अश्विनी वैष्णव जैसे व्यक्ति को अपने पद पर बने रहना का कोई भी नैतिक अधिकार नहीं: कांग्रेस

Congress on Train Accident: पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में हुए रेल हादसे को लेकर राजनीति जारी है। इस बीच कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने दिल्ली स्थित AICC मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने कहा कि देश में लगभग हर व्यक्ति का रेल से जुड़ाव रहा है। लोगों की रेल से जुड़ी अपनी यादें रही हैं। क्योंकि रेल हिंदुस्तान की जीवन रेखा है। यह आवागमन का एक सस्ता साधन था और लोगों को विश्वास था कि वो गंतव्य तक पहुंच जाएंगे। लेकिन आज यात्री के मन में शंका रहती है कि गंतव्य तक वो पहुंचेगा या उसकी अर्थी। ये कीर्तिमान नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार ने स्थापित किया है।

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उन्होंने कहा कि ठीक एक साल पहले जून 2023 में बालासोर रेल हादसे में 296 लोगों की मौत और 900 से ज्यादा बुरी तरह घायल हुए। अब पश्चिम बंगाल में फिर एक रेल हादसा हुआ, जिसमें 15 लोगों की मौत और करीब 40 लोगों के घायल होने की खबर है। पिछले 10 साल में 1 हजार 117 रेल दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें जान-माल का नुकसान हुआ। यानी हर महीने 11 हादसे हुए। हर 3 दिन में एक हादसा हुआ। ऐसे में सवाल है कि एक साल में क्या बदला? कौन जवाबदेह है? पहले रेल हादसे की नैतिक जिम्मेदारी ली जाती थी, लेकिन रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को रील बनाने से फुर्सत कहां? सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि 2014 के बाद बड़े रेल हादसों की बड़ी लिस्ट है। (Congress on Train Accident)

  • 26 मई, 2014 (गोरखधाम एक्सप्रेस) 25 लोगों की मौत, 50 से ज्यादा घायल
  • 20 नवंबर, 2016 (इंदौर-पटना एक्सप्रेस) 150 लोगों की मौत, 150 से ज्यादा लोग घायल
  • 18 अगस्त, 2017 (पुरी-हरिद्वार उत्कल एक्सप्रेस) 23 लोगों की मौत, 60 घायल
  • 23 अगस्त, 2017 (कैफियत एक्सप्रेस) 70 लोग घायल
  • 13 जनवरी, 2022 (बीकानेर-गुवाहाटी एक्सप्रेस) 9 लोगों की मौत, 36 घायल
  • 2 जून, 2023 (बालासोर रेल हादसा) 296 लोगों की मौत, 900 से ज्यादा घायल
  • 17 जून, 2024 (कंचनजंगा एक्सप्रेस) 15 लोगों की मौत

कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीनेत ने कहा कि इस देश में पहले रेल हादसे की नैतिक जिम्मेदारी ली जाती थी, लेकिन आज हिंदुस्तान का रेल मंत्री ‘रील मंत्री’ बना हुआ है। रेल मंत्री कुछ वक्त पहले ‘कवच’ प्रणाली के फायदे समझा रहे थे। कल हुए हादसे में कहां गया ‘कवच’? 10 साल में रेल आवागमन का सबसे असुरक्षित साधन बन चुका है, ऐसा इसलिए क्योंकि नरेंद्र मोदी और उनके मंत्री को कोई फर्क नहीं पड़ रहा। रेलवे में 3.12 लाख से ज्यादा पद खाली हैं। रेलवे में लोको पायलट के करीब 20.5% और सहायक लोको पायलट के 7.5% पद खाली हैं। लोको पायलट पर काम का दबाव होता है, जिसके चलते चूक होती है। ट्रेनों की इतनी किल्लत है कि वित्तीय वर्ष 2022–23 में 2 करोड़ 70 लाख यात्री वेटिंग लिस्ट होने की वजह से यात्रा नहीं कर पाए। (Congress on Train Accident)

कांग्रेस प्रवक्ता ने पूछा सवाल

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि तीन-चार दिन पहले रेल मंत्री ने कहा- जो लोग अनारक्षित तरीके से घुस जाते हैं, उन लोगों पर पुलिस बल का प्रयोग करो। मंत्री ये जो अनारक्षित लोग आरक्षित डिब्बे में घुस जाते हैं, ये अपनी मर्जी से टायलेट में बैठकर यात्रा नहीं करते। सरकार ने स्लीपर और द्वितीय श्रेणी कोचों को AC कोचों में बदल दिया है। लोगों के पास इतना पैसा नहीं है कि वे AC में चल सकें। इसके साथ ही पैसेंजर ट्रेनों की संख्या भी कम कर दी गई। लोगों के ऊपर बल का प्रयोग मत कीजिए, अपनी गलती को सुधारिए। रेलवे में एक Depreciation Reserve Fund होता है, जिसमें रेलवे की पुरानी संपत्ति के नवीनीकरण का प्रावधान होता है। (Congress on Train Accident)

वैष्णव जैसे व्यक्ति को पद पर बने रहना ठीक नहीं: कांग्रेस

उन्होंने कहा कि असलियत ये है कि जहां 58,000 करोड़ रुपए खर्च होने थे, वहां 600 करोड़ ही खर्च किए गए। सबसे भरोसेमंद साधन कही जाने वाली रेल आज लगातार लेट चल रही है। अश्विनी वैष्णव की नाक के नीचे रेल असुरक्षित होती जा रही है। पिछले साल बालासोर से इस बार पश्चिम बंगाल में हुए हादसे के दौरान रेल मंत्री ने रील बनाने के बजाय क्या काम किया है? अश्विनी वैष्णव जैसे व्यक्ति का अपने पद पर बने रहना ठीक नहीं है। असलियत यह है कि जिस मंत्री को अपने पद से तुरंत हटा देना चाहिए था, उसे पदोन्नति दी जा रही है। (Congress on Train Accident)

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