आपातकाल की पूर्व संध्या पर छत्तीसगढ़ में उठी थी समाजवादी आंदोलन की लहर, मधु लिमये और कौशिक हुए थे गिरफ्तार, पढ़े पूरी खबर

रायपुर/महासमुंद: आपातकाल (Emergency) लागू होने से ठीक पहले छत्तीसगढ़ में समाजवादी आंदोलन ने जोर पकड़ा। 25 जून 1975 को वरिष्ठ समाजवादी नेता एवं सांसद मधु लिमये छत्तीसगढ़ प्रवास पर थे। उनका उद्देश्य प्रदेश के समाजवादी कार्यकर्ताओं को संगठित कर लोकनायक जयप्रकाश नारायण की सम्पूर्ण क्रांति से जोड़ना था।
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छत्तीसगढ़ में उस समय किसानों का आंदोलन चरम पर था। किसान जबरन ली जा रही लेवी के विरोध में आंदोलित थे। आरंग में फरवरी 1975 से ही किसान गिरफ्तारियां दे रहे थे। लेकिन 13 फरवरी को तत्कालीन केंद्रीय मंत्री स्व. विद्याचरण शुक्ल के आरंग आगमन पर हालात बिगड़ गए। किसानों के साथ कथित दुर्व्यवहार और पुलिस लाठीचार्ज में किसान नेता स्व. जीवन लाल साव पर गोलियां चलाई गईं तथा कई नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया।
इस घटना के विरोध में तत्कालीन महासमुंद विधायक स्व. पुरुषोत्तम लाल कौशिक ने छत्तीसगढ़ बंद का आह्वान किया, जो अभूतपूर्व रूप से सफल रहा। कौशिक सहित कई नेताओं की गिरफ्तारी हुई, किंतु कुछ ही दिनों में अधिकांश को रिहा कर दिया गया। परंतु किसान नेता स्व. जीवन लाल साव पर ‘मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट’ (मीसा) के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेज दिया गया। इस प्रकार वे मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ के पहले मीसा बंदी बने। बाद में 7 जून 1975 को कोर्ट के आदेश पर उनकी रिहाई हुई।
रिहाई के बाद स्व. जीवन लाल साव फिर से किसानों को संगठित करने में जुट गए। इसी क्रम में 25 जून को सांसद स्व. मधु लिमये ने बिलासपुर में कार्यकर्ताओं की बैठक ली और 26 जून की सुबह रायपुर पहुंचे। लेकिन इसी बीच 25 जून की मध्यरात्रि को देश में आपातकाल घोषित कर दिया गया।
रायपुर के आजाद चौक स्थित कुर्मी बोर्डिंग में समाजवादी नेताओं की बैठक हुई, जिसके बाद स्व. कमल नारायण शर्मा समेत कई नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। उस समय सांसद मधु लिमये और विधायक पुरुषोत्तम लाल कौशिक को विधायिका के अनुमति के बिना गिरफ्तार नहीं किया जा सकता था, अतः उन्हें तत्काल नहीं पकड़ा गया।
इसी बीच, स्व. जीवन लाल साव को महासमुंद में सभा आयोजन की जिम्मेदारी देकर रवाना कर दिया गया। 26 जून की शाम 4 बजे महासमुंद के लोहिया चौक पर बड़ी सभा हुई, जिसमें स्व. लिमये, स्व. कौशिक, स्व. साव और डॉ. रमेश अग्रवाल शामिल थे। जैसे-जैसे सभा आगे बढ़ी, प्रशासन ने इन नेताओं की गिरफ्तारी के आदेश जारी कर दिए।
स्व. मधु लिमये के निर्देश पर स्व. जीवन लाल साव सभा समाप्त होने से पूर्व ही मंच से गायब हो गए। सभा के समापन पर प्रशासन ने स्व. लिमये, स्व. कौशिक और डॉ. रमेश अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया। स्व. जीवन लाल साव इस दौरान तीन महीने तक भूमिगत रहे, पुलिस उन्हें पकड़ नहीं पाई।
इस प्रकार छत्तीसगढ़ में आपातकाल (Emergency) लागू होने के साथ ही समाजवादी आंदोलन पर कड़ी कार्रवाई की शुरुआत हुई, लेकिन किसान आंदोलन की चिंगारी और लोकतंत्र की लड़ाई जारी रही। (Emergency)
आलेख: घनाराम साहू (सह प्राध्यापक, रायपुर )



