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छत्तीसगढ़ में नक्सल संगठन को बड़ा झटका, टॉप नक्सली लीडर थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी ने किया सरेंडर

Naxalite Leader Devji Surrender: नक्सली संगठन को बड़ा झटका लगा है। संगठन के टॉप लीडर थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी ने 24 फरवरी को अपने तीन साथियों के साथ तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। देवजी के साथ सीसीएम (CCM) संग्राम, एससीएम (SCM) दामोदर और एससीएम नरसिम्हा रेड्डी ने भी हथियार डाले हैं। बसवा राजू के मारे जाने के बाद नक्सली संगठन ने देवजी को पोलित ब्यूरो का महासचिव बनाया था। हिड़मा के बाद वह संगठन का सबसे बड़ा चेहरा माना जा रहा था। देवजी पर छत्तीसगढ़ सरकार ने डेढ़ करोड़ रुपए का इनाम घोषित किया था, जबकि तेलंगाना पुलिस ने 25 लाख रुपए का इनाम रखा था। कुल मिलाकर उस पर 2 करोड़ रुपए का इनाम था।

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वहीं संग्राम पर 1 करोड़ का इनाम घोषित था, जबकि तेलंगाना में दोनों पर 25-25 लाख का इनाम था। 65 साल के देवजी तेलंगाना के जगतियाल क्षेत्र का रहने वाला है, जो इंटरमीडिएट की पढ़ाई के दौरान कट्टरपंथी छात्र संगठन आरएसयू से जुड़ा और 1983-84 में गढ़चिरोली दलम का सदस्य बना। तब से वह करीब 40 सालों तक नक्सली संगठन में सक्रिय रहा। वह नक्सलियों के पोलित ब्यूरो और सेंट्रल कमेटी का सदस्य रह चुका है और सेंट्रल मिलिट्री कमीशन का प्रभारी भी था। बड़े नक्सली हमलों की रणनीति बनाने वाली कोर टीम में उसकी अहम भूमिका रही। तेलंगाना पुलिस के मुताबिक देवजी छत्तीसगढ़ में मोस्ट वांटेड नक्सली था और बस्तर में 131 से ज्यादा जवानों की हत्या का आरोपी है। 

बड़े हमलों का मास्टरमाइंड

वो कई बड़े हमलों का मास्टरमाइंड रहा है, जिनमें 6 अप्रैल 2010 को हुए ताड़मेटला हमला में शामिल हैं, जिसमें 76 जवान शहीद हुए थे। 15 मार्च 2007 को रानीबोदली हमले में 55 जवान शहीद हुए थे। इन हमलों ने देशभर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे। इधर, कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों में सुरक्षाबलों का बड़ा अभियान जारी है। गृहमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि अब तक 89 IED बरामद किए जा चुके हैं। बचे नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने का अंतिम अवसर दिया गया है। 17 फरवरी को CRPF के नेतृत्व में सुरक्षाबलों ने ‘KGH-2’ ऑपरेशन लॉन्च किया है। इसके तहत सुरक्षाबल मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर, मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति उर्फ रमन्ना और राजी रेड्डी समेत करीब 300 नक्सलियों की तलाश कर रहे हैं। (Naxalite Leader Devji Surrender)

डिप्टी CM और गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा है कि नक्सलवाद अपने अंतिम पड़ाव पर है। कुछ बड़े नामों से बातचीत जारी है और 31 मार्च तक नक्सलवाद के खात्मे का लक्ष्य रखा गया है। सूत्रों के मुताबिक बस्तर के अलग-अलग इलाकों में अब करीब 200 सशस्त्र नक्सली ही बचे हैं, जो छोटे-छोटे समूहों में छिपे हुए हैं। महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ (MMC) जोन पूरी तरह खत्म होने की बात कही जा रही है। उत्तर बस्तर और माड़ डिवीजन में भी नक्सली प्रभाव लगभग समाप्त बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक दक्षिण बस्तर के जंगलों में पापाराव अपने साथियों के साथ छिपा हुआ है, जबकि मिशिर बेसरा के झारखंड में होने की सूचना है। (Naxalite Leader Devji Surrender)

इन दो बड़े नक्सलियों पर नजर

छत्तीसगढ़ में एंटी नक्सल ऑपरेशन की अंतिम कड़ी अब दो बड़े नामों पर आकर टिक गई है। पहला मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति/रमन्ना/राजन्ना, जिस पर 3.5 करोड़ रुपए का इनाम घोषित है। दूसरा मिशिर बेसरा उर्फ भास्कर/सर्निमल/सुनील, जिस पर 1.30 करोड़ रुपए का इनाम है। गणपति लंबे समय तक नक्सली संगठन का शीर्ष चेहरा और रणनीतिकार रहा है। कई बड़े हमलों की योजना बनाने में उसकी भूमिका बताई जाती है, जबकि मिशिर बेसरा संगठन के सैन्य ढांचे का अहम कमांडर माना जाता है और झारखंड-छत्तीसगढ़ क्षेत्र में सक्रिय रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इनके सरेंडर या एनकाउंटर के बाद छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे की औपचारिक घोषणा की जा सकती है। (Naxalite Leader Devji Surrender)

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