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अबूझमाड़ मुठभेड़ में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता, 40-40 लाख के इनामी दो नक्सली ढेर

Naxalite Encounter in Narayanpur: छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के घने जंगलों और दुर्गम इलाके अबूझमाड़ में हुए मुठभेड़ में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। दरअसल, DRG, ITBP और बस्तर फाइटर्स के जवानों ने सेंट्रल कमेटी के दो सदस्यों को मार गिराया है, जिनकी पहचान राजू दादा उर्फ कट्टा रामचंद्र रेड्डी और कोसा दादा उर्फ कादरी सत्यनारायण रेड्डी के रूप में हुई है। दोनों पर छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से 40-40 लाख रुपए का इनाम घोषित था। दोनों नक्सलियों के खात्मे को नक्सल संगठन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि ये दोनों पिछले तीन दशकों से बस्तर अंचल में नक्सली गतिविधियों के प्रमुख योजनाकार थे। 

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बता दें कि नारायणपुर जिले का अबूझमाड़ छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की सीमा से सटा हुआ है, जहां नक्सल गतिविधियों की गोपनीय सूचना मिलने के बाद सुरक्षाबलों ने एक सुनियोजित सर्च ऑपरेशन शुरू किया। इस अभियान में डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और बस्तर फाइटर्स के जवान शामिल थे। सुबह के समय जब सुरक्षाबल तलाशी अभियान चला रहे थे, तभी घने जंगलों में छिपे नक्सलियों ने अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। करीब आधे घंटे तक रुक-रुक कर फायरिंग चलती रही, जिसमें सुरक्षाबलों ने संयम और रणनीति के साथ जवाबी कार्रवाई की। गोलीबारी थमने के बाद जब इलाके की तलाशी ली गई तो मौके से दो पुरुष नक्सलियों के शव बरामद हुए, जिनकी पहचान बाद में सीपीआई (माओवादी) के शीर्ष नेताओं के रूप में हुई। (Naxalite Encounter in Narayanpur)

ढेर नक्सलियों की पहचान

राजू दादा उर्फ कट्टा रामचंद्र रेड्डी

  • उम्र- 63 साल
  • स्थायी पता- करीमनगर, तेलंगाना
  • अन्य नाम- गुड़सा उसेंदी, विजय, विकल्प
  • पद- केंद्रीय समिति सदस्य, सीपीआई (माओवादी)
  • इनाम- 40 लाख (छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से घोषित)
  • भूमिका- दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी में लंबे समय से सक्रिय। संगठन के कई रणनीतिक दस्तावेजों का प्रमुख लेखक और जनमिलिशिया गतिविधियों का नियोजक रहा।

कोसा दादा उर्फ कादरी सत्यनारायण रेड्डी

  • उम्र- 67 साल
  • स्थायी पता- करीमनगर, तेलंगाना
  • अन्य नाम- गोपन्ना, बुचन्ना
  • पद- केंद्रीय समिति सदस्य, सीपीआई (माओवादी)
  • इनाम- 40 लाख (छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से घोषित)
  • भूमिका- संगठन के वैचारिक और सैन्य ट्रेनिंग विंग का जिम्मेदार। माओवादी आंदोलन का “सैद्धांतिक चेहरा” कहा जाता था।

मुठभेड़ के बाद जब इलाके की गहन तलाशी ली गई तो सुरक्षाबलों को भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री मिली।  

भारी मात्रा में हथियार बरामद

  • एक AK-47 राइफल
  • एक इंसास राइफल
  • एक बीजीएल (BGL) लॉन्चर
  • भारी मात्रा में विस्फोटक
  • नक्सली साहित्य
  • दैनिक उपयोग की वस्तुएं (बैग, दवाइयां, वॉकी-टॉकी उपकरण, बैटरियां, सोलर पैनल)

ये सामग्री इस बात की पुष्टि करती है कि यह स्थान नक्सलियों का महत्वपूर्ण अस्थायी कैंप या बैठक स्थल था।

पुलिस अधिकारियों ने की अपील

इस अभियान के बारे में जानकारी देते हुए नारायणपुर के पुलिस अधीक्षक रॉबिन्सन ने कहा कि सुरक्षाबलों को मिली यह सफलता कई महीनों की सूचनाओं और तैयारियों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्र में इस तरह की कार्रवाई करना बहुत जोखिम भरा होता है, लेकिन बलों ने साहस और संयम से यह अभियान पूरा किया। बस्तर IG सुंदरराज पी. ने कहा कि नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे निर्णायक अभियानों से संगठन को निरंतर गहरी चोट पहुंच रही है। अब समय आ गया है कि जो नक्सली कैडर अभी भी जंगलों में सक्रिय हैं, वे यह समझें कि हिंसा और आतंक का रास्ता अब खत्म होने की कगार पर है। सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति उनके लिए मुख्यधारा में लौटने का एक अवसर है। 

दोनों मारे गए नक्सली नेता न सिर्फ संगठन के वरिष्ठ सदस्य थे, बल्कि माओवादी आंदोलन की रणनीतिक रीढ़ माने जाते थे। दोनों पर आरोप है कि वे बस्तर, सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर जिलों में हुए कई घातक हमलों की योजना में शामिल रहे हैं। इनके नेतृत्व में हुए हमलों में सैकड़ों जवान शहीद हुए, पुल, स्कूल, एम्बुलेंस और आम लोगों की हत्या की घटनाएं हुईं। इनके खात्मे से संगठन को न केवल सैन्य क्षति, बल्कि वैचारिक और संगठनात्मक क्षति भी हुई है, क्योंकि ये दोनों नेता जन संगठनों को जोड़ने और युवाओं को संगठन में शामिल करने की नीति के निर्माता थे। अबूझमाड़ में हुए इस मुठभेड़ को नक्सल विरोधी अभियान का एक बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। राज्य और केंद्र सरकार की ओर से चलाए जा रहे संयुक्त अभियान, खुफिया तंत्र की मजबूती और स्थानीय समर्थन के चलते नक्सलियों का नेटवर्क धीरे-धीरे कमजोर पड़ता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि शीर्ष नेतृत्व के इस प्रकार मारे जाने से नक्सली संगठन की कमांड एंड कंट्रोल स्ट्रक्चर को गहरी क्षति पहुंची है और आने वाले समय में यह आंदोलन पूरी तरह से पराजय की ओर बढ़ सकता है।

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