अमेरिका-चीन ट्रेड डील पर सहमति, अब 100% टैरिफ नहीं लगाएंगे ट्रंप…!

US China Trade Deal: अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से जारी व्यापार तनाव के बीच बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल, दोनों देशों ने ट्रेड डील का फ्रेमवर्क तय कर लिया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बताया कि चीनी आयात पर 100% अतिरिक्त टैरिफ लगाने से बचने के लिए दोनों पक्षों के बीच एक फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर सहमति बन गई है। बेसेंट के मुताबिक अब चीन पर लागू होने वाला 100% एक्स्ट्रा टैरिफ नहीं लगेगा। इसके बदले चीन ने अमेरिका से सोयाबीन की खरीद फिर से शुरू करने का फैसला किया है। यह समझौता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात से पहले हुआ है। दोनों नेताओं की मुलाकात इस हफ्ते गुरुवार को साउथ कोरिया में होगी, जहां इस फ्रेमवर्क पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
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बता दें कि राष्ट्रपति ट्रंप इन दिनों एशियाई देशों के दौरे पर हैं। उन्होंने अपनी यात्रा की शुरुआत मलेशिया से की, जहां उन्होंने आसियान समिट में हिस्सा लिया और थाईलैंड-कंबोडिया शांति समझौते पर हस्ताक्षर समारोह में शामिल हुए। इसके बाद वे जापान के लिए रवाना हो गए हैं। चीन के पास दुनिया के 17 दुर्लभ खनिज यानी रेयर अर्थ मटेरियल्स हैं, जिनका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, इलेक्ट्रिक वाहनों और रक्षा उद्योग में किया जाता है। चीन ने पहले से 7 खनिजों पर नियंत्रण रखा था, लेकिन 9 अक्टूबर को उसने 5 और खनिजों जैसे होल्मियम, एर्बियम, थुलियम, यूरोपियम और यटरबियम पर भी नियंत्रण कर लिया। (US China Trade Deal)
चीन का 12 दुर्लभ खनिजों पर कंट्रोल
इस तरह चीन का 17 में से 12 दुर्लभ खनिजों पर कंट्रोल हो गया है। अब इनके निर्यात से पहले चीन से एक्सपोर्ट लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। यह कदम अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है, क्योंकि दुनिया की 70% रेयर अर्थ सप्लाई और 90% प्रोसेसिंग चीन नियंत्रित करता है। इसी बीच चीन ने अपने शीर्ष व्यापार वार्ताकार ली चेंगगैंग को उनके पद से हटा दिया है। वे हाल ही में अमेरिका के साथ हुई चार दौर की वार्ताओं में शामिल थे। सरकारी बयान में बताया गया है कि ली चेंगगैंग को विश्व व्यापार संगठन यानी WTO में चीन के स्थायी प्रतिनिधि पद से हटाया गया है और उनकी जगह ली योंगजीए को नियुक्त किया गया है।
चेंगगैंग के व्यवहार की आलोचना
यह बदलाव उस वक्त हुआ जब अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने ली चेंगगैंग के व्यवहार की आलोचना की थी। बेसेंट ने दावा किया था कि ली बिना बुलाए वॉशिंगटन आए और धमकी दी कि अगर अमेरिका ने बंदरगाह शुल्क लगाया तो चीन वैश्विक अव्यवस्था फैलाएगा। इस बयान के बाद दोनों देशों के अधिकारी नई बातचीत की तैयारी में जुट गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका पहले हमला करता है, फिर मासूम बनता है। एक प्रोफेसर ने कहा कि अमेरिका ने पहले चीन पर हमला किया और अब खुद को निर्दोष दिखाने की कोशिश कर रहा है। (US China Trade Deal)
विशेषज्ञों ने कही ये बात
वहीं एक और प्रोफेसर ने कहा कि यह कदम अमेरिका की गलत मंशा को उजागर करता है। ट्रम्प की टीम अपने फैसलों के नतीजों को नहीं समझ रही। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने चिप्स और तकनीक पर रोक लगाई, अब चीन उसका जवाब दे रहा है। ट्रम्प-जिनपिंग मुलाकात को लेकर कहा कि अगर अमेरिका रिश्ते सुधारना चाहता है, तो उसे ठोस कदम उठाने होंगे। चीन दबाव में नहीं आएगा। एक अन्य प्रोफेसर ने कहा कि चीन ट्रंप की रणनीति को भली-भांति समझता है। इस बार अमेरिका ज्यादा दबाव में है। हमारा संदेश साफ है कि अमेरिका को सहयोग की नीति अपनानी चाहिए। (US China Trade Deal)



