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क्यों आज तक कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई, पढ़ें क्या है रहस्य

न्यूज़ डेस्क।

हिन्दू धर्म में भगवान शिव की मान्यताओं से कोई भी इंसान अनजान नहीं है। इसीलिए भगवान शिव से जुडी हर एक चीज़ की हिन्दू धर्म में खासी मान्यता है। चाहे वह सावन सोमवार हो या महाशिवरात्रि। भगवान शिव के पर्व को हर कोई धूमधाम से मनाता है। इसी प्रकार हिंदू धर्म में कैलाश पर्वत का बहुत महत्व है, क्योंकि यह भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है। कैलाश पर्वत की ऊंचाई 6638 मीटर है।

असंभव है कैलाश पर्वत तक पहुंचना
दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को अभी तक 7000 से ज्यादा लोग चढ़ाई कर चुके हैं, जिसकी ऊंचाई 8848 मीटर है। लेकिन कैलाश पर्वत की ऊंचाई 6638 मीटर ही है, फिर भी आज तक कोई कैलाश पर्वत पर नहीं चढ़ पाया है। दुनियाभर के काफी सारे पर्वतारोही ने कैलाश पर्वत पर चढ़ाई करने की कोशिश कर चुके हैं। पर सभी असफल रहे हैं।

सन 2007 में रूसी पर्वतारोही सर्गे सिस्टिकोव ने अपनी टीम के साथ माउंट कैलास पर चढ़ने की कोशिश की थी। सर्गे ने अपना खुद का अनुभव बताते हुए कहा था कि कुछ दूर चढ़ने पर उनकी और पूरी टीम के सिर में भयंकर दर्द होने लगा। उनके जबड़े की मांसपेशियां खिंचने लगीं और जीभ जम गई। मुंह से आवाज़ निकलना बंद हो गई। चढ़ते हुए मुझे महसूस हुआ कि वह इस पर्वत पर चढ़ने लायक नहीं हैं। उन्होंने फौरन मुड़कर उतरना शुरू कर दिया। तब जाकर उन्हें आराम मिला।

कैलाश पर्वत के बारे में अक्‍सर ऐसी बातें सुनने में आती हैं कई पर्वतारोहियों ने इस पर चढ़ने की कोशिश की, लेकिन इस पर्वत पर रहना असंभव था क्योंकि वहां शरीर के बाल और नाखून तेजी से बढ़ने लगते हैं। इसके अलावा कैलाश पर्वत बहुत ही ज्यादा रेडियोएक्टिव भी है। लोगों का मानना है कि कैलाश पर्वत पर भगवान शिव अपने परिवार के साथ रहते हैं और इसीलिए कोई जीवित इंसान वहां ऊपर नहीं पहुंच सकता। मरने के बाद या जिसने कभी भी कोई पाप न किया हो, केवल वही कैलाश फतह कर सकता है।

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