोर दिया। सभी मामलों में परिजनों को बैठाकर समझाया गया कि बाल विवाह बच्चों के भविष्य, स्वास्थ्य और शिक्षा पर गंभीर असर डालता है।

उन्हें बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया गया कि बाल विवाह कराना या इसमें सहयोग करना अपराध है। इसके लिए 2 साल तक की सजा हो सकती है। 1 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है या दोनों दंड एक साथ भी दिए जा सकते हैं। इसके साथ ही सभी मामलों में पंचनामा तैयार किया गया, संबंधित व्यक्तियों के बयान लिए गए और शपथ पत्र भी भरवाए गए। स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई कि अगर भविष्य में विवाह किया गया तो संबंधित थाने में FIR दर्ज की जाएगी और पूरी जिम्मेदारी परिजनों की होगी। (Child Marriages Prevented)

इस पूरे अभियान में जिला कार्यक्रम अधिकारी शुभम बंसल लगातार मॉनिटरिंग करते रहे और अलग-अलग टीमों से संपर्क में रहे। वहीं जिला बाल संरक्षण अधिकारी मनोज जायसवाल ने उड़नदस्ता दलों, परियोजना अधिकारियों और अन्य विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर कार्रवाई को प्रभावी बनाया। अभियान में तहसीलदार, पुलिस अधिकारी, चाइल्ड लाइन के सदस्य, सामाजिक कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी पर्यवेक्षक, सरपंच, सचिव समेत बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी सक्रिय रूप से शामिल रहे। यह एक संयुक्त प्रयास था, जिसने अभियान को सफल बनाया।

बीजापुर में ‘बाल विवाह मुक्त’ अभियान को रफ्तार

सूरजपुर की कार्रवाई के साथ-साथ बीजापुर जिले में भी बाल विवाह के खिलाफ ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा संचालित ‘बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान’ के तहत जिले की 19 ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। यह अभियान 10 मार्च 2024 को शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य साल 2028-29 तक पूरे राज्य को बाल विवाह मुक्त बनाना है। चयनित 19 ग्राम पंचायतों ने पिछले दो सालों में बाल विवाह की कोई भी घटना नहीं हुई है। यह प्रमाण ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव की ओर से जारी किया गया है। इसी आधार पर प्रशासन इन पंचायतों को बाल विवाह मुक्त घोषित करने की तैयारी कर रहा है।

आपत्ति दर्ज कराने का मौका

राज्य शासन ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए लक्ष्य निर्धारित किया है कि जिले की 40 प्रतिशत ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों को बाल विवाह मुक्त घोषित किया जाए। यह लक्ष्य न सिर्फ प्रशासनिक प्रयासों को दर्शाता है, बल्कि समाज में बढ़ती जागरूकता का भी संकेत है। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रशासन ने आम जनता, सामाजिक संगठनों और अन्य संस्थाओं से आपत्तियां आमंत्रित की हैं। अगर किसी व्यक्ति को इन पंचायतों में बाल विवाह से संबंधित कोई जानकारी या आपत्ति हो तो वह विज्ञप्ति जारी होने के 7 दिनों के भीतर लिखित आवेदन दे सकता है। आवेदन जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला और बाल विकास विभाग, कलेक्टर कार्यालय बीजापुर में कार्यालयीन समययानी सुबह 10:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक जमा किया जा सकता है।

घोषित होने वाली पंचायतों की सूची

इस सूची में पालागुड़ा, एरमनार, धनोरा, ईटपाल, मोरमेड, पापनपाल, दुगोली, चेरपाल, लिंगापुर, गोटाईगुड़ा, रुद्रारम, अटुकपल्ली, मंगापेटा, तालनार, मिरतुर, बड़ेतुंगाली, मंगलनार, मंडेम और उसकापटनम पंचायतें शामिल हैं। एक ओर सूरजपुर में प्रशासन की सक्रियता से बाल विवाह जैसे गंभीर अपराध पर तुरंत रोक लगाई गई, वहीं दूसरी ओर बीजापुर में पंचायत स्तर पर इसे पूरी तरह खत्म करने की दिशा में योजनाबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं। यह साफ संकेत है कि प्रशासन और समाज मिलकर बाल विवाह जैसी कुप्रथा को खत्म करने के लिए लगातार गंभीरता से काम कर रहे हैं। शासन और समाज के संयुक्त प्रयासों से अब यह उम्मीद मजबूत हो रही है कि आने वाले समय में बाल विवाह जैसी कुप्रथा पर पूरी तरह रोक लगाई जा सकेगी।

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