अजित पवार ऐसा मराठा नेता जो कभी सत्ता से नहीं हुआ बाहर, 6 बार डिप्टी CM बनने का अनोखा रिकॉर्ड छोड़ गए पीछे

Ajit Pawar Political Journey: महाराष्ट्र की राजनीति का एक ऐसा सितारा आज अस्त हो गया, जिसने चार दशकों तक राज्य की सत्ता की धुरी को अपने इर्द-गिर्द घुमाया। उपमुख्यमंत्री और एनसीपी प्रमुख अजित पवार का बारामती एयरपोर्ट पर विमान दुर्घटना में निधन हो गया है। यह हादसा तब हुआ जब वे मुंबई से अपनी राजनीतिक कर्मभूमि बारामती की ओर जा रहे थे। सुबह हुए इस क्रैश में अजित पवार समेत विमान में सवार सभी 5 लोगों की जान चली गई। महाराष्ट्र की राजनीति में कई मुख्यमंत्री आए और गए, लेकिन अजित पवार एक ऐसे नेता रहे जो सत्ता के समीकरणों के लिए हमेशा अपरिहार्य बने रहे।
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22 जुलाई 1959 को जन्मे अजित पवार ने अपनी पहचान अपने चाचा शरद पवार की छाया से अलग एक ‘पावरफुल एडमिनिस्ट्रेटर’ के रूप में बनाई। पिता अनंतराव पवार के निधन के बाद अजित पवार ने बहुत कम उम्र में जिम्मेदारी संभाली। एसएससी (SSC) तक की शिक्षा के बावजूद उनके पास खेती और सिंचाई की जो व्यावहारिक समझ थी, उसने उन्हें राज्य का सबसे सफल जल संसाधन मंत्री बनाया। अजित पवार के नाम एक ऐसा रिकॉर्ड दर्ज है, जिसे तोड़ना किसी भी राजनेता के लिए बड़ी चुनौती होगी। वे पिछले 13 सालों में 6 बार अलग-अलग परिस्थितियों में राज्य के उपमुख्यमंत्री बने। (Ajit Pawar Political Journey)
6 बार डिप्टी CM…एक अटूट रिकॉर्ड
- 10 नवंबर 2010 से 25 सितंबर 2012 (पृथ्वीराज चव्हाण सरकार)
- 23 नवंबर 2019 से 26 नवंबर 2019 (देवेंद्र फडणवीस सरकार)
- 25 अक्टूबर 2012 से 26 सितंबर 2014 (पृथ्वीराज चव्हाण सरकार)
- 30 दिसंबर 2019 से 29 जून 2022 (उद्धव ठाकरे सरकार)
- 30 जून 2022 से 5 दिसंबर 2024 (एकनाथ शिंदे सरकार)
- 5 दिसंबर 2024 से 28 जनवरी 2026 (देवेंद्र फडणवीस सरकार)
अजित पवार का राजनीतिक जीवन किसी हाई-वोल्टेज ड्रामे से कम नहीं था। 2019 में चाचा के खिलाफ पहली खुली बगावत हो या 2023 में पार्टी को दो फाड़ करना, उन्होंने हमेशा जोखिम लिया। 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद विरोधियों ने उन्हें ‘खत्म’ मान लिया था, लेकिन 2024 के विधानसभा चुनाव में 41 सीटें जीतकर उन्होंने साबित कर दिया कि महाराष्ट्र की जनता आज भी ‘दादा’ के काम पर भरोसा करती है। यह उनकी आखिरी और सबसे बड़ी राजनीतिक जीत साबित हुई।अजित पवार की शादी सुनेत्रा पवार से हुई, जो हमेशा उनके राजनीतिक सफर में कंधे से कंधा मिलाकर चली। उनके दो बेटे हैं।

पहला जय पवार, जिन्होंने बिजनेस में नाम कमाया और दूसरा है पार्थ पवार, जो अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। 2019 में पार्थ की चुनावी हार अजित पवार के लिए एक व्यक्तिगत झटका थी, लेकिन उन्होंने संघर्ष कभी नहीं छोड़ा। अजित पवार की कार्यशैली ऐसी थी कि वे सुबह 6 बजे मंत्रालयों का दौरा शुरू कर देते थे। अधिकारी उनके सामने फाइल लाने से पहले दस बार सोचते थे। आज उनके जाने से महाराष्ट्र ने न सिर्फ एक उपमुख्यमंत्री खोया है, बल्कि एक ऐसा मराठा नेता खो दिया है, जिसे प्रशासन की रग-रग का पता था। अजित पवार का जाना महाराष्ट्र के एक आधुनिक निर्माता का जाना है। वे गठबंधन की राजनीति के उस्ताद थे और विकास के लिए किसी भी हद तक जाने वाले नेता थे।



