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बालोद में आदिवासी विधवा से गैंगरेप, पंचायत ने 40-40 हजार लेकर दबाया मामला, पुलिस ने दो आरोपियों को पकड़ा 

Gang Rape in Balod: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक आदिवासी विधवा महिला के साथ तीन युवकों ने सामूहिक दुष्कर्म किया। हैरानी की बात यह है कि जब पीड़िता न्याय के लिए पहुंची तो गांव के प्रमुखों ने आरोपियों से 40-40 हजार रुपए लेकर मामले को रफा-दफा कर दिया, लेकिन जब महिला को न्याय नहीं मिला तो उसने हिम्मत जुटाकर थाने का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि तीसरा आरोपी अब भी फरार है, जिसकी तलाश जारी है।

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मामला बालोद थाना क्षेत्र के करहीभदर गांव का है, जहां 22 फरवरी 2026 की रात आरोपी रोशन कुमार साहू के घर शराब पार्टी चल रही थी। इसी दौरान वहां से लौट रहे विकास सिन्हा को गांव के नल के पास 37 साल की विधवा महिला दिखाई दी। बताया जा रहा है कि विकास सिन्हा ने अपने साथी कमल कुमार सेन को फोन कर बुलाया और दोनों ने मिलकर महिला को जबरन उठा लिया। इसके बाद उसे करीब 300 मीटर दूर सुनसान जगह पर ले जाया गया। वहां उन्होंने तीसरे आरोपी रोशन कुमार साहू को भी फोन कर बुला लिया। (Gang Rape in Balod)

आरोपियों ने बारी-बारी से किया गैंगरेप

पीड़िता के मुताबिक तीनों युवकों ने देर रात तक उसके साथ बारी-बारी से गैंगरेप किया। विरोध करने पर आरोपियों ने महिला के साथ बेरहमी से मारपीट की और जातिगत गालियां देते हुए जान से मारने की धमकी भी दी। घटना के बाद पीड़िता न्याय की उम्मीद लेकर ग्रामीणों और समाज के लोगों के पास पहुंची, लेकिन वहां भी उसे न्याय नहीं मिला। पीड़िता का आरोप है कि गांव में बैठक बुलाकर आरोपियों से 40-40 हजार रुपए दंड के रूप में लेकर मामले को वहीं दबा दिया गया। इस फैसले से आहत महिला ने आखिरकार बालोद थाने पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने 13 मार्च को FIR दर्ज कर जांच शुरू की। ASP मोनिका ठाकुर के मुताबिक पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी विकास सिन्हा और कमल कुमार सेन को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि तीसरे आरोपी रोशन कुमार साहू की तलाश जारी है। जानकारी के मुताबिक पीड़िता की लव मैरिज हुई थी, लेकिन पति की मौत के बाद वह अपने मायके में रह रही थी। आरोपी रोशन कुमार साहू वार्ड क्रमांक-10 का पंच बताया जा रहा है। विकास सिन्हा बाजार का ठेकेदार है, जबकि कमल कुमार सेन पेशे से ड्राइवर है। (Gang Rape in Balod)

आखिर कब मिलेगा पीड़िता को न्याय ?

पुलिस फरार आरोपी की तलाश में जुटी हुई है, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर गांवों में पंचायत स्तर पर गंभीर अपराधों को पैसे लेकर दबाने की परंपरा कब खत्म होगी। इस घटना ने गांवों में होने वाली उस कुप्रथा को उजागर कर दिया है, जहां गंभीर अपराधों को भी पंचायत स्तर पर पैसों के लेन-देन से दबाने की कोशिश की जाती है। बालोद की यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि उस सोच पर भी सवाल है, जहां अपराध को दबाने की कोशिश की जाती है। अब देखना होगा कि कानून के जरिए पीड़िता को कितना और कब तक न्याय मिल पाता है।

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