Dhar Bhojshala Case : धार भोजशाला को HC ने माना मंदिर, हिंदू पक्ष की याचिका मंजूर
Dhar Bhojshala Case : मध्य प्रदेश के धार जिले स्थित बहुचर्चित भोजशाला विवाद मामले में शुक्रवार को हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। इंदौर खंडपीठ ने अपने आदेश में भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को देवी वाग्देवी सरस्वती के मंदिर के रूप में स्वीकार करते हुए हिंदू पक्ष की याचिका मंजूर कर ली। कोर्ट ने कहा कि इस स्थल पर हिंदू पूजा-अर्चना की परंपरा कभी समाप्त नहीं हुई।
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि उपलब्ध ऐतिहासिक साहित्य, पुरातात्विक साक्ष्यों और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट से यह स्थापित होता है कि विवादित स्थल “भोजशाला” परमार वंश के राजा भोज से जुड़ा संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र था।
कोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने कहा कि भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद का विवादित क्षेत्र 18 मार्च 1904 से संरक्षित स्मारक है और यह 1958 के एएसआई अधिनियम के तहत संरक्षित रहेगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विवादित स्थल का धार्मिक स्वरूप देवी वाग्देवी सरस्वती के मंदिर सहित भोजशाला का है।
हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और एएसआई को निर्देश दिए कि वे भोजशाला मंदिर और संस्कृत शिक्षण से जुड़े प्रशासन एवं प्रबंधन को लेकर आवश्यक निर्णय लें। साथ ही एएसआई को परिसर का समग्र प्रशासन जारी रखने को कहा गया है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि श्रद्धालुओं को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना, कानून-व्यवस्था बनाए रखना और स्थल की पवित्रता व धार्मिक स्वरूप की रक्षा करना प्रशासन का संवैधानिक दायित्व है।
हिंदू पक्ष ने फैसले का किया स्वागत
हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि अदालत ने भोजशाला को राजा भोज से जुड़ा मंदिर माना है और हिंदू समाज को पूजा-अर्चना का अधिकार दिया है। उन्होंने कहा कि एएसआई की रिपोर्ट पर भरोसा करते हुए कोर्ट ने मंदिर स्वरूप को स्वीकार किया है।
धार जिले में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
फैसले को देखते हुए धार जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रशासन ने धारा 163 लागू करते हुए पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगा दिया है। किसी भी प्रकार के धरना, प्रदर्शन और जुलूस पर रोक लगाई गई है।
पुलिस सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट और टिप्पणियों की निगरानी कर रही है। साथ ही पेट्रोल-डीजल की बोतलों में बिक्री पर भी विशेष नजर रखी जा रही है।
क्या है भोजशाला विवाद?
भोजशाला विवाद हिंदू और मुस्लिम पक्षों के बीच लंबे समय से चला आ रहा है। हिंदू पक्ष भोजशाला को मां वाग्देवी (सरस्वती) का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता रहा है।
विवाद को लेकर विशेष रूप से वसंत पंचमी के दौरान पूजा और नमाज को लेकर कई बार तनाव की स्थिति बनी।
2022 में दायर हुई थी याचिका
यह मामला वर्ष 2022 में तब फिर चर्चा में आया जब हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करने और हिंदू समाज को पूर्ण पूजा अधिकार देने की मांग की।
इसके बाद हाई कोर्ट ने 11 मार्च 2024 को एएसआई को वैज्ञानिक सर्वेक्षण के आदेश दिए। एएसआई ने 98 दिनों तक सर्वे कर जुलाई 2024 में अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंपी थी। (Dhar Bhojshala Case)
ASI रिपोर्ट में क्या सामने आया?
एएसआई की रिपोर्ट में दावा किया गया कि भोजशाला परिसर में मिले कई स्तंभ और संरचनाएं प्राचीन मंदिर शैली से संबंधित हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि:
- परिसर में 106 स्तंभ और 82 प्लास्टर अवशेष मिले।
- कई स्तंभों पर देवी-देवताओं, शेर और हाथियों की आकृतियां पाई गईं।
- 10वीं-11वीं शताब्दी के परमारकालीन शिलालेख और प्राचीन सिक्के मिले।
- रिपोर्ट के अनुसार यह स्थल मूल रूप से हिंदू मंदिर रहा हो सकता है।
हिंदू पक्ष की प्रमुख मांगें
हिंदू पक्ष ने अदालत से मांग की थी कि:
भोजशाला में नियमित पूजा-अर्चना का अधिकार दिया जाए।
- परिसर में नमाज पर रोक लगाई जाए।
- केंद्र सरकार ट्रस्ट बनाकर प्रबंधन अपने हाथ में ले।
- मां वाग्देवी की प्रतिमा की निरंतर पूजा सुनिश्चित की जाए।
- ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा वापस लाई जाए।
यह भी पढ़े :- कान्हा किसली घूमने गए रायपुर के कांग्रेस नेता का निधन, स्विमिंग पूल में नहाते वक्त आया हार्ट अटैक



