Buddha Purnima: बुद्ध पूर्णिमा आज, इसी दिन भगवान विष्णु ने लिया था कच्छप अवतार, जानिए इसका महत्व
आज बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima) है, जिसका हिंदुओं के लिए विशेष महत्व है। कहा जाता है कि वैशाख महीने की पूर्णिमा के दिन ही भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था। इसलिए इसे बुद्ध पूर्णिमा भी कहा जाता है। बुद्ध पूर्णिमा बौद्ध अनुयायियों के लिए भी खास महत्व रखता है। ज्योतिषाचार्य ने कहा कि ये स्नान-दान की पूर्णिमा (Buddha Purnima) है। उन्होंने बताया कि वैशाख पूर्णिमा पर साल का पहला चंद्रग्रहण होता है, जो कि भारत में नहीं दिखता। हालांकि ये भी सिर्फ खगोलीय नजरिये से खास रहेगा। धार्मिक रूप से इसका महत्व नहीं होने से इसका अशुभ असर नहीं पड़ेगा। इसका सूतक काल भी देश में नहीं माना जाएगा।
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ज्योतिषी के मुताबिक सुबह 6.16 बजे तक वरियान योग रहेगा। इसके बाद 16 मई की सुबह से दोपहर करीब 2.30 बजे तक परिघा योग भी रहेगा। ज्योतिषियों के मुताबिक वक्र योग में किए गए सभी शुभ कार्य पूर्ण होते हैं। वहीं परिघ योग में शत्रु के विरुद्ध किए गए सभी उपाय कारगर होते हैं। साल का पहला चंद्रग्रहण दक्षिणी-पश्चिमी यूरोप, दक्षिणी-पश्चिमी एशिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका के ज्यादातर हिस्सों, दक्षिण अमेरिका, प्रशांत महासागर, हिंद महासागर, अटलांटिक और अंटार्कटिका में भी दिखाई देगा। भारत में यह चंद्रग्रहण नजर नहीं आएगा, जिसके कारण देश में सूतककाल मान्य नहीं होगा। बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima) पर स्नान के बाद दान-पुण्य करना पुण्यकारी होता है।
इन पर पड़ेगा असर
ज्योतिष ने बताया भारत समेत विश्व के देशों में ग्रहण का आर्थिक, राजनैतिक, प्राकृतिक असर देखने को मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय प्राकृतिक आपदाएं, भूकंप, बाढ़, महामारी, आंधी तूफान का सामना विश्व समुदाय को करना पड़ेगा। उपभोक्ता वस्तुओं में मूल्य वृद्धि, गैस, पेट्रोलियम के दामों में उछाल, राजनैतिक अस्थिरता से दो चार होना पड़ेगा और आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति रहेगी। इधर, ज्योतिषी अशोक वार्ष्णेय ने बताया ग्रहण के कारण भारत में राजनीतिक उठा पटक होगी।

इन राशियों पर पड़ेगा ग्रहण का प्रभाव
मेष राशि में शरीर से कष्ट, वृष में आर्थिक हानि, मिथुन में विद्या, धन लाभ होगा। कर्क राशि में शरीर रोगी, सिंह में चिंता, कन्या में शरीर सुख, तुला में धन प्राप्ति, वृश्चिक में राज्य लाभ, धनु में संतान सुख, मकर में राज लाभ, कुंभ में आर्थिक लाभ, मीन राशि में व्यय रहेगा। प्रभावित राशियों को ग्रहण के समय जप करना चाहिए। तिल, फल, अन्न, घी, दक्षिणा, वस्त्र का दान गरीब और असहायों को करना चाहिए। ग्रहण के समय हवन आदि करें।
भगवान विष्णु ने लिया था कच्छप अवतार
पौराणिक कथाओं के मुताबिक भगवान विष्णु ने इसी तिथि पर कछुए के रूप में अवतार लेकर समुद्र मंथन में मथनी के रूप में उपयोग होने वाले मदरांचल पर्वत को आधार प्रदान किया था। कथाओं के अनुसार एक बार महर्षि दुर्वासा ने इंद्र को श्राप देकर श्रीहीन कर दिया। तब भगवान विष्णु ने दैत्यों और दानवों से मिलकर समुद्र मंथन करने को कहा, जिससे कि समुद्र के रत्न बाहर निकल सके। देवता और दैत्य दोनों इस बात के लिए तैयार हो गए।
भगवान विष्णु ने इस लिए लिया था कछुए का अवतार
समुद्र मंथन के लिए मंदराचल पर्वत को मथानी और नागराज वासुकि को नेती बनाया गया। देवताओं और दैत्यों ने मंदराचल पर्वत को उखाड़ा और उसे समुद्र में ले गए। जैसे ही मदरांचल को समुद्र की बीच ले जाया गया वो डूबने लगा। ये देख दैत्य और देवताओं में निराशा छा गई तब भगवान विष्णु ने विशाल कूर्म (कछुए) का अवतार लिया और मदरांचल को अपनी पीठ पर स्थित कर लिया, जिससे वो समुद्र में स्थित हो गया। इस तरह कछुए पर स्थापित मदरांचल पर्वत नेती की सहायता से तेजी से घूमने लगा और समुद्र मंथन का कार्य पूरा हो सका।



