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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रम्प के इमरजेंसी टैरिफ पर वसूली बंद, अब 15% ग्लोबल टैरिफ लागू

US Emergency Tariffs Suspended: अमेरिकी सरकार ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लगाए गए इमरजेंसी टैरिफ की वसूली आज से बंद करने का ऐलान किया है। यह कदम अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के तीन दिन बाद उठाया गया है, जिसमें इन टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया गया था। अमेरिकी कस्टम एजेंसी यूएस कस्टम्स ऐंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) ने बयान जारी कर कहा कि 1977 के कानून अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम (IEEPA) के तहत लगाए गए सभी टैरिफ की वसूली मंगलवार रात 12:01 बजे से रोक दी जाएगी। एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि इन टैरिफ से जुड़े सभी कोड उसके कार्गो सिस्टम से हटा दिए जाएंगे और आयातकों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

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पेन व्हार्टन बजट मॉडल के अर्थशास्त्रियों के मुताबिक कोर्ट के इस फैसले के बाद अमेरिकी सरकार को 175 अरब डॉलर (करीब 15.75 लाख करोड़ रुपए) से ज्यादा की राशि कंपनियों को वापस करनी पड़ सकती है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ से अमेरिका को प्रतिदिन 50 करोड़ डॉलर (लगभग 4,500 करोड़ रुपए) से ज्यादा की कमाई हो रही थी। अब इन टैरिफ के निरस्त होने के बाद कंपनियां रिफंड का दावा कर सकती हैं। हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि पिछले तीन दिनों में वसूले गए टैरिफ वापस किए जाएंगे या नहीं।

क्या है IEEPA कानून ?

  • पूरा नाम: इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट
  • स्थापना: 1977
  • उद्देश्य: अगर अमेरिका को किसी अन्य देश से असाधारण खतरा हो तो राष्ट्रपति तुरंत आर्थिक कदम उठा सकें।

IEEPA के तहत सरकार क्या कर सकती है ?

  • विदेशी संपत्तियों को फ्रीज
  • डॉलर ट्रांजैक्शन और बैंकिंग नियंत्रण
  • आयात-निर्यात पर प्रतिबंध
  • आपात आर्थिक फैसले लागू

अब तक 80 से ज्यादा बार इस कानून का उपयोग किया जा चुका है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने कार्यकाल में इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया और पहली बार टैरिफ लगाने के लिए इस प्रावधान का उपयोग किया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को कहा कि अगर कोई देश ट्रेड डील के नाम पर अमेरिका के साथ गेम खेलने की कोशिश करेगा तो उस पर और ज्यादा टैरिफ लगाए जाएंगे। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ट्रम्प ने लिखा कि कई देशों ने सालों तक अमेरिका को व्यापार में नुकसान पहुंचाया है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब मंगलवार से भारत समेत सभी देशों पर 15% ग्लोबल टैरिफ लागू होने जा रहा है।

15% ग्लोबल टैरिफ पर विवाद

ट्रम्प प्रशासन ने पहले कुछ देशों जैसे ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ 10% बेसलाइन टैरिफ पर सहमति जताई थी। अब इन्हें भी 15% टैरिफ देना होगा। संबंधित देशों ने इसका विरोध किया है और कहा है कि पहले हुए समझौते का सम्मान होना चाहिए। हालांकि प्रशासन की ओर से इस पर कोई औपचारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रम्प ने कहा कि इस निर्णय ने उनकी शक्तियों को कम नहीं, बल्कि और स्पष्ट कर दिया है। उनका कहना है कि अन्य कानूनों के तहत वे टैरिफ लगाने की शक्ति का और ज्यादा इस्तेमाल कर सकते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि लाइसेंसिंग जैसे वैकल्पिक उपायों के जरिए भी वे देशों के खिलाफ सख्त कदम उठा सकते हैं। (US Emergency Tariffs Suspended)

किन टैरिफ पर नहीं पड़ेगा असर ?

यह आदेश सिर्फ IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ पर लागू होगा।

इन प्रावधानों के तहत लगाए गए टैरिफ रहेंगे जारी

सेक्शन 232: 1962 के कानून का हिस्सा। राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरे की स्थिति में टैरिफ लगाया जा सकता है। ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल में स्टील और एल्युमिनियम पर इसी के तहत टैरिफ लगाए थे।

सेक्शन 301: 1974 के कानून का हिस्सा। अगर कोई देश अनुचित व्यापार व्यवहार (जैसे IP चोरी) करे तो टैरिफ लगाया जा सकता है। चीन पर लगाए गए कई टैरिफ इसी प्रावधान के तहत थे। (US Emergency Tariffs Suspended)

नया टैरिफ सेक्शन 122 के तहत: सुप्रीम कोर्ट के 6-3 बहुमत से दिए गए फैसले के बाद ट्रम्प ने तुरंत नया 15% ग्लोबल टैरिफ घोषित किया। यह टैरिफ 1974 के ट्रेड एक्ट के सेक्शन 122 के तहत लगाया गया है। इस प्रावधान के तहत राष्ट्रपति अधिकतम 150 दिनों तक 15% टैरिफ लागू कर सकते हैं। इससे ज्यादा अवधि के लिए कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक होगी। (US Emergency Tariffs Suspended)

भारत पर क्या असर ?

भारत भी 15% ग्लोबल टैरिफ के दायरे में आएगा। पिछले एक साल में अमेरिकी टैरिफ दरें भारतीय उत्पादों पर कई बार बदली। पहले 26% से बढ़कर 50% तक और फिर घटकर 18% हुई। अब नया 15% टैरिफ लागू होगा। आगे की स्थिति इस पर निर्भर करेगी कि क्या अमेरिकी कांग्रेस 150 दिन से आगे इसे मंजूरी देती है। भारत-अमेरिका अस्थायी व्यापार समझौता कब लागू होता है। क्या प्रशासन अन्य कानूनी विकल्प अपनाता है।

संभावित वैश्विक असर

  • कंपनियों को रिफंड मिल सकता है
  • भारत, चीन और यूरोप के निर्यातकों को राहत
  • कई आयातित वस्तुएं सस्ती हो सकती हैं
  • शेयर बाजारों में तेजी संभव
  • वैश्विक व्यापार में स्थिरता बढ़ सकती है

बता दें कि 1971 में तत्कालीन राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने व्यापार असंतुलन के चलते 10% ग्लोबल टैरिफ लगाया था। बाद में इसी तरह की आर्थिक परिस्थितियों से निपटने के लिए 1974 में ट्रेड एक्ट पारित किया गया, जिसमें सेक्शन 122 शामिल है। रिपोर्टों के मुताबिक सेक्शन 122 का पहले कभी इस्तेमाल नहीं हुआ था। अगर इसे कोर्ट में चुनौती दी जाती है तो इसकी कानूनी व्याख्या एक नया संवैधानिक विवाद खड़ा कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने अमेरिकी व्यापार नीति में बड़ा मोड़ ला दिया है, जहां एक ओर सरकार को अरबों डॉलर लौटाने पड़ सकते हैं, वहीं दूसरी ओर ट्रम्प प्रशासन ने नए कानूनी प्रावधानों के तहत 15% ग्लोबल टैरिफ लागू कर संकेत दिया है कि व्यापार नीति को लेकर सख्ती जारी रहेगी। आने वाले हफ्तों में यह देखना अहम होगा कि क्या यह मामला फिर कोर्ट तक पहुंचता है और वैश्विक व्यापार संतुलन किस दिशा में जाता है।

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