छत्तीसगढ़ विधानसभा में गूंजा जंगल, जमीन और उद्योग का मुद्दा, पेड़ कटाई से लेकर जमीन आवंटन तक सरकार और विपक्ष आमने-सामने

Issue of Tree Cutting: छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज वन और उद्योग से जुड़े दो बड़े मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिली। एक तरफ भानुप्रतापपुर वन मंडल में कथित अवैध पेड़ कटाई का मामला उठा तो वहीं सरायपाली में सोलर प्लांट के लिए जमीन आवंटन को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा। विधानसभा में पूर्व वन मंत्री और विधायक विक्रम मंडावी ने ध्यानाकर्षण के जरिए भानुप्रतापपुर वन मंडल में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि वन विभाग की ही रिपोर्ट में करीब 5 हजार पेड़ कटने की बात सामने आई थी, जो 2021 का मामला है, लेकिन अब तक जिम्मेदारों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। (Issue of Tree Cutting)
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इस पर जवाब देते हुए वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि यह अवैध कटाई नहीं है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने गोदावरी पावर एंड इस्पात लिमिटेड को खनन की अनुमति दी है, जिसके तहत 33,040 पेड़ों की कटाई की स्वीकृति दी गई थी। यह पूरी प्रक्रिया वन विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में की गई। हालांकि मंत्री ने यह भी माना कि 2,890 पेड़ों के लकड़ी का रिकॉर्ड नहीं मिला है, जिस पर 11 अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है। साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
जमीन आवंटन का उठा मुद्दा
वहीं प्रश्नकाल के दौरान सरायपाली में सोलर प्लांट के लिए जमीन आवंटन का मामला भी गरमा गया। कांग्रेस विधायक चातुरी नंद ने महासमुंद जिले के जंगलबेड़ा गांव में गोदावरी पावर एंड इस्पात लिमिटेड को दी गई जमीन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि करीब 1.93 हेक्टेयर शासकीय जमीन को मात्र 4 लाख 82 हजार 300 रुपए में 99 साल के लिए लीज पर दे दिया गया, जबकि कुल मिलाकर 253 एकड़ जमीन उद्योग की वास्तविक जरूरत से कहीं ज्यादा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सोलर प्लांट के लिए इतनी बड़ी भूमि का निर्धारण किस स्तर पर और किन मापदंडों के आधार पर किया गया। (Issue of Tree Cutting)
उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने दिया जवाब
इस पर उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने जवाब देते हुए कहा कि जमीन का आवंटन पूरी तरह राज्य की औद्योगिक नीति के तहत और चरणबद्ध प्रक्रिया के अनुसार किया गया है। उन्होंने बताया कि 4 दिसंबर 2024 को कंपनी के साथ अनुबंध हुआ, 30 दिसंबर 2024 को कलेक्टर महासमुंद से एनओसी मिली, 25 फरवरी 2025 को 102 हेक्टेयर शासकीय भूमि उद्योग विभाग को हस्तांतरित हुई, 6 मार्च 2025 को यह भूमि सीएसआईडीसी को सौंपी गई और 22 मई 2025 को सीएसआईडीसी ने इसे कंपनी को लीज पर दे दिया। मंत्री ने कहा कि 102 हेक्टेयर जमीन 4.82 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर की दर से 99 सालों के लिए दी गई है। (Issue of Tree Cutting)
मंत्री के जवाब को बताया भ्रामक
मंत्री ने बताया कि इसकी कुल वार्षिक देनदारी लगभग 4 करोड़ 77 लाख रुपए बनती है। साथ ही हर साल 28 लाख 644 रुपए का लीज रेंट भी निर्धारित किया गया है। हालांकि चातुरी नंद ने मंत्री के जवाब को भ्रामक बताते हुए कहा कि कलेक्टर की ओर से जमीन केवल औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना के लिए दी गई थी, न कि किसी विशेष निजी इकाई को आवंटन के लिए। उन्होंने आरोप लगाया कि नियमों को दरकिनार कर जमीन सीधे निजी कंपनी को सौंप दी गई और पूछा कि क्या इसके लिए शासन से अलग से अनुमति ली गई थी। इसी मुद्दे पर विधायक द्वारकाधीश यादव ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी बड़ी जमीन बेहद कम दर पर किस नियम के तहत दी गई।
विपक्ष ने किया जोरदार हंगामा
मंत्री ने दोहराया कि यह आवंटन नवीन ऊर्जा को बढ़ावा देने और सौर विद्युत परियोजना स्थापित करने की नीति के तहत किया गया है, जिसमें रियायतें भी प्रावधानित हैं। वहीं पर्यावरणीय नुकसान के आरोपों पर मंत्री ने स्वीकार किया कि पेड़ कटाई और तालाब पाटने की शिकायतें मिली थी, जिन पर कार्रवाई की जा चुकी है और कलेक्टर की ओर से एक उच्च स्तरीय समिति का गठन भी किया गया है। इसके बावजूद विपक्ष सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ और सदन में इस मुद्दे को लेकर जोरदार हंगामा देखने को मिला। छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज की कार्यवाही ने साफ कर दिया कि राज्य में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन का मुद्दा अभी भी सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल बना हुआ है। अब देखना होगा कि इन मामलों में जांच और कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है। क्योंकि विपक्ष लगातार पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग पर अड़ा हुआ है।



