छत्तीसगढ़ में हर्बल गुलाल की धूम, इस बार सुरक्षित और ‘वोकल फॉर लोकल’ वाली होली

Herbal Gulal in Chhattisgarh: रंगों के महापर्व होली की आहट के साथ ही छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में उत्सव का माहौल बन गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से स्व-सहायता समूहों की महिलाएं हर्बल गुलाल निर्माण के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अंतर्गत तैयार प्राकृतिक, रसायनमुक्त और त्वचा के लिए सुरक्षित गुलाल को बाजार में अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। जगदलपुर स्थित कलेक्टोरेट परिसर में महिला स्व-सहायता समूहों की ओर से तैयार हर्बल गुलाल और होली की फैंसी सामग्री के विशेष स्टॉल लगाए गए हैं।
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फूलों-पत्तियों के अर्क से निर्मित यह गुलाल त्वचा के लिए सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल है। जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे स्थानीय उत्पाद खरीदकर बस्तर की महिलाओं को सशक्त बनाने में सहयोग करें। बलौदाबाजार जिले के धमनी गांव की ‘वंदनी स्व-सहायता समूह’ की 11 महिलाएं प्राकृतिक फूलों, हल्दी और चंदन से हर्बल गुलाल तैयार कर रही हैं। बाजार में बढ़ती मांग के चलते समूह की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। महिलाओं का कहना है कि प्रशिक्षण और वित्तीय सहयोग से वे अब आत्मविश्वास के साथ स्वरोजगार कर रही हैं। (Herbal Gulal in Chhattisgarh)

कोरिया जिला के बैकुंठपुर जनपद अंतर्गत ग्राम डकईपारा की उजाला महिला स्व-सहायता समूह ने महज 10 दिनों में 100 किलो से ज्यादा हर्बल गुलाल का उत्पादन किया है। चुकंदर, हल्दी, पलाश, पालक और अन्य प्राकृतिक तत्वों से तैयार यह गुलाल 300 रुपए प्रति किलो की दर से बेचा जा रहा है। दो दिनों में ही समूह ने 3,200 रुपए की आय अर्जित की। यह गुलाल बैकुंठपुर नगरपालिका के पास और कोरिया मिलेट्स कैफे के सामने स्टॉल पर और ऑनलाइन उपलब्ध है। जिला पंचायत के सीईओ डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी ने स्थानीय उत्पाद अपनाने की अपील की है। (Herbal Gulal in Chhattisgarh)

सरगुजा जिला में अम्बिकापुर विकासखंड के राधे कृष्ण स्वयं सहायता समूह सहित अन्य समूह प्राकृतिक अवयवों से गुलाल तैयार कर रहे हैं। अब तक लगभग 215 किलोग्राम गुलाल की बिक्री हो चुकी है। आशा बिहान बाजार (भट्ठी रोड), सी-मार्ट (कलेक्टोरेट शाखा के समीप), संगम स्वीट्स (बनारस रोड) और घड़ी चौक के पास बिक्री केंद्र बनाए गए हैं। दंतेवाड़ा जिला में मां दंतेश्वरी महिला स्व-सहायता समूह ने कृषि विज्ञान केंद्र के तकनीकी मार्गदर्शन में हर्बल गुलाल तैयार किया है। गेंदा, पलाश, मेहंदी, अपराजिता, हल्दी और चंदन से निर्मित यह गुलाल दंतेवाड़ा कलेक्टर कार्यालय के सामने, बचेली मेन चौक और कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में उपलब्ध है। इसके अलावा रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के लाभांडी विक्रय केंद्र में भी इसकी बिक्री हो रही है।

अधिकारियों ने इसे पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण की दिशा में सराहनीय पहल बताया है। रायगढ़ जिले के लैलूंगा क्षेत्र में दिव्या और संतोषी स्व-सहायता समूहों ने लगभग 5 क्विंटल हर्बल गुलाल का उत्पादन किया, जिसमें से 4 क्विंटल की बिक्री हो चुकी है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने स्टॉल का अवलोकन कर महिलाओं का उत्साहवर्धन किया। इच्छुक नागरिक मोबाइल नंबर +91-62660-74792 पर संपर्क कर गुलाल प्राप्त कर सकते हैं। बिलासपुर में जिला पंचायत कार्यालय के सामने बिहान से जुड़ी महिलाओं ने हर्बल गुलाल का स्टॉल लगाया है। चकरभाठा क्षेत्र के राधा कृष्ण स्व-सहायता समूह द्वारा तैयार इस गुलाल में अरारोट को आधार सामग्री के रूप में उपयोग किया गया है।

‘वोकल फॉर लोकल’ से सशक्त हो रही महिलाएं
महिलाओं ने बताया कि रासायनिक रंगों से होने वाली एलर्जी को देखते हुए लोगों में हर्बल गुलाल के प्रति विशेष उत्साह है। राज्यभर में होली के अवसर पर हर्बल गुलाल की बढ़ती मांग से स्व-सहायता समूहों की आय में वृद्धि हो रही है। शासन की योजनाओं से जुड़कर महिलाएं न सिर्फ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा भी बन रही हैं। जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे प्राकृतिक और स्थानीय उत्पादों को अपनाकर सुरक्षित, पर्यावरण-अनुकूल और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी होली मनाएं। (Herbal Gulal in Chhattisgarh)



