छत्तीसगढ़ में RTE प्रवेश को लेकर सरकार और निजी स्कूल आमने-सामने, मान्यता रद्द करने की चेतावनी, फिर भी नहीं माने स्कूल
Conflict on Chhattisgarh RTE: छत्तीसगढ़ में शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत प्रवेश को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है, जहां एक ओर राज्य सरकार ने निजी स्कूलों को सख्त चेतावनी दी है कि अगर वे RTE के तहत प्रवेश देने से इनकार करते हैं या प्रक्रिया में बाधा डालते हैं तो उनकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी, वहीं दूसरी ओर प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने असहयोग आंदोलन का ऐलान कर दिया है। स्कूल शिक्षा विभाग का कहना है कि निजी स्कूलों को प्रति छात्र व्यय के आधार पर प्रतिपूर्ति राशि दी जाती है, जो या तो सरकारी स्कूल में प्रति बच्चे होने वाले खर्च या निजी स्कूल की वास्तविक फीस में से जो कम हो उसके आधार पर तय होती है।
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शिक्षा विभाग ने लोगों से भ्रामक जानकारी पर ध्यान नहीं देने की अपील भी की है। राज्य में अभी 6,862 निजी स्कूलों में 3,63,515 छात्र RTE के तहत पढ़ रहे हैं, जबकि इस साल कक्षा पहली की लगभग 22,000 सीटों समेत कुल 54,824 सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया जारी है। RTE कानून अप्रैल 2010 से लागू है, जिसके तहत निजी स्कूलों में 25% सीटें आरक्षित होती हैं और सीटों का निर्धारण U-DISE पोर्टल के आंकड़ों के आधार पर किया जाता है, ताकि गलत जानकारी पर रोक लगाई जा सके। सरकार का दावा है कि प्रतिपूर्ति राशि अन्य कई राज्यों के बराबर या बेहतर है, जहां कक्षा 1 से 5 तक 7,000, कक्षा 6 से 8 तक 11,400 और कक्षा 9 से 12 तक 15,000 प्रति छात्र दिए जाते हैं, जबकि मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में यह राशि कम है, हालांकि कुछ राज्यों में इससे ज्यादा भी है।

वहीं छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि 2011 से अब तक प्रतिपूर्ति राशि में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि महंगाई और संचालन लागत लगातार बढ़ी है, जिससे स्कूलों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है और वर्तमान दरों पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना संभव नहीं रह गया है। इसी कारण 1 मार्च से असहयोग आंदोलन शुरू किया गया है, जिसके तहत 6000 से ज्यादा निजी स्कूल RTE प्रवेश प्रक्रिया में भाग नहीं ले रहे हैं और लॉटरी से चयनित छात्रों को भी प्रवेश देने से इनकार कर रहे हैं, जिससे करीब 54,824 छात्रों के प्रभावित होने की आशंका है। एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने कहा है कि अगर सरकार मान्यता रद्द भी करती है तो भी आंदोलन जारी रहेगा और वे प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने के लिए संवैधानिक रास्तों पर काम कर रहे हैं। (Conflict on Chhattisgarh RTE)

इस मुद्दे को लेकर 2025 में बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की गई थी, जहां सरकार को 6 महीने के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस फैसला नहीं हो पाया है, जिससे विवाद और बढ़ गया है। इस पूरे टकराव का सबसे बड़ा असर गरीब और वंचित वर्ग के छात्रों पर पड़ने की संभावना है, जो RTE के माध्यम से निजी स्कूलों में पढ़ाई का अवसर प्राप्त करते हैं। अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो हजारों बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो सकती है और राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है, क्योंकि छत्तीसगढ़ में RTE को लेकर यह विवाद अब टकराव की स्थिति में पहुंच चुका है। सरकार सख्त कार्रवाई के मूड में है, जबकि निजी स्कूल पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। (Conflict on Chhattisgarh RTE)



