फायर सेफ्टी के दावों की खुली पोल, छत्तीसगढ़ के कई सरकारी दफ्तर और अस्पतालों में सुरक्षा इंतजाम नाकाफी

Fire Safety in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में फायर सेफ्टी को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सरकारी दफ्तरों, अस्पतालों और बड़े कॉम्प्लेक्स में आग से बचाव के इंतजाम की जांच के दौरान कई जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर मिली, जबकि कुछ संस्थानों में बेहतर तैयारी भी दिखाई दी। राजधानी रायपुर के कलेक्ट्रेट परिसर में टीम को फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम नजर नहीं आए। पुरानी इमारत, खुले और उलझे बिजली के तार और सीमित अग्निशमन उपकरणों के बीच सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में दिखी। इमरजेंसी अलार्म, स्मोक डिटेक्टर और व्यवस्थित फायर एग्जिट जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी साफ नजर आई। ऐसे में आग लगने की स्थिति में बड़ा नुकसान होने की आशंका बनी हुई है।
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रायपुर के व्यस्त रवि भवन कॉम्प्लेक्स की स्थिति और ज्यादा चिंताजनक मिली। हजारों लोगों की आवाजाही वाले इस परिसर में न तो पर्याप्त अग्निशमन यंत्र दिखाई दिए और न ही कोई मजबूत सेंट्रल फायर सिस्टम। कई जगह पुराने पाइप और खराब उपकरण मिले, जिससे आपातकालीन स्थिति में राहत कार्य प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। मुंगेली में कलेक्ट्रेट की कंपोजिट बिल्डिंग में कई अहम सरकारी रिकॉर्ड रखे हुए हैं, लेकिन वहां सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर दिखाई दी। स्मोक डिटेक्टर, फायर अलार्म और स्प्रिंकलर सिस्टम जैसी सुविधाएं लगभग नदारद मिली। जिला अस्पताल में भी कई फायर अलार्म बंद पाए गए और कुछ अग्निशमन सिलेंडर एक्सपायर हालत में नजर आए। पूरे जिले में सीमित फायर ब्रिगेड संसाधन होने से जोखिम और बढ़ता दिखाई दिया। (Fire Safety in Chhattisgarh)
सुपेला सिविल अस्पताल में स्थिति बेहतर
दूसरी ओर दुर्ग के सुपेला सिविल अस्पताल में स्थिति बेहतर मिली। अस्पताल में कई जगह फायर अलार्म सिस्टम सक्रिय हालत में दिखाई दिए और समय-समय पर मॉक ड्रिल होने की जानकारी भी सामने आई। अस्पताल प्रबंधन ने दावा किया कि आगजनी जैसी स्थिति से निपटने के लिए तैयारी लगातार की जाती है। कोंडागांव में सरकारी दफ्तरों का हाल बेहद खराब नजर आया। कई कार्यालयों में अग्निशमन यंत्र तक मौजूद नहीं थे। बड़ी मात्रा में दस्तावेज और फाइलें होने के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर लापरवाही देखने को मिली। कुछ अधिकारी कैमरे के सामने जवाब देने से बचते नजर आए। सुकमा में तस्वीर मिश्रित दिखाई दी। कलेक्ट्रेट परिसर में सुरक्षा इंतजाम कमजोर मिले, जबकि जिला अस्पताल में कुछ हद तक फायर सेफ्टी सिस्टम मौजूद था। हालांकि कई जगह व्यवस्थाएं अधूरी और अपर्याप्त दिखाई दी।

प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल मेकाहारा में बाकी जिलों की तुलना में बेहतर तैयारी नजर आई। अस्पताल में अग्निशमन उपकरण अपडेटेड मिले और कई जगह हाल ही में रिफिल किए गए सिलेंडर भी दिखाई दिए। हालांकि अस्पताल के कुछ हिस्सों में अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की जरूरत महसूस हुई। जांच में सामने आया कि प्रदेश के कई सरकारी संस्थानों में फायर सेफ्टी नियमों का पालन अधूरा है। कहीं उपकरण बंद पड़े हैं, कहीं अलार्म काम नहीं कर रहे और कहीं सुरक्षा व्यवस्था सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, या समय रहते व्यवस्थाओं को मजबूत किया जाएगा। (Fire Safety in Chhattisgarh)



