ट्रंप के 50% टैरिफ का भी नहीं पड़ा असर, FY26 की तीसरी तिमाही में GDP ग्रोथ 7.8% दर्ज

India GDP Growth 2026: वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में भारत की सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP दर में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। ये आंकड़े 27 फरवरी को सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने जारी किए। इस बार जीडीपी की गणना में बड़ा बदलाव करते हुए बेस ईयर 2011-12 की जगह 2022-23 को आधार वर्ष बनाया गया है, जिससे अर्थव्यवस्था की मौजूदा संरचना और गतिविधियों को अधिक सटीक रूप से शामिल किया जा सके। मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक नई सीरीज के तहत तीसरी तिमाही में रियल जीडीपी 84.54 लाख करोड़ रुपए रही, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 78.41 लाख करोड़ रुपए थी।
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सरकार ने पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए रियल जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.6 प्रतिशत कर दिया है, जबकि पिछले वर्ष यह 7.1 प्रतिशत रही थी। वहीं नॉमिनल जीडीपी में 8.6 प्रतिशत की बढ़त का अनुमान है। इससे पहले वित्त वर्ष 2023-24 में 7.2 प्रतिशत और 2024-25 में 7.1 प्रतिशत की रियल ग्रोथ दर्ज की गई थी। ये आंकड़े वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आए हैं। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद यह पहली पूरी तिमाही है। ऐसे माहौल में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर यह संकेत देती है कि घरेलू मांग, निवेश गतिविधियों और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मजबूती बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत उपभोग और सरकारी खर्च ने वृद्धि को सहारा दिया है।
GDP नई सीरीज में शामिल बदलाव
नई जीडीपी सीरीज में 2022-23 को आधार वर्ष चुना गया है। 2011-12 वाला पैमाना अब 14 साल पुराना हो गया था। उस समय UPI, जोमैटो, ओटीटी, गिग इकोनॉमी जैसी चीजें अस्तित्व में नहीं थी। 2022-23 को आधार वर्ष इसलिए चुना गया, क्योंकि यह सामान्य साल था, जिसमें कोरोना खत्म, अर्थव्यवस्था स्थिर और डिजिटल इंडिया स्थापित हुई। आर्थिक आंकड़ों को ज्यादा व्यापक और यथार्थपरक बनाने के लिए इस बार जीएसटी नेटवर्क, ई-वाहन डेटाबेस और घरेलू सेवाओं जैसे कुक, ड्राइवर और अन्य घरेलू कर्मचारियों की सेवाओं से जुड़े डेटा को भी शामिल किया गया है। सरकार का मानना है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था और सेवा क्षेत्र के तेजी से विस्तार को देखते हुए यह बदलाव जरूरी था। (India GDP Growth 2026)
देश की आर्थिक सेहत है GDP
आमतौर पर आधार वर्ष हर पांच साल में बदला जाता है, ताकि अर्थव्यवस्था में आए संरचनात्मक बदलावों को समुचित रूप से मापा जा सके। हालांकि नोटबंदी, जीएसटी लागू होने और बाद में कोविड-19 महामारी के कारण इस प्रक्रिया में देरी हुई। अब 2022-23 को इसलिए चुना गया क्योंकि यह वर्ष महामारी के बाद अपेक्षाकृत स्थिर और सामान्य आर्थिक परिस्थितियों वाला साल माना गया। नई गणना से सीधे तौर पर जेब पर असर नहीं पड़ेगा। लेकिन सही आंकड़ों से सरकार बेहतर नीतियां बना सकेगी, निवेश सही जगह पर जाएगा और विदेशी निवेश बढ़ेगा, जिसका फायदा धीरे-धीरे आम नागरिक को मिलेगा। बेस ईयर वह साल होता है जिसकी कीमतों को ‘फिक्स’ मानकर आज की आर्थिक तरक्की को मापा जाता है। यह महंगाई के असर को हटाकर देश की वास्तविक ग्रोथ दिखाने में मदद करता है। GDP बताता है कि देश में कितनी वैल्यू का सामान बना और कितनी सेवाएं दी गईं। इसे आर्थिक ‘रिपोर्ट कार्ड’ भी कहा जाता है। इसमें घरेलू और विदेशी कंपनियों के प्रोडक्शन दोनों शामिल हैं।
पुराने आंकड़ों का रिविजन
सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि केवल नए आंकड़े ही नहीं, बल्कि पुराने सालों के आंकड़ों को भी नए बेस ईयर के आधार पर पुनर्गणना की जाएगी। मंत्रालय के अनुसार 1950-51 तक के बैक-सीरीज डेटा को दिसंबर 2026 तक जारी किए जाने की उम्मीद है, जिससे लंबी अवधि की आर्थिक प्रवृत्तियों का तुलनात्मक विश्लेषण संभव हो सकेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक जीडीपी मापने की पद्धति में बदलाव का आम नागरिक की जेब पर सीधा असर नहीं पड़ता, लेकिन इससे सरकार को नीतियां बनाने में अधिक सटीकता मिलती है। बेहतर डेटा के आधार पर संसाधनों का आवंटन प्रभावी ढंग से किया जा सकता है और इससे विदेशी निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होता है। (India GDP Growth 2026)
मौजूदा उत्पादन का मूल्यांकन
बेस ईयर वह साल होता है, जिसकी कीमतों को स्थिर मानकर मौजूदा उत्पादन का मूल्यांकन किया जाता है, ताकि महंगाई के प्रभाव को अलग कर वास्तविक वृद्धि दर का आकलन किया जा सके। उदाहरण के तौर पर अगर किसी वस्तु की कीमत 2011 में 5 रुपए थी और आज 10 रुपए है तो केवल कीमत बढ़ने से उत्पादन में वास्तविक वृद्धि नहीं मानी जाती। आधार वर्ष के जरिए यह स्पष्ट होता है कि वृद्धि उत्पादन में हुई है या केवल कीमतों में। यानी अगर आज भी 100 पेन बना रहे हैं, तो 2011 के हिसाब से GDP 500 रुपए दिखेगी, जबकि आज के हिसाब से 1000 रुपए। जीडीपी किसी निश्चित अवधि में देश के भीतर उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य को दर्शाती है। इसे देश की आर्थिक सेहत का संकेतक माना जाता है। (India GDP Growth 2026)
GDP दर देश की मजबूत आर्थिक स्थिति
रियल जीडीपी महंगाई के प्रभाव को हटाकर वास्तविक उत्पादन वृद्धि को दिखाती है, जबकि नॉमिनल जीडीपी मौजूदा बाजार कीमतों पर आधारित होती है और इसमें महंगाई शामिल रहती है। समग्र रूप से देखा जाए तो तीसरी तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि और पूरे वर्ष के लिए 7.6 प्रतिशत की अनुमानित दर भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत देती है। नई जीडीपी सीरीज के लागू होने से आंकड़ों की सटीकता बढ़ेगी और बदलती आर्थिक संरचना को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा। भारत की तीसरी तिमाही में 7.8% की ग्रोथ और FY26 के लिए 7.6% की अनुमानित रियल GDP दर देश की मजबूत आर्थिक स्थिति और घरेलू मांग के स्थिर होने का संकेत देती है। नई GDP सीरीज से न केवल आंकड़ों की सटीकता बढ़ेगी, बल्कि सरकार और निवेशक बेहतर फैसले ले पाएंगे।



