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Anmol News Special: छत्तीसगढ़ में ‘लाल आतंक’ के अंत का काउंटडाउन शुरू, नक्सलवाद के खात्मे के लिए बचे अब सिर्फ 78 दिन

Countdown to End Naxalism: बस्तर की फिजाओं से बारूद की गंध मिटाने और लाल आतंक को हमेशा के लिए दफन करने की अंतिम पटकथा लिखी जा चुकी है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की तय की गई 31 मार्च 2026 की डेडलाइन अब नजदीक है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अब सुरक्षाबलों के पास सिर्फ 78 दिन का समय बचा है। 2025 की ऐतिहासिक सफलताओं ने यह साफ कर दिया है कि छत्तीसगढ़ अब नक्सलवाद के अंतिम दौर में है। साल 2025 नक्सल विरोधी अभियानों के इतिहास में टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। सुरक्षाबलों ने अंधाधुंध कॉम्बिंग के बजाय पिन-पॉइंट इंटेलिजेंस पर काम किया।

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2025 में कुल 99 मुठभेड़ हुई, जिनमें रिकॉर्ड 256 नक्सली मारे गए। यह पिछले 5 सालों का सबसे बड़ा आंकड़ा है। पिछले डेढ़ साल में 23 बड़े नक्सली मारे गए हैं, जिनमें सबसे खूंखार नाम माड़वी हिड़मा, सचिव बसवाराजू और गणेश उइके शामिल हैं। 2025 में 884 नक्सलियों की गिरफ्तारी हुई, जिससे उनका शहरी नेटवर्क और सप्लाई तंत्र पूरी तरह बिखर गया है। नक्सली संगठन के भीतर बढ़ते अविश्वास और सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव का नतीजा है कि अब बड़े लीडर हथियार डाल रहे हैं। भूपति, रूपेश, बारसे देवा और रामधेर जैसे बड़े नक्सली लीडर अपने सैकड़ों साथियों के साथ सरेंडर कर दिया है। हाल ही में बारसे देवा ने हैदराबाद में आत्मसमर्पण किया, जो संगठन के लिए बहुत बड़ी क्षति मानी जा रही है।

पिछले एक साल में 11 सीसी मेंबर और पोलित ब्यूरो सदस्य या तो मारे गए हैं या पुलिस के सामने घुटने टेक चुके हैं। बस्तर में अब सिर्फ 200 से 300 नक्सली बचे हैं, जो टुकड़ों में छिपे हैं। एक समय नक्सलियों का सबसे सुरक्षित गलियारा माना जाने वाला महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ (MMC) जोन अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। उत्तर बस्तर और माड़ डिवीजन से भी नक्सलियों का सफाया हो गया है। वर्तमान में बस्तर के जंगलों में सुरक्षाबलों का सबसे बड़ा सिरदर्द पापा राव है, जो पश्चिम बस्तर एरिया कमेटी का कमांडर है। 6 जनवरी 2025 को कुटरू-बेदरे रोड पर हुए IED ब्लास्ट का मास्टरमाइंड यही था, जिसमें 8 जवान शहीद हुए थे। उसका पकड़ा जाना या मारा जाना बस्तर में नक्सल नेतृत्व की अंतिम कड़ी को तोड़ने जैसा होगा। सुरक्षा एजेंसियों ने अगले 78 दिनों के लिए इन शीर्ष नामों पर फोकस किया है।

फोर्स के रडार पर ये 4 बड़े नाम

थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी (61), इनाम- 1 करोड़ से ज्यादा

वर्तमान में नक्सली संगठन में महासचिव है। बसवाराजू के बाद संगठन की पूरी कमान इसी के हाथों में है। वह पोलित ब्यूरो का सबसे प्रभावशाली सदस्य है। देवजी को रणनीतिक रूप से बहुत चतुर माना जाता है। तेलंगाना का मूल निवासी होने के कारण उसे दक्षिण और मध्य भारत की भौगोलिक स्थिति की गहरी समझ है। छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र, ओडिशा और तेलंगाना पुलिस को भी इसकी तलाश है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस पर 1 करोड़ का इनाम घोषित कर रखा है। इसका पकड़ा जाना संगठन के ‘दिमाग’ को ठप करने जैसा होगा।

मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति (74), इनाम- 1.5 करोड़ से ज्यादा

गणपति करीब 25 सालों तक संगठन का महासचिव रहा। उसने ही अलग-अलग नक्सली गुटों को मिलाकर नक्सल संगठन का गठन किया था। हालांकि उम्र और बिगड़ते स्वास्थ्य के कारण उसने पद छोड़ दिया है, लेकिन वह अभी भी संगठन का सबसे बड़ा मार्गदर्शक है। सुरक्षा एजेंसियां मानती हैं कि गणपति के पास संगठन के छिपे हुए फंड और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की पूरी जानकारी है। उस पर 1.5 करोड़ से ज्यादा का इनाम घोषित है। (Countdown to End Naxalism )

मिशिर बेसरा उर्फ भास्कर (62)- इनाम- 1 करोड़ से ज्यादा

भास्कर मुख्य रूप से झारखंड और सारंडा के जंगलों का एक्सपर्ट है। वह ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो का इंचार्ज है। पोलित ब्यूरो मेंबर होने के नाते, वह झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल में नक्सली गतिविधियों का संचालन करता है। बस्तर के नक्सलियों को रसद और हथियारों की सप्लाई में इसकी बड़ी भूमिका मानी जाती है। भास्कर पर भी 1 करोड़ का इनाम है। हाल के दिनों में झारखंड में सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव के कारण इसके छत्तीसगढ़ की सीमा में शरण लेने की खबरें आती रही हैं।

पापाराव उर्फ मंगू (56)- इनाम- 25 लाख

सुकमाका मूल निवासी होने के कारण इसे बस्तर की एक-एक पगडंडी की जानकारी है। पापाराव DKSZCM (दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी) का ताकतवर सदस्य है। पापाराव को ‘गुरिल्ला वॉर’ का उस्ताद माना जाता है। वह हमेशा आधुनिक AK-47 से लैस रहता है और जवानों पर घातक एम्बुश (घात लगाकर हमला) लगाने के लिए कुख्यात है। बीजापुर और सुकमा के इलाकों में चल रहे विकास कार्यों में सबसे बड़ा रोड़ा पापाराव ही है। पुलिस का मानना है कि अगर पापाराव का सफाया होता है तो पश्चिम बस्तर डिवीजन का पूरा नेटवर्क ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगा।

डेढ़ सालों में इन टॉप नक्सलियों का हुआ खात्मा

नक्सली लीडर पद  इनाम राशि 
बसवाराजू महासचिव, पोलित ब्यूरो मेंबर 1.5 करोड़
गणेश उइके उर्फ चमरू दादा सेंट्रल कमेटी मेंबर 1.1 करोड़
जयराम उर्फ चलपति सेंट्रल कमेटी मेंबर 1 करोड़
नरसिम्हा चालम उर्फ गौतम सेंट्रल कमेटी मेंबर 1 करोड़
मोडेम बालकृष्णन उर्फ भास्कर सेंट्रल कमेटी मेंबर 1 करोड़
सहदेव सोरेन उर्फ प्रयाग सेंट्रल कमेटी मेंबर 1 करोड़
माड़वी हिड़मा उर्फ संतोष सेंट्रल कमेटी मेंबर 1 करोड़
विवेक उर्फ प्रयाग मांझी सेंट्रल कमेटी मेंबर 1 करोड़
कोसा उर्फ कादरी सत्यनारायण रेड्डी सेंट्रल कमेटी मेंबर 40 लाख
राजू उर्फ कट्टा रामचंद्र रेड्डी सेंट्रल कमेटी मेंबर 40 लाख
गजरला रवि सेंट्रल कमेटी मेंबर 40 लाख
मुंडूगुला भास्कर राव DKSZCM 45 लाख
रेणुका उर्फ भानु DKSZCM 45 लाख
भास्कर मंचेरियल DVC सचिव 45 लाख
रेणुका सेंट्रल रीजनल ब्यूरो प्रेस टीम मेंबर 45 लाख
जंगू नवीन उर्फ मधु DKSZCM 25 लाख
रणधीर DKSZCM 25 लाख
नीति उर्फ निर्मला DKSZCM 25 लाख
रूपेश DKSZCM 25 लाख
जोगन्ना DKSZCM 25 लाख
दसरू DKSZCM 25 लाख
राजे DKSZCM 25 लाख
सुधीर उर्फ सुधाकर DKSZCM 25 लाख
कुहड़ामी जगदीश DKSZCM 25 लाख

इन बड़े नक्सलियों ने छोड़े हथियार

भूपति (विवेक, सोनू, मलोजुला वेणुगोपाल और लक्ष्मीपति)

भूपति ने 14 अक्टूबर 2025 को गढ़चिरौली में सरेंडर किया था। भूपति नक्सल आंदोलन का मास्टर माइंड था। 6 करोड़ का इनाम उसकी अहमियत बताने के लिए काफी है। यह राशि किसी भी सक्रिय नक्सली के लिए अब तक की सबसे ऊंची श्रेणियों में से एक है। भूपति नक्सली संगठन की सबसे शक्तिशाली ईकाई पोलित ब्यूरो और केंद्रीय कमेटी का सदस्य था। भूपति खूंखार नक्सली नेता कोटेश्वर राव उर्फ किशनजी का छोटा भाई है, जो 2011 में पश्चिम बंगाल में मुठभेड़ में मारा गया था। वेणुगोपाल पर छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तेलंगाना जैसे राज्यों को मिलाकर 6 करोड़ का भारी भरकम इनाम घोषित था। उसका सरेंडर करना नक्सल विचारधारा के लिए सबसे बड़ी हार मानी गई, क्योंकि वो सुरक्षाबलों पर हुए कई बड़े हमलों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने का मास्टरमाइंड रहा है।

रूपेश (तक्कल्लापल्ली वासुदेव राव, सतीश उर्फ आसन्ना उर्फ विकल)

रूपेश ने 17 अक्टूबर 2025 को जगदलपुर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और गृहमंत्री विजय शर्मा की उपस्थिति में आत्मसमर्पण किया था। वो सेंट्रल कमेटी मेंबर (CCM) और नॉर्थ-वेस्ट सब-जोनल ब्यूरो का इंचार्ज था। रूपेश नक्सली संगठन के मिलिट्री विंग का इंटेलिजेंस चीफ और बम बनाने का विशेषज्ञ भी माना जाता था। रूपेश ने अकेले नहीं, बल्कि अपने 200 से ज्यादा साथियों के साथ एक साथ हथियार डाले थे। इसे बस्तर के इतिहास का सबसे बड़ा सामूहिक आत्मसमर्पण माना जाता है। केंद्रीय कमेटी का सदस्य होने के नाते उस पर 1 करोड़ का इनाम घोषित था। सरेंडर के बाद रूपेश ने कहा था कि बदलती परिस्थितियों और आंतरिक मतभेदों के कारण सशस्त्र संघर्ष को विराम देना ही एकमात्र विकल्प बचा था। रूपेश का कद संगठन के भीतर एक थिंक टैंक का था, जिसका मुख्यधारा में आना नक्सली इंटेलिजेंस नेटवर्क की पूरी तरह हार माना गया।

रामधेर मज्जी (मज्जी कोंडा राव)

मज्जी ने 8 दिसंबर 2025 को अपने 11 साथियों के साथ हथियार डाले थे, जिसके बाद MMC जोन पूरी तरह क्लीन मान लिया गया। 1 करोड़ की राशि इसे मोस्ट वॉन्टेड की श्रेणी में खड़ा करती थी। रामधेर नक्सलियों के सबसे ताकतवर समितियों में से एक केंद्रीय कमेटी का वरिष्ठ सदस्य था, जो मुख्य रूप से MMC जोन (महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़) का प्रभारी था। उसका मुख्य काम बस्तर से बाहर नक्सलवाद का विस्तार करना और नए कॉरिडोर बनाना था। उस पर छत्तीसगढ़ सरकार और अन्य राज्यों को मिलाकर 1 करोड़ का इनाम घोषित था। रामधेर का अपने पूरे दस्ते के साथ हथियार डालना सुरक्षाबलों के लिए एक बड़ी मनोवैज्ञानिक जीत थी, क्योंकि वह संगठन का एक पुराना और अनुभवी स्तंभ माना जाता था। उसके जाने के बाद MMC जोन में नक्सलियों का नेतृत्व पूरी तरह खत्म हो गया।

बारसे देवा (सुक्का)

देवा ने 3 जनवरी 2026 को तेलंगाना में सरेंडर कर दिया, जिस पर 50 लाख रुपए का इनाम घोषित था। देवा बारसे को मोस्ट वॉन्टेड नक्सली मांडवी हिड़मा का सबसे भरोसेमंद साथी माना जाता था। हिड़मा के मारे जाने के बाद देवा ही वह व्यक्ति था जो दक्षिण बस्तर में नक्सलियों की सैन्य ताकत को संभाल रहा था। देवा सुकमा के उसी पुवर्ती गांव का रहने वाला है, जो नक्सलियों का सबसे सुरक्षित किला माना जाता था। उसका सरेंडर करना यह संदेश देता है कि अब नक्सलियों के सबसे सुरक्षित गढ़ भी दरक रहे हैं। बटालियन नंबर-1 नक्सलियों की सबसे घातक हमलावर यूनिट है। दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZCM) मेंबर और बटालियन नंबर-1 के पूर्व प्रभारी का सरेंडर करना नक्सलियों की लड़ाकू क्षमता को शून्य करने जैसा है।

2025 के आंकड़ों पर एक नजर

मुठभेड़ 99
नक्सली ढेर 256
गिरफ्तार नक्सली 884
सरेंडर नक्सली 1562
नक्सली बरामद हथियार 645
बरामद IED 875
शहीद जवान 23
नक्सलियों ने की लोगों की हत्या 46

 

सुरक्षाबलों के लिए यह ‘करो या मरो’ की स्थिति है। पिछले साल हिड़मा जैसे बड़े चेहरे के खात्मे और बारसे देवा के सरेंडर के बाद अब ये चार नाम ही संगठन को ऑक्सीजन दे रहे हैं। अगर अगले 78 दिनों में इनमें से एक भी बड़ा नाम पुलिस की गिरफ्त में आता है तो बचे हुए 200-300 कैडर का मनोबल पूरी तरह टूट जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अगले 78 दिनों में पापा राव और देवजी जैसे चेहरों पर प्रहार होता है तो 31 मार्च 2026 तक बस्तर को नक्सल मुक्त घोषित करने का लक्ष्य पूरी तरह हासिल कर लिया जाएगा। यह काउंटडाउन न सिर्फ पापाराव और देवजी जैसे चेहरों की तलाश है, बल्कि बस्तर की माटी से नक्सलवाद के आखिरी निशान को मिटाने का महाअभियान भी है। (Countdown to End Naxalism)

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