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Kargil War Point 4875 की वीरगाथा, जब कैप्टन अनुज ने अकेले ध्वस्त किए दुश्मन के चार बंकर

Kargil War कारगिल युद्ध की यह कहानी मश्कोह घाटी के प्वाइंट 4875 की है, जहां भारतीय सेना ने साहस और बलिदान का इतिहास रचा। यह चोटी, जिसे ‘पिंपल टू’ के नाम से भी जाना जाता था, सामरिक रूप से बेहद अहम थी। पाकिस्तानी घुसपैठियों ने इस पर कब्जा कर लिया था, जिसे वापस लेने की जिम्मेदारी 17 जाट रेजीमेंट को सौंपी गई।

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6 जुलाई 1999 को मेजर ऋतेश शर्मा के नेतृत्व में चार्ली कंपनी ने मिशन शुरू किया। 7 जुलाई को लड़ाई तेज हो गई। मेजर शर्मा के घायल होने पर कैप्टन अनुज नय्यर ने कमान संभाली। उन्होंने दो असॉल्ट टीम बनाई—एक की अगुवाई कैप्टन विक्रम बत्रा कर रहे थे, दूसरी का नेतृत्व खुद अनुज ने किया।(Kargil War)

दुश्मन के बंकरों की जानकारी मिलने के बाद हमला तेज हुआ। कैप्टन अनुज ने ग्रेनेड और रॉकेट लॉन्चर से दुश्मन के चार बंकर तबाह किए। दुश्मन की भारी गोलीबारी के बीच कैप्टन अनुज ने नौ पाक सैनिकों को ढेर किया और तीन मीडियम मशीनगन पोजीशन नष्ट कीं। चौथा बंकर नष्ट करते समय वह वीरगति को प्राप्त हुए। उनकी शहादत के बाद प्वाइंट 4875 पर फिर से तिरंगा लहराया गया। (Kargil War)

इस अद्वितीय वीरता के लिए उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।(Kargil War)

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