पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु चुनाव में रिकॉर्ड मतदान, कई जगह हिंसा की घटनाएं आई सामने

Bengal Tamil Nadu Election: पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के तहत गुरुवार को हुए मतदान ने नए रिकॉर्ड बना दिए हैं। पश्चिम बंगाल में पहले चरण के तहत 294 में से 152 सीटों पर 92.72% मतदान हुआ, जो राज्य के इतिहास में पहली बार 90% के पार गया है। वहीं तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर 85.14% वोटिंग दर्ज की गई, जो 1967 से अब तक का सबसे ज्यादा आंकड़ा है। इससे पहले राज्य में सबसे ज्यादा 78.12% मतदान 2011 में हुआ था। दोनों राज्यों में इस बार का मतदान प्रतिशत पिछले चुनावों से काफी ज्यादा रहा, जिससे यह साफ है कि मतदाताओं में अभूतपूर्व उत्साह देखा गया।
यह भी पढ़ें:- ट्रम्प ने शेयर किया विवादित पोस्ट, भारत और चीन को बताया नरक का द्वार, जन्मजात नागरिकता कानून पर फिर छिड़ी बहस
मतदान के दौरान पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में हिंसा, झड़प और हमलों की घटनाएं सामने आई। मुर्शिदाबाद जिले के नौदा में मतदान से एक दिन पहले देर रात देसी बम से हमला हुआ, जिसमें कई लोग घायल हो गए। इसके बाद AJUP नेता हुमायूं कबीर और TMC कार्यकर्ताओं के बीच टकराव बढ़ गया। हुमायूं कबीर जहां-जहां गए, वहां-वहां झड़पें होती रही। हालात इतने बिगड़े कि पुलिस को कई जगह लाठीचार्ज और हवाई फायरिंग करनी पड़ी। एक जगह पर हुमायूं कबीर मीडिया से बातचीत कर रहे थे, तभी अचानक कुछ ही सेकेंड में भीड़ ने एक कार पर हमला कर दिया। बाद में पता चला कि यह हमला उनके ही काफिले पर हुआ था।

भाजपा उम्मीदवारों पर हमला
दक्षिण मिदनापुर में भाजपा उम्मीदवार सुवेंदु सरकार को भीड़ ने दौड़ाकर पीटा। आसनसोल साउथ से भाजपा विधायक अग्निमित्रा पॉल की कार पर पथराव किया गया, जिससे कार का शीशा टूट गया। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने आरोप लगाया कि उनके पार्टी एजेंट पर TMC कार्यकर्ताओं ने हमला किया। वहीं तमिलनाडु के पोरैयार स्थित एक मतदान केंद्र पर एक रिटायर्ड सेना कर्मी ने हेड कांस्टेबल पर चाकू से हमला कर दिया। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और घायल पुलिसकर्मी को अस्पताल में भर्ती कराया गया। (Bengal Tamil Nadu Election)
रिकॉर्ड वोटिंग: सिर्फ संयोग नहीं, कई कारण
विशेषज्ञों के मुताबिक इस बार रिकॉर्ड मतदान के पीछे कई अहम वजहें हैं, जिसमें स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर संशोधन शामिल हैं। बता दें कि SIR के तहत बंगाल में करीब 91 लाख नाम हटाए गए। जबकि तमिलनाडु में लगभग 74 लाख नाम हटे। इससे कुल मतदाता संख्या कम हुई, लेकिन सक्रिय मतदाताओं का प्रतिशत बढ़ गया। पश्चिम बंगाल में करीब 15 साल से तृणमूल कांग्रेस की सरकार है। बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, सिंडिकेट और स्थानीय मुद्दों को लेकर लोगों में असंतोष देखा गया, जिसने ज्यादा मतदान को प्रेरित किया। विशेषकर बंगाल के सीमावर्ती और मुस्लिम बहुल इलाकों में SIR और NRC को लेकर आशंका ने लोगों को वोट डालने के लिए प्रेरित किया। साथ ही हिंदू वोटरों में भी राजनीतिक ध्रुवीकरण के चलते ज्यादा भागीदारी देखने को मिली।
प्रवासी मजदूरों की वापसी
इस चुनाव में बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अन्य राज्यों से सिर्फ वोट डालने के लिए अपने घर लौटे। उन्हें आशंका थी कि अगर इस बार वोट नहीं दिया तो भविष्य में उनका अधिकार प्रभावित हो सकता है। निर्वाचन आयोग ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे, जिसके तहत करीब 2.40 लाख केंद्रीय बलों की तैनाती और बूथों पर कड़ी निगरानी शामिल हैं। इससे मतदाताओं में विश्वास बढ़ा और वे बिना डर के मतदान करने पहुंचे। मतदान के बाद नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि बंगाल की जनता ने SIR के खिलाफ भारी मतदान किया है। वहीं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दावा किया कि राज्य में TMC का सूरज ढल चुका है। (Bengal Tamil Nadu Election)
4 मई को आएंगे 5 राज्यों के नतीजे
इससे पहले 9 अप्रैल को असम, केरल और पुडुचेरी में मतदान हो चुका है। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु समेत पांचों राज्यों के चुनाव नतीजे 4 मई को एक साथ घोषित किए जाएंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की छिटपुट हिंसा चुनाव परिणामों को खास प्रभावित नहीं करेगी। बंगाल में पहले भी इससे ज्यादा गंभीर घटनाएं हो चुकी हैं, इसलिए इस बार की घटनाओं से किसी पार्टी को बड़ा राजनीतिक लाभ मिलने की संभावना कम है। रिकॉर्ड मतदान यह संकेत देता है कि मतदाता पहले से ज्यादा जागरूक और सक्रिय हो चुके हैं। हालांकि हिंसा की घटनाएं लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल जरूर खड़े करती हैं। अब सबकी नजरें 4 मई को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं, जो इन रिकॉर्ड आंकड़ों की असली तस्वीर साफ करेंगे।



