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जैसे चीन और पाकिस्तान पिटे, वैसे ही अमेरिका भी पिटेगा : बलूचिस्तान की ट्रंप को दो टूक चेतावनी

America-Pakistan Oil deal : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पाकिस्तान के साथ तेल और प्राकृतिक संसाधनों की डील (America-Pakistan Oil deal) की घोषणा के बाद बलूचिस्तान में गुस्सा फूट पड़ा है। बलूच नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे अमेरिका को अपनी ज़मीन पर कदम नहीं रखने देंगे। उनका कहना है कि जिन संसाधनों पर पाकिस्तान और अमेरिका डील कर रहे हैं, वे बलूचिस्तान की संपत्ति हैं – पाकिस्तान की नहीं।

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ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा था कि अमेरिका और पाकिस्तान मिलकर “विशाल तेल भंडार विकसित करेंगे।” इस ऐलान को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ऐतिहासिक बताते हुए दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय बताया।

बलूचिस्तान का ट्रंप को कड़ा संदेश – “हमारी ज़मीन बिकाऊ नहीं”

बलूचिस्तान के प्रमुख नेता मीर यार बलोच ने इस समझौते पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा:

“डोनाल्ड ट्रंप की जानकारी सही है कि पाकिस्तान में तेल और खनिज हैं, लेकिन वे नहीं जानते कि वो क्षेत्र पाकिस्तान का नहीं, बलूचिस्तान का है। ये खजाना हम किसी को नहीं लेने देंगे – न अमेरिका को, न पाकिस्तान को, न चीन को।”

बलूच नेता ने आगे कहा:-

“जिस तरह से चीन और पाकिस्तान बलूचिस्तान में नाकाम हुए हैं, उसी तरह अमेरिका को भी पीछे हटना पड़ेगा। हमारी ज़मीन पर जबरन कब्जा या दोहन कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

भारत पर टैरिफ, पाकिस्तान से डील: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल

बलूचिस्तान की प्रतिक्रिया के पीछे ट्रंप की हालिया व्यापार नीति भी है। उन्होंने भारत पर 25% टैरिफ लगाने का ऐलान किया और तुरंत बाद पाकिस्तान के साथ डील की घोषणा कर दी। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर गतिरोध बना हुआ है।

बलूचिस्तान ने ट्रंप के इस रवैये को “भारत के खिलाफ और पाकिस्तान के पक्ष में उठाया गया कदम” बताया है। बलूचिस्तान के नेताओं ने साफ शब्दों में कहा कि वे भारत के साथ खड़े हैं और ट्रंप को उसी तरह जवाब देंगे, जैसे वो पाकिस्तान और चीन को देते आए हैं।

डील का रहस्य: तेल भंडार वास्तव में कहाँ हैं?

ट्रंप और पाकिस्तान सरकार ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि जिन “विशाल तेल भंडारों” की बात हो रही है, वे पाकिस्तान में कहां स्थित हैं? विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान लंबे समय से अरब सागर के तटवर्ती क्षेत्रों में तेल-गैस की संभावनाओं की बात करता रहा है, लेकिन अब तक कोई व्यावसायिक सफलता नहीं मिली है।

बलूचिस्तान का दावा है कि ये प्राकृतिक संसाधन बलूचों की ऐतिहासिक ज़मीन पर हैं, जिसे पाकिस्तान जबरन अपने अधीन मानता है।

विश्लेषण:

डोनाल्ड ट्रंप का यह समझौता (America-Pakistan Oil deal) न सिर्फ कूटनीतिक बल्कि भू-राजनीतिक स्तर पर भी विवाद खड़ा कर सकता है। बलूचिस्तान दशकों से पाकिस्तान से अलगाव की मांग करता आ रहा है और अब अमेरिका के इस कदम को अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला मान रहा है।

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