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छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी, पूर्व CM भूपेश बघेल ने सरकार को घेरा

Doctors Shortage in Hospitals: छत्तीसगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की भारी कमी देखी जा रही है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या कम होने और वेतन में विसंगति के कारण कई डॉक्टर नौकरी छोड़ रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश में सिर्फ 10 नियमित सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर कार्यरत हैं। सूत्रों के मुताबिक संविदा प्रोफेसर को करीब 3 लाख रुपए वेतन मिलता है, जबकि नियमित प्रोफेसर को करीब 2.70 लाख रुपए वेतन मिलता है। इस वेतन विसंगति के कारण अब तक 15 सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों ने अपनी नौकरी छोड़ दी है।

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विशेष रूप से DKS से 10 और मेकाहारा से 5 सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों ने नौकरी छोड़ने का फैसला लिया है। वहीं 9 साल से वेतन विसंगति को लेकर फाइल अटकी हुई है, जिसका प्रभाव डॉक्टरों की नियुक्तियों पर भी पड़ा है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे लेकर सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि हमारे शासनकाल में सभी जगह डॉक्टर उपलब्ध थे। बलरामपुर में ब्लड बैंक खुला हुआ था और कोई पद खाली नहीं था। अब स्थिति यह है कि रायपुर में लोग नौकरी छोड़कर जा रहे हैं। इस पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि डीकेएस और मेडिकल कॉलेज में इंटरव्यू के माध्यम से भर्ती की जाती है, लेकिन कई पद अभी भी खाली रह जाते हैं।

नई भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत

उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की भर्ती कैसे बढ़ाई जाए, इस पर विभाग विशेष चिंता के साथ विचार कर रहा है। इस बीच प्रदेश के गवर्नमेंट कॉलेजों में करीब 700 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है। इनमें सहायक प्राध्यापक के 625 पद, ग्रंथपाल के 50 पद और क्रीड़ा अधिकारी के 25 पद शामिल हैं। उच्च शिक्षा विभाग ने आरक्षण रोस्टर और विषयवार रिक्तियों का निर्धारण करते हुए रोस्टर ब्रेक-अप तैयार किया है। भर्ती प्रक्रिया को पूरा करने के लिए विभाग ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग यानी CGPSC को पत्र भेजा है। (Doctors Shortage in Hospitals)

वेतन विसंगति का समाधान जल्द जरुरी: विशेषज्ञ

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वेतन विसंगति का समाधान जल्द नहीं किया गया और नई भर्ती प्रक्रिया सुचारु रूप से पूरी नहीं हुई तो सरकारी अस्पतालों और कॉलेजों में विशेषज्ञों की कमी और बढ़ सकती है, जिससे छात्रों और मरीजों दोनों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों और अन्य शैक्षणिक स्टाफ की कमी को जल्दी ही पूरा करना अत्यंत आवश्यक है। नई भर्ती प्रक्रिया और वेतन विसंगति के समाधान से ही छात्रों और मरीजों को बेहतर सुविधा मिल सकेगी। स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों क्षेत्रों में यह कदम प्रदेश के लिए अहम चुनौती और अवसर दोनों साबित होगा।

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