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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला केस में पेशी, 13 अक्टूबर तक न्यायिक रिमांड पर चैतन्य बघेल, 8 अक्टूबर को होगी जमानत पर सुनवाई

Chaitanya Baghel Remand: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में आरोपी और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को कोर्ट ने 13 अक्टूबर तक न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। EOW ने उन्हें बीते 24 सितंबर को रिमांड पर लिया था, जिसकी अवधि आज समाप्त हुई। EOW (आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा) की ओर से कोर्ट को बताया गया कि रिमांड की अवधि के दौरान चैतन्य से पूछताछ की गई, लेकिन बचाव पक्ष के वकील फैजल रिजवी ने इस दावे को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि पूरे रिमांड में सिर्फ एक दिन की ही पूछताछ हुई, बाकी दिनों में कोई गंभीर कार्रवाई नहीं की गई। 

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इस बीच चैतन्य बघेल की ओर से जमानत याचिका भी दाखिल कर दी गई है। EOW कोर्ट में प्रस्तुत इस याचिका पर अब 8 अक्टूबर को सुनवाई होगी। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि चैतन्य बघेल जांच में सहयोग कर रहे हैं और उन्हें अनावश्यक रूप से जेल में रखा गया है। बता दें कि चैतन्य बघेल को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 18 जुलाई 2025 को उनके जन्मदिन के दिन मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था और तब से वह जेल में हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने शराब घोटाले से प्राप्त 16.70 करोड़ रुपए की अवैध धनराशि को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में निवेश कर वैध बनाने की कोशिश की। ED और EOW की जांच में 1000 करोड़ रुपए से अधिक के फंड मूवमेंट का भी खुलासा हुआ है, जिसमें चैतन्य की भूमिका को लेकर कई गंभीर आरोप सामने आए हैं।

मामले में आगे क्या ?

अब सबकी नजरें 8 अक्टूबर को होने वाली बेल सुनवाई पर टिकी हैं। अगर कोर्ट से चैतन्य बघेल को राहत मिलती है तो यह केस की दिशा को प्रभावित कर सकता है। वहीं EOW और ED जांच को और विस्तार देने की तैयारी में हैं। बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चैतन्य बघेल को शराब घोटाले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग में मुख्य आरोपी बनाया है। ED के अनुसार, शराब सिंडिकेट से प्राप्त 16.70 करोड़ रुपए चैतन्य के पास पहुंचे, जिसे उन्होंने अपने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट ‘विट्ठल ग्रीन’ (बघेल डेवलपर्स) में निवेश किया। जांच में यह सामने आया है कि चैतन्य ने फर्जी निवेश रिकॉर्ड्स के जरिए काले धन को सफेद करने की कोशिश की। इसके लिए उन्होंने कई कंपनियों और व्यक्तियों के माध्यम से लेयरिंग (लेन-देन की परतें बनाना) की, ताकि ट्रांजैक्शन को ट्रैक करना मुश्किल हो। (Chaitanya Baghel Remand)

‘विट्ठल ग्रीन प्रोजेक्ट’ में करोड़ों का घोटाला

ED की छानबीन में यह भी खुलासा हुआ है कि बघेल डेवलपर्स द्वारा चलाए जा रहे ‘विट्ठल ग्रीन प्रोजेक्ट’ में असल खर्च 13–15 करोड़ रुपए था, लेकिन रिकॉर्ड में महज 7.14 करोड़ रुपए दिखाए गए। प्रोजेक्ट कंसल्टेंट राजेन्द्र जैन ने बताया कि रिकॉर्ड्स में हेराफेरी की गई थी। डिजिटल उपकरणों की जब्ती से यह भी पता चला कि 4.2 करोड़ रुपए कैश में एक ठेकेदार को भुगतान किया गया, जिसे कहीं दर्ज नहीं किया गया। ED के मुताबिक भिलाई के व्यापारी त्रिलोक सिंह ढिल्लन ने बघेल डेवलपर्स से 5 करोड़ रुपए में 19 फ्लैट खरीदे, जो उनके कर्मचारियों के नाम पर दर्ज हैं, लेकिन भुगतान उन्होंने खुद किया। यह लेन-देन 19 अक्टूबर 2020 को हुआ था।

जांच एजेंसी का कहना है कि यह पहले से तय योजना का हिस्सा था, जिससे ब्लैक मनी को चैतन्य बघेल तक पहुंचाया गया। एक अन्य मामले में भिलाई के ही एक ज्वेलर्स ने चैतन्य को 5 करोड़ रुपए उधार दिए, जिसे बाद में बघेल की दो कंपनियों को लोन के रूप में ट्रांसफर किया गया। बाद में, इसी ज्वेलर्स ने 80 लाख रुपए में बघेल डेवलपर्स से 6 प्लॉट खरीदे। यह धन भी शराब घोटाले से आया हुआ बताया गया है। ED के वकील सौरभ पांडेय ने दावा किया कि जांच में सामने आए सबूतों के मुताबिक, चैतन्य बघेल ने कुल 1000 करोड़ रुपए के लेन-देन में हिस्सा लिया। उन्होंने बताया कि शराब घोटाले से निकली धनराशि सबसे पहले अनवर ढेबर के पास गई, फिर दीपेन चावड़ा, फिर के.के. श्रीवास्तव और कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के जरिए चैतन्य तक पहुंची।

सौरभ पांडेय ने यह भी कहा कि अनवर ढेबर के मोबाइल चैट और ऑडियो रिकॉर्डिंग में यह साबित होता है कि सारा लेन-देन सुनियोजित था और इसमें चैतन्य की संलिप्तता स्पष्ट है। चैतन्य बघेल के वकील फैजल रिजवी ने कोर्ट में कहा कि पूरी गिरफ्तारी राजनीति से प्रेरित है। उन्होंने बताया कि ED और EOW की जांचों में चैतन्य ने पूरा सहयोग किया, लेकिन न तो उनका बयान लिया गया और न ही समन जारी किया गया। रिजवी ने आरोप लगाया कि चैतन्य की गिरफ्तारी केवल पप्पू बंसल के बयान के आधार पर की गई है, जिन पर खुद गिरफ्तारी वारंट जारी है, फिर भी वह खुलेआम घूम रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि जब मार्च में चैतन्य के घर छापा पड़ा था, तब सभी डिजिटल डिवाइसेज और दस्तावेज एजेंसी को सौंपे गए थे, और कोई भी लेन-देन छिपाया नहीं गया।

तय समय में जांच पूरी हो: सुप्रीम कोर्ट 

बचाव पक्ष के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने ED को 3 महीने और EOW को 2 महीने के भीतर जांच पूरी करने का आदेश दिया था। चैतन्य की अग्रिम जमानत खारिज करने के दौरान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया था कि तय समय में जांच पूरी कर ली जाएगी। इस मामले में ED की रिपोर्ट के आधार पर ACB ने 3200 करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की FIR दर्ज की है। FIR में पूर्व अधिकारियों, कारोबारियों और राजनेताओं के नाम शामिल हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में IAS अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी एपी त्रिपाठी और व्यापारी अनवर ढेबर के माध्यम से यह घोटाला अंजाम दिया गया। छत्तीसगढ़ का यह शराब घोटाला राज्य के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला माना जा रहा है। मनी लॉन्ड्रिंग और फर्जी लेन-देन की परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं।

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