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सोमवार 20 सितम्बर के वैदिक उपाय, आज ग्रह जन्य अनिष्ट नाशक एवं सफलता के लिए करें यह वैदिक उपाय

अनमोल न्यूज 24 

आज के वैदिक उपाय – 20 सितम्बर 2021, दिन – सोमवार। ग्रह जन्य अनिष्ट निवारण के उपाय : नाम के प्रथम अक्षर वाले चराचर  के लिए अशुभ कर्क, वृश्चिक, मीन राशी वाले बाधा नाश के लिए उपाय अवश्य करें।  इस नाम के प्रथम अक्षर वाले चराचर  के लिए अशुभ स्थिति निर्मित हो सकती है – क,घ,छ,न.य.द,च। 

वर्जित तुलसी तोड़ना, बाल नाख़ून काटना, बेल पत्र तोडना व्यंजन उत्पाद का प्रयोग नहीं करे।

रोजगार, व्यापार या कार्य विशेष हेतु प्रस्थान के पूर्व : भोजन-ग्रहण कर प्रस्थान करना चाहिए।  शीशे में अपना चेहरा देखकर, दूध पीकर निकले। भोजन, खीर (ग्रहण या उपयोग करना चाहिए)|

दान पदार्थ – भोजन।

तिल का तेल लाल रंग (चुकंदर, लाल पत्ते की भाजी, कोई भी लाल रंग की सब्जी ) व काँसे के बर्तन में भोजन करना निषिद्ध है।

वृष, कन्या, मीन राशी वाले बाधा नाश के लिए उपायअवश्य करे।

कार्य के पूर्व  – सोमवार -अनिष्ट नाशक एवं सफलता के उपाय- कुंडली में, दशा –अन्तर्दशा में होने पर,अशुभ भाव में होने पर दोष के  अनिष्ट नाश हेतु अथवा चन्द्र ग्रह की प्रसन्नता / कृपा के लिए उपाय : किसी भी मन्त्र के अंत में अवश्य कहे :-

सर्व सिद्धिम,सफलताम च सर्व वान्छाम पूरय पूरय में नम: / स्वाहा |

आरोग्य सुख, सौभाग्य वृद्धि के लिए उपाय :–

स्नान जल मे नदी या तीर्थ जल,पंचगव्य, दूध सफेद चंदन ,गोमूत्र, मिला कर स्नान करे।

बाधा मुक्ति के लिए दान :- दान –चावल, श्वेत पुष्प। जल दान –किसी भी कन्या को या सफ़ेद गाय, शिव मंदिर मे करे।

दिन दोष आपत्ति निराकरण के लिए घर से प्रस्थान पूर्व क्या खाएं : खीर या दूध चावल, दूध।

दिन दोष उपाय :- दर्पण में मुंह देख कर प्रस्थान करे।

सफलता के लिए, आज केमंत्र :

चंद्र देव एवं शिव की पूजा करे।

मंत्र -ॐ चंद्रमसे नमः |

चन्द्र्देव का  गायत्री मंत्र-

ओमअमृतअंगायविद्महेकलारूपायधीमहितन्नोसोमःप्रचोद्यात्।|

(गायत्री मन्त्र पश्चात् गृहस्थ को आवश्यक है बोलना )

आपो ज्योति रस अमृतम। परो रजसे सावदोम।

चन्द्र ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे महाकालाय धीमहि तन्नश्चन्द्रः प्रचोदयात्॥

ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे अमृतत्वाय धीमहि तन्नश्चन्द्रः प्रचोदयात्॥

ॐ निशाकराय विद्महे कलानाथाय धीमहि तन्नः सोमः प्रचोदयात्॥

जैन धर्म का मंत्र :-

ऊँ नमोर्हते भवते श्रीमते चन्द्रप्रभु तीर्थंकराय विजय

यक्षज्वाला-मालिनीयक्षीसहिताय ऊँ आं क्रौं ह्रीं ह्यः

सोममहाग्रह! ममदुष्टग्रहरोगकष्टनिवारणं

सर्वशांतिं कुरू कुरू हूँ फट् स्वाहा।

ॐ ह्रीं सोमग्रहारिष्टनिवारक-श्री चन्द्रप्रभुजिनेन्द्राय नम:

सर्वशांतिं कुरुकुरु स्वाहा।मम (अपना नाम ) दुष्टग्रहरोगकष्ट

निवारणं सर्वशांतिं कुरू कुरू हूँ फट् स्वाहा।

Best चंद्रमा – सोमवार(ब्रह्माण्डपुराण)

रोहिणीश: सुधा‍मूर्ति: सुधागात्र: सुधाशन:।

 विषमस्थानसम्भूतां पीडां हरतु मे विधु: दक्षकन्या रूपा देवी रोहिणी के स्वामीअमृतमय स्वरूप वालेअमतरूपी शरीर वाले तथा अमृत का पान कराने वाले चंद्रदेव विषम स्थानजनित मेरी पीड़ादूर करें।

चन्द्र- ॐ इमं देवा असपत्नं सुवध्यं महते क्षत्राय महते ज्यैष्ठ्याय महते जानराज्यायेन्द्रस्येन्द्रियाय। इमममुष्य पुत्रममुष्ये पुत्रमस्यै विश एष वोऽमी राजा सोमोऽस्माकं ब्राह्मणानां राजा।(यजु. 10।1)

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