छत्तीसगढ़ के खूबसूरत टूरिस्ट स्पॉट, आपके हॉलिडे के लिए है परफेक्ट डेस्टिनेशन

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न्यूज डेस्क

छत्तीसगढ़ का नाम आते ही सभी के दिमाग में अक्सर नक्सलियों और खदानों का ख्याल आने लगता है, लेकिन आज हम आपको छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक खूबसूरती और टूरिस्ट स्पॉट के बारे में बताएंगे। आइए जानते है इसके बारे में…

बारनवापारा वाइल्ड लाइफ सेंचूरी 

रायपुर से लगभग 100 और महासमुंद जिले से 45 किलोमीटर दूर बारनवापारा का वाइल्ड लाइफ सेंचूरी छत्तीसगढ़ के सबसे फेमस पर्यटन स्थलों में से एक है। महासमुंद के उत्तरी भाग में स्थित 245 वर्ग किमी के भाग में फैला बारनवापारा अभ्यारण्य छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता को दर्शाता है। इस अभ्यारण्य में चार सिंग वाले हिरण, बाघ, तेंदुए, जंगली भैंसे, अजगर, हिरण आदि हैं । यहां पक्षियों की भी काफी प्रजातियां देखने को मिलती है। यह सेंचूरी हफ्ते के सातों दिन खुली रहती है।

चित्रकोट जलप्रपात 

भारत के नियाग्रा फॉल के रूप में पहचाना जाने वाला यह जलप्रपात छत्तीसगढ़ का मुख्य पर्यटन केन्द्र है। सालभर सैलानी यहां के नजारों का लुफ्त उठाने आते हैं। इंद्रावती नदी का पानी जब विधू की पहाड़ी श्रृंखलाओं से बहता हुआ चित्रकोट का निर्माण करता है। इसकी गिनती भारत के सबसे बड़े झरनों के रूप में होती है। यहां घूमने जाने के लिए बारिश और ठंड का मौसम सबसे बेहतरीन होगा। यह जलप्रपात जगदलपुर से 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। और रायपुर से इसकी दूरी 270 किलोमीटर है।

हांदवाड़ा जलप्रपात

जगदलपुर का हांदवाड़ा जलप्रपात न सिर्फ छत्तीसगढ़ का बल्कि देश के सबसे बड़े जलप्रपातों में से एक है। घने जंगलों के अंदर करीब 500 फीट की ऊंचाई से गिरते इस वॉटरफॉल के नजदीक अब तक बहुत कम लोग पहुंच पाए हैं। पर यह वाटरफॉल लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
पर्यटकों के साथ-साथ हांदवाड़ा जलप्रपात भारतीय फिल्म निर्माताओं को भी अपनी ओर आकर्षित करता है। भारत की सबसे लोकप्रिय फिल्मों में से एक बाहुबली के निर्माता, निर्देशक ने भी अपने फिल्म की शूटिंग करने के लिए हांदवाड़ा जलप्रपात को चुना था पर सुरक्षा की दृष्टि से इसे रद्द कर दिया गया। हांदवाड़ा जलप्रपात जगदलपुर से 200 किमी दूर घने जंगलों में बसा है। हांदावाड़ा वाटरफॉल तक पहुंचना बेहद खतरनाक है। छत्तीसगढ़ में अबूझमाड़ ही एक ऐसा स्थान है जो अब तक बाहरी दुनिया से एकदम कटा हुआ है। यह जगह नक्सलियों के लिए भी एक सुरक्षित मांद है, जिस वजह से नक्सली नहीं चाहते कि यहां आम लोगों का आवागमन शुरू हो।

कांगेर वैली नेशलन पार्क 

छत्तीसगढ के बस्तर जिले के कांगेर वैली नेशनल पार्क को राज्य के सबसे बड़े एथेनिक पर्यटन के रूप में पहचान मिले काफी साल हो गए हैं। दो सौ वर्ग किलोमीटर वाले हरे भरे जंगल को 1982 में नेशनल पार्क का दर्जा मिला था। तब इस पार्क के देखने योग्य जगहों में भूमिगत कोटमसर गुफा और तीरथगढ़ जलप्रपात ही मुख्य थे। यहां के जंगल बारहोंमास हरे भरे रहते हैं। ठंड के वक्त घूमने जाने के लिए यह सबसे अच्छी जगह है। यहां वनस्पतियों, जंगली जानवरों, और पक्षियों की विभिन्न प्रजातियां देखने को मिलती है। जिसमें बाघ, तेंदुआ, जंगली सुअर, हिरण, अजगर आदि शामिल हैं।

अचानकमार वन्यजीव अभ्यारण्य 

ठंड के समय आप परिवार और दोस्तों के साथ सैर करने और प्रकृति के करीब रहने के लिए अचानकमार वन्यजीव अभ्यारण्य भी जा सकते हैं। अचानकमार वन्यजीव अभ्यारण्य छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध अभ्यारण्य में से एक है। यहां तेंदुआ, बंगाल टाइगर और जंगली भैंसे जैसे बहुत सी विलुप्त प्रजातियां देखने को मिलती है। यह अभ्यारण्य बिलासपुर से 55 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। और ठंड के समय घूमने जाने के लिए यह सबसे बेहतरीन जगह है।

भोरमदेव मंदिर

छत्तीसगढ़ का खजुराहो कहा जाने वाला भोरमदेव पर्यटकों का खास आर्कषण का स्थल है। यह मंदिर कवर्धा से 18 किमी दूर मैकाल पर्वत और प्रकृति की सुंदरता के बीच बसा है। 11 सदीं में बने इस मंदिर में प्राचीन पाषाण सभ्यताओं की मूर्तियां हैं। इसके अलावा यहां मंडवा महल व झेरकी महल भी देखने योग्य है।

जैतखाम स्तंभ 

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 145 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है गुरू घासीदास का जन्म स्थान गिरौधपुरी, जहां पर विशाल जैतखाम स्तंभ का निर्माण किया गया है। जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। जैतखाम स्तंभी की सबसे खास बात यह है कि यह मीनर दिल्ली के कुतुबमीनर से भी ज्यादा ऊंचा है। गिरौधपुरी पहुंचने से पहले ही यह स्तंभ दूर से दिखने लगता है। सफेद रंग से बने इस स्तंभ की बनावट इतनी अच्छी है कि इसे देखते ही लोगों का मन प्रसन्न हो जाता है। शाम को इस जगह का नजारा देखते लायक होता है। जैतखाम की छत पर जाने के लिए दो तरफ से दरवाजे बनाए गए हैं और दोनों तरफ 435-435 सीढिय़ां हैं। गिरौधपुरी सतनामी समाज के लोगों का धार्मिक स्थल है। जैतखाम को बनाने के लिए सात खंभों का इस्तेामाल किया गया है। इसके अंदर एक विशाल हॉल है। जैतखाम गुरू घासीदास मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित है। देशभर से लाखो सैलानी हर साल यहां आते रहते हैं।

चिरमिरी कोरिया

कहा जाता है चिरमिरी छत्तीसगढ़ का स्वर्ग है।चिरमिरी कोरिया जिले में स्थित है। चिरमिरी में सालभर बेहद सुहावना और खुशनुमा मौसम होता है इसके अलावा यह अपनी प्राकृतिक खूबसूरती,कोयला के खदान और पुराने मंदिर के लिए प्रसिद्ध है।

तमोर पिंगला अभ्यारण्य – अंबिकापुर

तमोर पिंगला अभ्यारण्य अंबिकापुर में स्थित है। हर साल अभ्यारण्य में काफी संख्या में लोग घूमने आते हैं। इसके अलावा अंबिकापुर में सेमरसोत वन्यजीव अभ्यारण भी स्थित है जो कि बहुत प्रसिद्ध है। अंबिकापुर के घने जंगल और नुकीले हिल्स भी पर्यटन के लिए बहुत अच्छे हैं।

गढ़िया पहाड़- कांकेर

गढ़िया पहाड काँकेर जिले में स्थित है। यह जगह किला डोंगरी के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ पर पर्यटकों के लिए सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र दूध नदी है और यह पहाड़ के नीचे बहती है। पर्यटक यहाँ पर बहुत खुशी से आते हैं। खासकर बरसात के दिनों के लिए यह एक बहुत अच्छी जगह है।

मैनपाट

मैनपाट की बात करें तो यह जगह हॉलिडे मनाने के लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन है। इसे छोटा तिब्बत भी कहा जाता है।मैनपाट की सुंदरता देखते बनती है। यहाँ कई जलप्रपात और जंगल है।अगर आप ट्रैकिंग का फायदा उठाना चाहते हैं वो भी सावन में, तो मैनपाट इसके लिए बिल्कुल अच्छी और परफेक्ट जगह है।

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