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लेखिका शकुंतला तरार की हल्बी भाषा में रचित “101 लेजा गीत” पुस्तक का भव्य विमोचन

रायपुर : साहित्य अकादमी, नई दिल्ली तथा छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद, रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में नवीन विश्राम भवन (सिविल लाइंस), रायपुर के कन्वेंशन हॉल में आयोजित अखिल भारतीय आदिवासी लेखक सम्मेलन के अवसर पर लेखिका शकुंतला तरार की पुस्तक “101 लेजा गीत” का विधिवत विमोचन किया गया।

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यह कृति हल्बी भाषा में रचित पारंपरिक लेजा गीतों का एक संग्रह है, जिसमें प्रत्येक गीत का हिंदी अनुवाद एवं शब्दार्थ भी संकलित किया गया है। पुस्तक का विमोचन साहित्य अकादमी, दिल्ली के अध्यक्ष माधव कौशिक, सचिव के. श्रीनिवास राव, लोक साहित्यविद डॉ. महेंद्र ठाकुर, प्रसिद्ध लोक साहित्यकार रुद्रनारायण पाणिग्राही, छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय, मुंबई के कुलपति डॉ. केशरीलाल वर्मा, तथा साहित्य अकादमी, छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष शशांक शर्मा के करकमलों से संपन्न हुआ।

इस अवसर पर अपने उद्बोधन में माधव कौशिक एवं श्रीनिवास राव ने कहा कि यह पुस्तक न केवल हल्बी लोकसंस्कृति को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, बल्कि यह शोधकर्ताओं और भाषा-साहित्य के विद्यार्थियों के लिए भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। “चो गीत” जैसी विशिष्ट लोक विधा को दस्तावेजी स्वरूप में प्रस्तुत करना प्रशंसनीय प्रयास है।

कार्यक्रम में देशभर से पधारे भाषाविदों, साहित्यकारों, कवियों, जनप्रतिनिधियों तथा गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही। आयोजन ने आदिवासी साहित्य एवं लोकभाषाओं के संरक्षण की दिशा में एक सशक्त मंच प्रदान किया।

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