रक्षा क्षेत्र में भारत का दबदबा: ‘आकाश प्राइम’ बनेगा नई ढाल, नौसेना को मिला ‘निस्तार’ पोत
Akash Prime missile : भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और रणनीतिक ताकत को लेकर एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। हिमालय की ऊंचाई से लेकर समुद्र की गहराई तक, भारत की तीनों सेनाएं अब और अधिक सशक्त और आधुनिक हो रही हैं। हाल ही में किए गए कई रक्षा विकास और सफल परीक्षण इसका प्रमाण हैं।
लद्दाख में सफल परीक्षण, सेना को मिलेगा ‘आकाश प्राइम’
भारतीय सेना जल्द ही अत्याधुनिक ‘आकाश प्राइम’ (Akash Prime missile) मिसाइल प्रणाली की दो रेजीमेंट को सेवा में शामिल करने जा रही है। यह प्रणाली विशेष रूप से लद्दाख जैसे उच्च हिमालयी क्षेत्रों के लिए तैयार की गई है। बीते बुधवार को 15,000 फीट की ऊंचाई पर हुए परीक्षण में इसने ड्रोन जैसे तेज़ रफ्तार लक्ष्यों को सफलतापूर्वक मार गिराया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे भारत की वायु रक्षा प्रणाली के लिए “एक ऐतिहासिक मील का पत्थर” बताया। यह मिसाइल सिस्टम DRDO द्वारा विकसित और भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) द्वारा निर्मित है।
‘आकाश प्राइम’ (Akash Prime missile) प्रणाली में शामिल हैं:
- नई पीढ़ी का रेडियो फ्रीक्वेंसी सीकर
- 360 डिग्री हमले की क्षमता
- 25 किमी तक लक्ष्य भेदन
- उन्नत ग्राउंड सिस्टम और रडार
यह प्रणाली मौजूदा ‘आकाश’ सिस्टम का उन्नत संस्करण है, जिसका उपयोग पहले से थलसेना और वायुसेना कर रही हैं।
मार्च 2023 में हुआ था ₹8,160 करोड़ का समझौता
सेना की वायु रक्षा कोर के लिए दो रेजीमेंट्स की आपूर्ति हेतु केंद्र सरकार ने मार्च 2023 में ₹8,160 करोड़ के करार पर हस्ताक्षर किए थे। इसके अलावा, वायुसेना के पास पहले से ही 15 स्क्वाड्रन और थलसेना के पास 2 रेजीमेंट्स मौजूद हैं।
‘आकाश-NG’ और QRSAM से भविष्य की तैयारी
DRDO ने आकाश का अगला संस्करण ‘आकाश-NG’ (New Generation) भी विकसित किया है, जिसकी रेंज 30 किमी है और यह कैनिस्टर आधारित प्रणाली है। इसमें एक लॉन्चर में 6 मिसाइल रखी जा सकती हैं।
साथ ही, सेना के लिए तीन रेजीमेंट्स ‘क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल’ (QRSAM) भी तैयार की जा रही हैं, जिनकी अनुमानित लागत ₹36,000 करोड़ होगी। यह सिस्टम मोबाइल प्लेटफॉर्म पर आधारित है और युद्ध के समय त्वरित तैनाती की सुविधा देता है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ में दिखा था आकाश सिस्टम का प्रभाव
हाल ही में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भारत ने पाकिस्तान की सीमा पर आकाश मिसाइल सिस्टम का प्रभावी इस्तेमाल किया था। इस दौरान ड्रोन और ‘लॉयटर म्यूनिशन’ जैसे लक्ष्यों को सटीकता से नष्ट किया गया, जिससे भारत की रक्षा क्षमता प्रमाणित हुई।
नौसेना को मिला गहरे समुद्र में ऑपरेशन के लिए ‘निस्तार’ पोत
‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत विकसित ‘निस्तार’ पोत को विशाखापत्तनम में नौसेना में शामिल किया गया। यह पोत:
गहरे समुद्र में डाइविंग ऑपरेशनों
डूबती पनडुब्बियों के बचाव
सैचुरेशन डाइविंग सिस्टम जैसी उन्नत तकनीकों से लैस है।
इसमें 120 MSMEs की भागीदारी और 80% स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।
‘पृथ्वी-2’ और ‘अग्नि-1’ मिसाइलों का सफल परीक्षण
ओडिशा के चांदीपुर रेंज में भारत ने ‘पृथ्वी-2’ और ‘अग्नि-1’ मिसाइलों का सफल परीक्षण किया। ये परीक्षण रणनीतिक बल कमान (SFC) द्वारा किए गए और सभी मानकों पर खरे उतरे।
‘एके-203’ राइफल उत्पादन समय से पहले पूरा करने की योजना
इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (IRRPL) ने यूपी के कोरवा में तैयार की जा रही 6.01 लाख एके-203 असॉल्ट राइफलों की आपूर्ति दिसंबर 2030 तक पूरी करने का लक्ष्य तय किया है। कंपनी के CEO मेजर जनरल एस.के. शर्मा के अनुसार, निर्धारित समय से करीब 22 महीने पहले डिलीवरी पूरी हो सकती है।
भारत की रक्षा प्रणाली को मिले अंतरराष्ट्रीय प्रस्ताव
भारत की ‘आकाश’ प्रणाली को लेकर आर्मेनिया पहला अंतरराष्ट्रीय ग्राहक बन चुका है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को भी यह प्रणाली प्रस्तावित की गई है, जो भारत की वैश्विक रक्षा बाजार में बढ़ती साख को दर्शाता है।
इन हालिया घटनाक्रमों से स्पष्ट है कि भारत अब न केवल अपनी सैन्य क्षमताओं को आधुनिक बना रहा है, बल्कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और निर्यात क्षमता के मोर्चे पर भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। हिमालय की बर्फीली सीमाओं से लेकर समुद्र की गहराइयों तक, भारत की तीनों सेनाएं अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत, सतर्क और तैयार हैं।



