Google Analytics —— Meta Pixel

सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी का जाल, दुर्ग से रायपुर तक बेरोजगारों के सपनों पर करोड़ों का खेल

Fraud Name of Job: छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। बेरोजगार युवाओं की मजबूरी और नौकरी पाने की चाहत अब ठगों के लिए कमाई का जरिया बनती जा रही है। कोई खुद को बड़े अधिकारियों का करीबी बताकर भरोसा जीत रहा है तो कोई फर्जी नियुक्ति पत्र और सरकारी आदेश बनाकर युवाओं को अपने जाल में फंसा रहा है। दुर्ग और रायपुर में सामने आए दो बड़े मामलों ने यह साफ कर दिया है कि सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है।

यह भी पढ़ें:- छत्तीसगढ़ में फूड पॉइजनिंग का कहर, जांजगीर में एक बच्चे की मौत, दुर्ग में 25 लोग बीमार

भिलाई के मुकेश कोसरे ने कभी नहीं सोचा था कि उसका कॉलेज का दोस्त ही उसे इतना बड़ा धोखा देगा। आरोपी अभिषेक जायसवाल ने खुद को बड़े अधिकारियों और AIIMS से जुड़े लोगों का करीबी बताते हुए सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा दिलाया। आरोपी ने दावा किया कि उसकी ऊंची पहुंच के चलते AIIMS में आसानी से नौकरी लग सकती है। सरकारी नौकरी पाने की उम्मीद में मुकेश धीरे-धीरे आरोपी के झांसे में आ गया। आरोपी ने अलग-अलग किश्तों में उससे करीब 14 लाख 50 हजार रुपए ले लिए। रकम लेने के बाद आरोपी लगातार जॉइनिंग लेटर देने की बात करता रहा। कभी प्रक्रिया चलने का बहाना बनाया गया तो कभी अधिकारियों से मुलाकात का दावा किया गया। (Fraud Name of Job)

Fraud in Durg

समय बीतता गया, लेकिन नौकरी नहीं मिली। जब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ तो उसने वैशाली नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। करीब चार महीने तक आरोपी की तलाश की गई। साइबर सेल भिलाई की मदद से मोबाइल नंबर और बैंक खातों की जांच की गई, जिसके आधार पर पता चला कि आरोपी उत्तर प्रदेश के लखनऊ में छिपा हुआ है। इसके बाद पुलिस टीम को लखनऊ भेजा गया, जहां घेराबंदी कर आरोपी अभिषेक जायसवाल को गिरफ्तार कर लिया गया। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसने और कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है। (Fraud Name of Job)

रायपुर में फर्जी सरकारी आदेश से डेढ़ करोड़ की ठगी

राजधानी रायपुर में भी सरकारी नौकरी के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया। यहां एक सरकारी शिक्षक और एक निजी स्कूल के क्लर्क ने मिलकर 34 बेरोजगार युवक-युवतियों को ठगी का शिकार बनाया। आरोपियों ने सामान्य प्रशासन विभाग के नाम से फर्जी नियुक्ति आदेश तैयार किया। इस फर्जी आदेश को सोशल मीडिया पर वायरल किया गया, जिसमें परिवहन, राजस्व, वन, पंचायत और स्कूल शिक्षा विभाग में भर्ती का दावा किया गया था। फर्जी आदेश को असली दिखाने के लिए सचिव और उप-सचिव के डिजिटल हस्ताक्षरों का भी इस्तेमाल किया गया। सरकारी नौकरी पाने की उम्मीद में कई बेरोजगार युवक-युवतियों ने आरोपियों को लाखों रुपये दे दिए, लेकिन जब नियुक्ति नहीं मिली और लगातार टालमटोल शुरू हुई, तब पीड़ितों को शक हुआ और मामला पुलिस तक पहुंचा। जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी राजेश शर्मा और मनोज कुमार श्रीवास्तव आर्थिक तंगी और कर्ज में डूबे हुए थे। पैसों की जरूरत ने उन्हें ऐसा गिरोह खड़ा करने के लिए मजबूर किया, जिसने बेरोजगारों की उम्मीदों को ही कारोबार बना लिया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच जारी है।

कैसे बनाते हैं शिकार ?

  • बेरोजगार युवाओं को टारगेट किया जाता है।
  • बड़े अधिकारियों और नेताओं से पहचान का दावा किया जाता है।
  • फर्जी इंटरव्यू और चयन पत्र भेजे जाते हैं।
  • सोशल मीडिया पर नकली विज्ञापन वायरल किए जाते हैं।
  • सीमित सीट और जल्द भर्ती का दबाव बनाकर पैसे मांगे जाते हैं।
  • सरकारी विभागों के फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाते हैं।

कैसे रहें सावधान ?

  • सिर्फ सरकारी और ऑफिशियल वेबसाइट पर भरोसा करें।
  • नौकरी के नाम पर किसी को पैसे न दें।
  • फर्जी कॉल, मैसेज और सोशल मीडिया विज्ञापनों से सतर्क रहें।
  • किसी भी नियुक्ति आदेश की पहले जांच करें।
  • डिजिटल हस्ताक्षर और दस्तावेजों को सत्यापित करें।
  • जल्दबाजी और लालच में फैसला न लें।

बेरोजगारी बनी ठगों का हथियार

सरकारी नौकरी पाने की चाहत जितनी बड़ी है, उतना ही बड़ा अब ठगी का नेटवर्क भी होता जा रहा है। ठग अब दोस्ती, पहचान, सोशल मीडिया और फर्जी दस्तावेजों के जरिए बेरोजगार युवाओं को निशाना बना रहे हैं। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने यह साफ कर दिया है कि नौकरी के नाम पर चल रहे इस फर्जीवाड़े से बचने के लिए जागरूकता और सतर्कता बेहद जरूरी है। वरना सरकारी नौकरी का सपना, जिंदगी की सबसे बड़ी ठगी साबित हो सकता है। सरकारी नौकरी की चाहत में युवाओं का भरोसा जिस तरह से ठगा जा रहा है, वो एक गंभीर चेतावनी है। जरूरत इस बात की है कि लोग किसी भी ऑफर को बिना जांचे-परखे स्वीकार न करें और सिर्फ आधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करें, क्योंकि ठग बदलते रहेंगे चेहरा, लेकिन अगर सतर्कता नहीं रही, तो हर बार निशाना बेरोजगार युवाओं के सपने ही बनेंगे।

Back to top button
error: Content is protected !!