सक्ती प्लांट हादसे को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान, मुख्य सचिव और DGP को नोटिस जारी

NHRC on Sakti Accident: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सक्ती पवार प्लांट हादसे के 10 दिन बाद मामले में स्वतः संज्ञान लिया है और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। दरअसल, 14 अप्रैल को वेदांता थर्मल पावर प्लांट में बॉयलर ट्यूब फटने की वजह से यह हादसा हुआ। विस्फोट के बाद निकली बेहद गर्म भाप ने वहां काम कर रहे मजदूरों को अपनी चपेट में ले लिया था, जिसमें अब तक 25 मजदूरों की मौत हो चुकी है। जबकि कई मजदूर अभी भी घायल हैं, जिनका इलाज जारी है। जानकारी के मुताबिक हादसे के बाद 15 अप्रैल को बॉयलर को बंद कर ठंडा किया गया था, तब जाकर पुलिस और बचाव दल ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया था।
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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस घटना को गंभीर मानते हुए कहा है कि अगर मीडिया रिपोर्ट्स सही हैं तो यह मानवाधिकारों का बड़ा उल्लंघन है। आयोग ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव और DGP को नोटिस जारी किया है। साथ ही 2 हफ्ते के अंदर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। NHRC ने राज्य सरकार से जो रिपोर्ट मांगी है, उसमें मृतकों और घायलों की पूरी जानकारी, पीड़ितों को दिए गए मुआवजे की स्थिति, घायलों का इलाज और उनकी वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति और हादसे की जिम्मेदारी किसकी है, इसकी जांच की जानकारी शामिल होना जरूरी है। (NHRC on Sakti Accident)

आयोग का कहना है कि इस तरह के औद्योगिक हादसे सिर्फ दुर्घटना नहीं होते, बल्कि सुरक्षा में लापरवाही होने पर यह मानवाधिकार उल्लंघन बन जाते हैं। इसलिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ितों को न्याय दिलाना जरूरी है। सक्ती का यह हादसा अब सिर्फ एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासन और प्लांट प्रबंधन की जवाबदेही का बड़ा मुद्दा बन गया है। NHRC की जांच के बाद यह साफ हो सकेगा कि हादसे के पीछे लापरवाही थी या कोई और कारण, और पीड़ितों को कितना न्याय मिल पाता है। (NHRC on Sakti Accident)



