रायपुर में बड़ी कार्रवाई: नशा तस्कर रवि साहू की ₹7.66 करोड़ की संपत्ति सीज
रायपुर। रायपुर पुलिस ने नशे के कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए गांजा तस्कर और हिस्ट्रीशीटर रवि साहू तथा उसके परिवार की करीब 7.66 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां सीज कर दी हैं। यह कार्रवाई SAFEMA और एनडीपीएस एक्ट के तहत की गई है। सक्षम प्राधिकारी मुंबई ने फ्रीजिंग आदेश को कन्फर्म कर दिया है।
Raipur Police के मुताबिक, कमिश्नरेट इतिहास में एनडीपीएस एक्ट के तहत यह पहली बड़ी वित्तीय कार्रवाई मानी जा रही है।
17 किलो गांजा तस्करी मामले में हो चुकी है सजा
पुलिस के अनुसार गांधीनगर कालीबाड़ी निवासी रवि साहू को 17 किलो 882 ग्राम गांजा तस्करी मामले में विशेष एनडीपीएस न्यायालय पहले ही 10 साल की सजा और एक लाख रुपये जुर्माने से दंडित कर चुका है। इसके बाद पुलिस ने उसकी आय के स्रोत और अवैध संपत्तियों की जांच शुरू की।
जांच में सामने आया कि रवि साहू और उसके परिवार के नाम पर करोड़ों रुपये की संपत्तियां दर्ज हैं। इनमें कृषि भूमि, मकान, प्लॉट, व्यावसायिक भवन, बैंक खाते और वाहन शामिल हैं।
55 आपराधिक मामले दर्ज
पुलिस के मुताबिक रवि साहू के खिलाफ प्रदेश के अलग-अलग थानों में 55 आपराधिक मामले दर्ज हैं। वह लंबे समय से गांजा तस्करी के नेटवर्क का संचालन कर रहा था।
सेंट्रल जोन पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने करीब एक महीने तक जमीन खरीद-बिक्री के दस्तावेजों की जांच की। आयकर विभाग की मदद से आरोपी की आय और खर्च का पूरा ब्योरा जुटाया गया।
परिवार के नाम पर करोड़ों की संपत्ति
जांच में पता चला कि पिछले छह वर्षों में आरोपी ने कुल 16 संपत्तियां खरीदी थीं। इनमें रायपुर और अभनपुर क्षेत्र में रवि साहू के नाम लगभग 1.71 करोड़ रुपये की जमीन और प्लॉट मिले।
वहीं उसकी पत्नी शशि साहू के नाम रायपुर, मानाबस्ती और खोरपा क्षेत्र में करीब 5.74 करोड़ रुपये की संपत्तियां और वाहन दर्ज पाए गए। बेटे ऋषि साहू के नाम इमलीडीह में लगभग 20 लाख रुपये का मकान भी मिला है।
पुलिस के अनुसार अधिकांश लेन-देन नकद माध्यम से किए गए थे और वैध आय की तुलना में संपत्तियों का मूल्य कई गुना अधिक पाया गया।
संपत्तियों की खरीद-बिक्री पर रोक
ऑनलाइन सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष संपत्तियों के संबंध में संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। इसके बाद 15 मई को सक्षम प्राधिकारी ने 16 संपत्तियों को सीज करने के आदेश को बरकरार रखा। अब इन संपत्तियों की खरीद-बिक्री या हस्तांतरण बिना अनुमति संभव नहीं होगा।
सेंट्रल जोन डीसीपी उमेश गुप्ता ने कहा कि नशे के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ केवल आपराधिक कार्रवाई ही नहीं, बल्कि उनके आर्थिक नेटवर्क को भी खत्म करने की रणनीति अपनाई जा रही है।
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