छत्तीसगढ़ में नक्सलियों पर प्रहार जारी, 1 करोड़ के इनामी सेंट्रल कमेटी मेंबर समेत 10 नक्सली ढेर

Naxalite Encounter in Gariaband: गरियाबंद जिले के मैनपुर थाना क्षेत्र के भालू डिग्गी के जंगल में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच जबरदस्त मुठभेड़ हुई है, जिसमें जवानों ने 1 करोड़ के इनामी नक्सली कमांडर मोडेम बालकृष्ण उर्फ भास्कर समेत 10 नक्सलियों को मार गिराया है। इसकी पुष्टि एसपी निखिल राखेचा ने की है। मुठभेड़ अभी भी जारी है। रायपुर IG अमरेश मिश्रा के मुताबिक सुरक्षाबल नक्सल विरोधी अभियान पर निकले थे। इसी दौरान मटाल इलाके के जंगल में नक्सलियों से आमना-सामना हुआ और दोनों तरफ से फायरिंग शुरू हो गई। इस संयुक्त ऑपरेशन में STF, COBRA, ई-30 टीम और जिला पुलिस के जवान शामिल हैं।
मनोज नक्सलियों के बड़े कैडर में शामिल था, जो यह कई राज्यों में नक्सली गतिविधियों का संचालन करता था और सुरक्षाबलों के लिए एक बड़ा खतरा माना जाता था। मारे गए नक्सली कई राज्यों में सक्रिय थे और क्षेत्रीय कमेटी से जुड़े थे। (Naxalite Encounter in Gariaband)
कौन है मनोज उर्फ मॉडेम बालकृष्ण ?
- पूरा नाम- मॉडेम बालकृष्ण
- उपनाम- बलन्ना, रामचंदर, राजेंद्र, भास्कर, गोलकोंडा राजेंद्र, चिन्नी, मनोज
- सीसीएम (CCM)- सेंट्रल कमेटी मेंबर
- सेंट्रल रीजनल ब्यूरो सदस्य
- ओएससी (OSC) के सचिव
- उम्र- 58 साल
- निवासी- मंटिकोंटा, थाना घनपुर, जिला वारंगल, तेलंगाना
इससे पहले 24 जनवरी 2025 को इसी क्षेत्र में 80 घंटे तक चले ऑपरेशन में 16 नक्सली मारे गए थे, जिनमें से 12 पर कुल 3.16 करोड़ का इनाम था। मारे गए नक्सलियों में सेंट्रल कमेटी का सदस्य चलपति उर्फ अप्पा राव और नुआपड़ा-गरियाबंद-धमतरी डिविजन कमेटी प्रमुख सत्यम गावड़े भी शामिल थे। चलपति गरियाबंद के भालूडिग्गी क्षेत्र से तीन राज्यों में नक्सली गतिविधियों का संचालन करता था।


16 नक्सलियों ने छोड़ा हथियार
इधर, नारायणपुर जिले में नक्सल उन्मूलन अभियान को बड़ी सफलता मिली है। दरअसल, 16 नक्सलियों ने SP रोबिनसन गुड़िया के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। आत्मसमर्पण करने वालों में जनताना सरकार सदस्य, पंचायत मिलिशिया डिप्टी कमांडर, पंचायत सरकार सदस्य, न्याय शाखा अध्यक्ष समेत कई पदाधिकारी शामिल हैं। ये सभी लंका और डूंगा जैसे घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय थे।
सरेंडर नक्सलियों ने लगाया आरोप
आत्मसमर्पित नक्सलियों ने खुलासा किया कि शीर्ष कैडर के नक्सली लीडर ही आदिवासियों के असली दुश्मन हैं। वे जल-जंगल-जमीन की रक्षा और न्याय दिलाने के नाम पर स्थानीय आदिवासियों का शोषण करते हैं। विशेषकर महिला नक्सलियों को शारीरिक और मानसिक दोनों रूपों से प्रताड़ित किया जाता है। स्थानीय नक्सलियों को राशन, दवाई, हथियार ढोने और IED लगाने जैसे खतरनाक कार्यों में लगाया जाता है, जबकि बड़े लीडर ऐशो-आराम की जिंदगी जीते हैं। आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सल उन्मूलन नीति के तहत 50-50 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि के चेक प्रदान किए गए। इसके साथ ही उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने के लिए सभी सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ दिलाया जाएगा। बता दें कि 2025 में अब तक 164 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।



