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महासमुंद : कपड़ा फेरीवाले बनकर गांजा की तस्करी! 378 किलो से ज्यादा गांजा जब्त, 12 अंतरराज्यीय तस्कर गिरफ्तार

रायपुर/महासमुंद (12 मई 2026) : छत्तीसगढ़ पुलिस ने नशे के खिलाफ ऑपरेशन “निश्चय” के तहत एक बार फिर बड़ी सफलता हासिल की है। तस्करों ने इस बार कपड़ा फेरीवाले का नया और शातिर तरीका अपनाया था। मोटरसाइकिल की पिछली सीट पर लोहे का जालीदार विशेष कम्पार्टमेंट बनाकर उसमें गांजा छिपाया जाता था और ऊपर कपड़ों का ढेर लगा दिया जाता था। बाहर से देखने पर वे सामान्य सड़क किनारे कपड़े बेचने वाले फेरीवाले नजर आते थे।

कार्रवाई के प्रमुख आंकड़े

• जब्त गांजा — 378.060 किलोग्राम
• अनुमानित कीमत — 1 करोड़ 89 लाख से 1 करोड़ 98 लाख रुपये
• गिरफ्तार — 12 अंतरराज्यीय तस्कर
• जब्त वाहन — 11 मोटरसाइकिलें
• अन्य — कई मोबाइल फोन सहित कुल 1.98 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त

घटना का विस्तार

रायपुर रेंज पुलिस (महासमुंद, धमतरी और गरियाबंद) की संयुक्त टीम ने उड़ीसा सीमा से लगे इलाकों में नाकेबंदी और वाहन चेकिंग अभियान चलाया।

गांजा की तस्करी
गांजा की तस्करी

महासमुंद जिले के बसना थाना क्षेत्र में 5 मोटरसाइकिलों को घेरा गया। ये सभी आरोपी उड़ीसा के बालिगुड़ा और तितरी रायगढ़ा इलाके से गांजा लेकर मध्यप्रदेश की ओर जा रहे थे। यहां से 215 किलो गांजा बरामद हुआ और 5 तस्कर गिरफ्तार किए गए।

कोमाखान थाना क्षेत्र में भी अलग कार्रवाई की गई। धमतरी जिले में केरेगांव थाना पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली। चेकिंग के दौरान 3 मोटरसाइकिलों पर सवार तस्कर पकड़े गए। यहां 131.005 किलो गांजा जब्त किया गया। इस मामले में 2 मुख्य आरोपी गिरफ्तार हुए, जबकि एक नाबालिग के खिलाफ भी कार्रवाई की गई।

तस्करी का तरीका

तस्करों ने अपनी बाइक्स की पिछली सीट पर लोहे का जालीदार कम्पार्टमेंट (सीक्रेट बॉक्स) बनवाया रखा था। कपड़ों के ढेर से इसे पूरी तरह छिपा दिया जाता था। पूछताछ में आरोपी बताते हैं कि वे गांजा उड़ीसा से लाकर मध्यप्रदेश में सप्लाई करते थे।

पुलिस के मुताबिक यह एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह था। इससे पहले तस्कर एम्बुलेंस, केला ट्रक, मूवर्स-पैकर्स, ऑटो, बस और ट्रेन का इस्तेमाल कर चुके थे, लेकिन कपड़ा फेरीवाले का यह तरीका सबसे नया और चौंकाने वाला रहा।

पुलिस अधिकारियों का बयान

रायपुर रेंज के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि ऑपरेशन निश्चय के तहत नशे की तस्करी पर लगातार नजर रखी जा रही है। बदलते तरीकों के बावजूद पुलिस की नाकेबंदी और मुखबिरों की सूचना से ऐसे गिरोहों का पर्दाफाश हो रहा है।

जांच जारी है। गिरोह के अन्य सदस्यों और बड़े सप्लायर्स तक पहुंचने के प्रयास किए जा रहे हैं .

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