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छत्तीसगढ़ के स्कूलों में होगा बड़ा बदलाव, रोज मंत्रोच्चार से होगी पढ़ाई की शुरुआत, सियासत भी तेज

School Education System: छत्तीसगढ़ की स्कूल शिक्षा व्यवस्था में आने वाले सत्र से बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने नई शिक्षा नीति को लेकर कई अहम घोषणाएं की हैं, जिनमें पढ़ाई के साथ संस्कार, परंपरा और आधुनिक तकनीक को जोड़ने पर जोर दिया गया है। मंत्री के मुताबिक अब स्कूलों में हर दिन की शुरुआत राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के साथ 2-3 मंत्रों के उच्चारण से होगी। इसके साथ ही छात्रों को पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक तकनीक, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की जानकारी भी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि बच्चों को बारहखड़ी से लेकर AI तक की शिक्षा दी जाएगी, ताकि वे सांस्कृतिक और तकनीकी दोनों रूप से सक्षम बन सकें। नई व्यवस्था के तहत स्कूलों में कई गतिविधियों को शामिल किया जाएगा।

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शिक्षा व्यवस्था में क्या-क्या होंगे बदलाव ?

  • रोज राष्ट्रगीत-राष्ट्रगान के साथ मंत्रोच्चार
  • हर दिन एक महापुरुष के जीवन पर 5 मिनट का व्याख्यान
  • शनिवार को लोकल खेल और तीज-त्योहारों का आयोजन
  • योग, गार्डेनिंग और हाउसकीपिंग जैसी गतिविधियां अनिवार्य
  • स्कूलों को मंदिर स्वरूप मानकर संचालन

वहीं 15 अप्रैल से 15 जून तक राज्यभर के शिक्षकों और प्रिंसिपलों की ट्रेनिंग कराई जाएगी, जिसमें उन्हें AI आधारित शिक्षा की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। मंत्री गजेंद्र यादव का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य बच्चों को सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें संस्कार, परंपरा और आधुनिक तकनीक से जोड़ना है। सरकार का मानना है कि इससे छात्रों का समग्र विकास होगा। इस पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। PCC चीफ दीपक बैज ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार पहले स्कूलों की बुनियादी समस्याओं को दूर करे। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्कूलों में अब तक किताबें उपलब्ध नहीं हैं। (School Education System)

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बैज ने कहा कि RTE के तहत एडमिशन नहीं हो रही है। कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी है। बच्चियों के लिए शौचालय जैसी सुविधाएं भी नहीं हैं। बैज ने तंज कसते हुए कहा कि क्या सरकार स्कूलों को शिशु मंदिर बनाना चाहती है। साथ ही कहा कि सरकार को पहले शिक्षा व्यवस्था की मूलभूत जरूरतों पर ध्यान देना चाहिए। न कि स्कूल में श्लोक पढ़ाने को लेकर मेहनत करनी चाहिए। इस फैसले के बाद राज्य में शिक्षा को लेकर सियासी बहस छिड़ गई है, जहां सरकार इसे शिक्षा सुधार का बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे प्राथमिक मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश मान रहा है। अब देखना होगा कि छत्तीसगढ़ सरकार का यह प्रयोग शिक्षा के क्षेत्र में नया अध्याय लिखता है या फिर यह सियासत का नया मुद्दा बनकर रह जाता है। (School Education System)

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