फेफड़े जलाकर पढ़ाई…! बालोद के स्कूल में राइस मिल का जहर, बच्चे मास्क लगाने को मजबूर

Mask School of Balod: शिक्षा का मंदिर कहलाने वाले स्कूल में बच्चे हर दिन अपने फेफड़े जलाने की मजबूरी झेल रहे हों तो इसे लापरवाही कहें या लाचारी ? बालोद जिले के नगर पंचायत पलारी का सरकारी स्कूल इन दिनों ‘मास्क वाला स्कूल’ के नाम से चर्चा में है, जहां पढ़ने आने वाले बच्चों के लिए बिना मास्क स्कूल में टिक पाना भी मुश्किल हो गया है। कारण-स्कूल के ठीक बगल में संचालित राइस मिल से उठती राखड़, धुआं और बदबू, जिसने बच्चों और शिक्षकों का जीना दूभर कर दिया है। लगातार शिकायतों के बाद भी समाधान न मिलने से ग्रामीण परेशान हैं।
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मामला मीडिया में आने के बाद कलेक्टर दिव्या मिश्रा ने अधिकारियों को तत्काल मौके पर निरीक्षण के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने कहा है कि राइस मिल ने अगर निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया है तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पलारी स्कूल परिसर में पेड़ों की पत्तियों पर जमी काली राखड़ इस समस्या की गंभीरता को बयां कर रही है। स्कूल के आसपास बदबू और धुएं का स्तर इतना ज्यादा है कि वहां एक घंटे रुकना भी मुश्किल हो रहा था। जब पेड़-पौधे इस प्रदूषण से बेहाल हैं तो बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य का अंदाजा लगाया जा सकता है। (Mask School of Balod)

ग्रामीणों के मुताबिक राइस मिल का निर्माण शुरू होने से यह विवाद खड़ा हुआ और लगातार विरोध के बावजूद प्रशासन अब तक बेबस नजर आया है। छात्र-छात्राओं ने बताया कि गले में दर्द होता है, उल्टियां आती है। आंख में राखड़ जाती है तो खुजली होती है। पढ़ाई पर ध्यान नहीं लग पाता। हमें रोज डॉक्टर के पास जाना पड़ता है। राइस मिल हटाइए, स्कूल नहीं। एक और छात्रा ने कहा कि ऐसे धुएं में पढ़ाई करना नामुमकिन है। कब तक अपने स्वास्थ्य से खिलवाड़ करें ? हम पढ़ना चाहते हैं, अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। (Mask School of Balod)

स्कूल की प्रधान पाठिका पुष्पलता साहू ने बताया कि स्थिति इतनी खराब है कि राइस मिल की ओर वाले कमरों को बदलकर दूसरी तरफ शिफ्ट करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि स्टाफ परेशान है, बच्चों की हालत और भी खराब होती है। हमेशा रुमाल या मास्क लगाकर ही पढ़ाना पड़ रहा है। कई बार बदबू इतनी असहनीय होती है कि पूरी क्लास प्रभावित हो जाती है। स्थानीय लोगों ने बताया कि राइस मिल के खिलाफ वे पिछले दो साल से शिकायतें कर रहे हैं। मामला विधानसभा तक पहुंचा, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों का सवाल है कि क्या रसूखदारों के आगे प्रशासन भी बेबस है ?
कलेक्टर ने कही कार्रवाई की बात
कलेक्टर दिव्या मिश्रा ने कहा कि जांच टीम राइस मिल के प्रदूषण स्तर, डस्ट कंट्रोल सिस्टम, दूरी के मानक और पर्यावरणीय अनुमति की पड़ताल करेगी। अगर बड़े स्तर पर चूक सामने आती है तो मिल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बच्चों की सेहत और शिक्षा से समझौता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। पलारी का ‘मास्क वाला स्कूल’ प्रशासन की नाकामी का आईना तो दिखाता ही है, साथ ही यह भी सवाल उठाता है कि क्या शिक्षा पाने के लिए बच्चों को प्रदूषण झेलकर बीमार होना ही पड़ेगा ? (Mask School of Balod)




