नेपाल में प्रचंड की सरकार गिरी: फ्लोर टेस्ट हारने के बाद प्रधानमंत्री पुष्प कमल ने दिया इस्तीफा
Nepal PM Prachanda : नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ की सरकार गिर गई है. सदन में विश्वास मत हारने के बाद ‘प्रचंड’ ने पीएम पद से इस्तीफा दे दिया है. 19 महीने सत्ता में रहने के बाद उन्हें पीएम (Nepal PM Prachanda ) पद छोड़ना पड़ा है . बता दें, सीपीएन-यूएमएल की ओर से ‘प्रचंड’ सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद उन्हें सदन में विश्वास मत हासिल करने जाना पड़ा. लेकिन शुक्रवार को हुए विश्वास मत परीक्षण में पुष्प कमल दहल हार गये.
नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ (Nepal PM Prachanda ) विश्वासमत हासिल नहीं कर पाए. पिछले सप्ताह उनकी सरकार से कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल-यूनिफाइड मार्क्सवादी लेनिनवादी (सीपीएन-यूएमएल) ने अपना समर्थन वापस ले लिया था. देश की 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में 69 वर्षीय प्रचंड को 63 वोट मिले, जबकि विश्वासमत प्रस्ताव के विरोध में 194 वोट पड़े. विश्वासमत हासिल करने के लिए कम से कम 138 वोट की जरूरत थी.
19 महीने चली प्रचंड सरकार
नेपाल में प्रचंड सरकार 25 दिसंबर 2022 को सत्ता में आयी थी. सीएम प्रचंड पद संभालने के बाद चार बार विश्वासमत हासिल करने में सफल रहे, लेकिन इस बार असफलता उनके हाथ लगी. पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सीपीएन-यूएमएल ने सदन में सबसे बड़ी पार्टी नेपाली कांग्रेस के साथ सत्ता-साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद पिछले सप्ताह प्रचंड के नेतृत्व वाली सरकार से समर्थन वापस ले लिया था.
नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा पहले ही अगले प्रधानमंत्री के रूप में ओली का समर्थन कर चुके हैं. नेपाली कांग्रेस के पास प्रतिनिधि सभा में 89 सीट हैं, जबकि सीपीएन-यूएमएल के पास 78 सीट हैं. इस तरह दोनों की संयुक्त संख्या 167 है, जो निचले सदन में बहुमत के लिए आवश्यक 138 से कहीं अधिक है.
बता दें कि, नेपाली कांग्रेस के साथ गठबंधन करने के फैसले का बचाव करते हुए ओली ने बुधवार को कहा था हाशिये की पार्टियों और उनकी असंगत चालों को दोनों दलों की साझेदारी से पराजित करने की जरूरत है। नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा ने पहले ही ओली को अगले प्रधानमंत्री के रूप में समर्थन दे दिया है। दोनों दलों ने कहा कि वो राष्ट्रीय हितों की रक्षा और नेपाल को समृद्ध तथा नेपाली लोगों की खुशहाली के लिए संविधान में संशोधन की आवश्यकता पर सहमत हुए हैं।



