कोयला अवैध वसूली केस में कोई छूट नहीं, HC ने की रानू साहू के करीबी नवनीत तिवारी की जमानत याचिका खारिज
Coal illegal Recovery Case: रायगढ़ के पूर्व कलेक्टर रानू साहू के करीबी नवनीत तिवारी की जमानत याचिका को बिलासपुर हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। तिवारी पर आरोप है कि उन्होंने एक संगठित सिंडिकेट के माध्यम से कोयला परिवहन पर अवैध कोल लेवी वसूली की। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि आर्थिक अपराध व्यक्तिगत लाभ के लिए ठंडे दिमाग से किए जाते हैं और समुदाय पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों की परवाह नहीं करते। कोर्ट ने कहा कि जबकि हत्या भावनाओं में की जा सकती है, आर्थिक अपराध देश की अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय हित को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं।
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आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो की शिकायत पर एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने नवनीत तिवारी के खिलाफ जनवरी 2024 में मामला दर्ज किया था। उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत कार्रवाई की गई। अभियोजन के मुताबिक 11 जनवरी 2024 को संदीप आहूजा, डिप्टी डायरेक्टर, डायरेक्टरेट ऑफ एनफोर्समेंट, रायपुर ने फरहान कुरैशी, डिप्टी एसपी के माध्यम से डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस, ACB और EOW, छत्तीसगढ़ के सामने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के दौरान पाए गए अपराध की शिकायत दर्ज कराई। 17 जनवरी 2024 को रायपुर ACB/EOW पुलिस स्टेशन में 35 आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई। इसमें रानू साहू समेत कई प्राइवेट और सरकारी अधिकारी शामिल थे।
साजिश और अवैध वसूली
अभियोजन का आरोप है कि नवनीत तिवारी और उसके सहयोगियों ने राजनेताओं और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के सक्रिय समर्थन से सरकारी नीतियों में बदलाव करवाया। जुलाई 2020 में एक सरकारी आदेश के तहत परिवहन परमिट की ऑनलाइन प्रणाली को मैनुअल प्रणाली में बदला गया। इसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ में कोयले के परिवहन पर प्रति टन 25 रुपये जबरन वसूली की। जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की एकलपीठ ने तिवारी की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल में देरी या गिरफ्तारी की वैधता पर याचिका में कोई ठोस सबूत नहीं है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि आर्थिक अपराध गंभीर और जानबूझकर किए जाते हैं।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि तिवारी की संलिप्तता प्रारंभिक जांच में स्पष्ट रूप से झलकती है और ऐसे अपराध व्हाइट कॉलर क्राइम के अंतर्गत आते हैं, जिन्हें हल्के में नहीं लिया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि आर्थिक अपराध देश की अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय हित को नुकसान पहुंचाते हैं, इसलिए उन्हें गंभीर अपराध के रूप में देखा जाना चाहिए। नवनीत तिवारी की जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब मामला आगे ट्रायल के लिए तैयार है। इस केस ने स्पष्ट कर दिया है कि उच्च पदस्थ सरकारी अधिकारियों और प्राइवेट व्यक्तियों द्वारा आर्थिक अपराधों को अंजाम देने पर भी कानूनी कार्रवाई में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। (Coal illegal Recovery Case)



