बस्तर में बच्चा चोरी की अफवाह ने लिया हिंसक रूप, ग्रामीणों ने फेरीवालों को पीटा
Child Kidnapping Rumour: बस्तर जिले के लोहंडीगुड़ा थाना क्षेत्र में मंगलवार रात बच्चा चोरी की अफवाह ने पूरे गांव को हिंसा की आग में झोंक दिया। गढ़िया गांव और बाजारपारा इलाके में ग्रामीणों ने मध्यप्रदेश से आए फेरीवालों को बच्चा चोर समझकर घेर लिया और उनके साथ जमकर मारपीट की। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पुलिस को अतिरिक्त बल बुलाकर रातभर मोर्चा संभालना पड़ा। मामले की जड़ एक मामूली घटना से जुड़ी बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक सीहोर जिले से आया एक परिवार दो दिन पहले लोहंडीगुड़ा क्षेत्र में फेरी का काम करने पहुंचा था। यह परिवार प्लास्टिक के टब और घरेलू सामान बेचकर जीविका चला रहा था और गांव में किराए के मकान में रह रहा था।
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मंगलवार शाम को घर के बाहर बच्चे खेल रहे थे। इस दौरान फेरीवालों के साथ आया कुत्ता भौंकने लगा। बच्चे डरकर भागे, लेकिन एक बच्चा वहीं रुक गया। फेरीवाले उसे वहां से जाने के लिए कहने लगे। यहीं से घटना ने मोड़ लिया। इसी दौरान बच्चे की एक रिश्तेदार ने यह देखा और शक के आधार पर शोर मचाते हुए बच्चा चोरी की आशंका जताई। कुछ ही मिनटों में बात पूरे गांव में फैल गई। बच्चा चोर आ गए हैं जैसी बातें तेजी से फैलने लगी। बिना किसी पुष्टि के लोग इकट्ठा होने लगे। यह अफवाह इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते सैकड़ों ग्रामीण मौके पर जमा हो गए। (Child Kidnapping Rumour)
रातभर चला हाई वोल्टेज ड्रामा
जैसे ही भीड़ बढ़ी, स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। ग्रामीणों ने फेरीवालों को चारों तरफ से घेर लिया। गाली-गलौज शुरू हुई। इसके बाद मारपीट की घटना हुई। डरे हुए फेरीवालों ने किसी तरह अपनी जान बचाई और पास के एक घर में घुसकर दरवाजा बंद कर लिया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। लोहंडीगुड़ा थाना की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन भीड़ ज्यादा होने के कारण हालात तुरंत काबू में नहीं आए। इसके बाद जगदलपुर से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। पुलिस ने भीड़ को हटाने और स्थिति संभालने के लिए कड़ी मशक्कत की। देर रात जाकर हालात नियंत्रण में आए।
जांच में क्या निकला ?
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए फंसे हुए फेरीवालों को सुरक्षित बाहर निकाला। उन्हें पुलिस वाहन में बैठाकर थाने ले जाया गया। मौके पर भीड़ को हटाया गया। गांव में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई। प्रारंभिक जांच और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बच्चा चोरी की घटना की कोई पुष्टि नहीं हुई। पूरा मामला सिर्फ अफवाह पर आधारित निकला। फेरीवाले सिर्फ अपना सामान बेचने आए थे। फिलहाल पुलिस फेरीवालों और स्थानीय लोगों से पूछताछ कर रही है। अफवाह फैलाने वाले व्यक्तियों की पहचान की जा रही है। मारपीट में शामिल लोगों पर भी कार्रवाई की तैयारी है। (Child Kidnapping Rumour)
अफवाह बनाम कानून व्यवस्था
घटना के बाद गढ़िया गांव में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है। किसी भी नई अफवाह को रोकने के लिए सतर्कता बरती जा रही है। यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है। जैसे क्या बिना पुष्टि के भीड़ का हिंसक हो जाना सामान्य होता जा रहा है ? क्या ग्रामीण इलाकों में अफवाहें अब भी इतनी तेजी से फैलती हैं ? कानून हाथ में लेने की प्रवृत्ति पर कैसे रोक लगे ? प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी सूचना की पुष्टि किए बिना उस पर विश्वास न करें। संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत पुलिस को सूचना दें। अफवाह फैलाने या हिंसा करने पर सख्त कार्रवाई होगी। जगदलपुर के इस मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि अफवाहें कितनी खतरनाक हो सकती हैं। एक छोटी सी गलतफहमी ने पूरे गांव को हिंसा की स्थिति में ला दिया और निर्दोष लोगों की जान खतरे में पड़ गई। अगर समय पर पुलिस नहीं पहुंचती तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती थी।



