इस रक्षाबंधन पर बन रहे हैं दो विशेष मुहूर्त, भाई की लम्बी आयु के लिए राखी बांधते समय पढ़ें ये मंत्र

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न्यूज डेस्क

रक्षाबंधन को भाई-बहन के प्रेम का त्यौहार माना जाता है। इस बार राखी के पर्व पर दो विशेष संयोग बन रहे हैं। हिंदू पंचांग के मुताबिक, श्रावण मास की पूर्णिमा में यह पर्व मनाया जाता है। इस त्योहार में सभी बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनसे रक्षा का वचन लेती हैं। फिर उनकी आरती उतार कर, तिलक लगाती हैं और भाईयों के सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना करती हैं। राखी बंधवाने के बाद भाई अपनी बहनों को उपहार भी देते हैं।

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इस साल के रक्षाबंधन पर दो बहुत ही विशेष मुहूर्त के योग बन रहे हैं। इस रक्षाबंधन पर धनिष्ठा नक्षत्र के साथ शोभन योग का शुभ संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, ये संयोग बहुत ही उत्तम होते हैं। रक्षाबंधन, इस संयोग में भाई और बहन दोनों के लिए लाभकारी और शुभ फलदायी होगा।

शास्त्र के मुताबिक, कई सालों बाद ऐसा संयोग आया है अर्थात् राखी के दिन भद्रा नक्षत्र नहीं है। कहते हैं कि भद्रा में किसी भी बहन को अपने भाई को राखी नहीं बांधनी चाहिए। ऐसा माना जाता है कि रावण को उसकी बहन ने भद्रा नक्षत्र में राखी बांधी थी। इस वजह से उसका अनिष्ट हो गया। पंचांग के मुताबिक, इस रक्षाबंधन के पर्व पर सुबह 06.15 बजे से लेकर 10.34 बजे तक शोभन योग रहेगा। शाम 07.40 मिनट तक धनिष्ठा योग रहेगा।

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राखी बांधते समय पढ़ें ये मंत्र

बहने अपने भाइयों को इस रक्षाबंधन पर 06.15 मिनट से शाम 7.40 के मध्य बहनें कभी भी राखी बांध सकती हैं। शास्त्रों की मानें तो हर बहन को अपने भाई की कलाई पर राखी बांधते समय इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए।

येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वामनुबध्नाभि रक्षे मा चल मा चल।।

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