छत्तीसगढ़ में 5 हजार से ज्यादा स्कूलों में लड़कियों के लिए टॉयलेट नहीं, हाईकोर्ट ने लगाई जमकर फटकार

HC on Government Schools: बिलासपुर हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की बदहाल स्थिति पर कड़ी नाराजगी जताई है। खासकर छात्राओं के लिए शौचालय की कमी को लेकर कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाई है और इसे छात्राओं के साथ गंभीर अन्याय बताया है। सुनवाई के दौरान सामने आया कि प्रदेश के 5,000 से ज्यादा स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय नहीं हैं। कोर्ट ने इस स्थिति को उत्पीड़न करार देते हुए कहा कि यह समस्या लड़कियों के स्कूल छोड़ने का बड़ा कारण बन रही है। चीफ जस्टिस की खंडपीठ ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव से शपथ पत्र के साथ विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
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जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक
मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर हुई सुनवाई में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। करीब 4,070 स्कूलों में गर्ल्स टॉयलेट बिल्कुल नहीं हैं। 2,170 स्कूलों में बने टॉयलेट उपयोग के लायक नहीं हैं। 7,260 स्कूलों में लड़कों के लिए भी शौचालय नहीं हैं। 3,787 शौचालय जर्जर हालत में हैं। 8,000 से ज्यादा स्कूलों में खराब टॉयलेट के कारण छात्र-शिक्षक यूरिन इन्फेक्शन जैसे बीमारियों से प्रभावित होते हैं। वहीं सिर्फ बिलासपुर जिले में ही 160 से ज्यादा स्कूल इस समस्या से जूझ रहे हैं। (HC on Government Schools)
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सिर्फ निर्माण नहीं, उपयोगी होना जरूरी: HC
हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ शौचालय बना देना पर्याप्त नहीं है, उनका कार्यात्मक और उपयोग के योग्य होना अनिवार्य है। कोर्ट ने अगली सुनवाई तक ऐसे सभी स्कूलों की सूची और सुधार की कार्ययोजना पेश करने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई के दौरान स्कूल शिक्षा सचिव ने शपथ पत्र में स्वीकार किया कि बिलासपुर, रायपुर, कोरबा, बस्तर और जांजगीर-चांपा जैसे जिलों में शौचालयों की भारी कमी है। उन्होंने बताया कि नए शौचालयों का निर्माण तेजी से किया जा रहा है और जर्जर संरचनाओं की मरम्मत के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि कोर्ट ने इस जवाब पर असंतोष जताते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर सुधार नजर नहीं आ रहा। (HC on Government Schools)
सिरगिट्टी स्कूल का मामला भी गंभीर
कोर्ट ने बिलासपुर के सिरगिट्टी स्थित एक स्कूल की बदहाल स्थिति पर भी सख्ती दिखाई। यहां स्कूल परिसर में खुले में लोहे की सरिया पड़ी हुई है, जिससे बच्चों को हादसे का खतरा है। इस मामले में जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से अलग से जवाब मांगा गया है। यह मामला अहम इसलिए है, क्योंकि साफ और अलग टॉयलेट न होने से लड़कियां स्कूल छोड़ने को मजबूर होती हैं। खराब स्वच्छता से संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ता है। गरिमा के साथ शिक्षा पाना हर बच्चे का अधिकार है। हाईकोर्ट ने कहा है कि इस मामले में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब सबकी नजर अगली सुनवाई पर है, जहां सरकार को ठोस कार्ययोजना और सुधार के प्रमाण पेश करने होंगे।



