दुनिया की कोई ताकत भारत को झुका नहीं सकती: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

PM in Gir Somnath: गुजरात दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर में एक ‘विशेष महा पूजा’ में हिस्सा लिया। इसके बाद सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज प्रभास पाटन का पवित्र क्षेत्र एक अद्भुत प्रभा से भरा है। महादेव का ये साक्षात्कार, सौंदर्य, धरती और आसमान से हुई पुष्पवर्षा, भगवा ध्वजों की आभा, कला संगीत और नृत्य की अद्भुत प्रस्तुतियां, वेद मंत्रों का उच्चार, गर्भ गृह में हो रहा शिव पंचाक्षरी का अखंड पाठ और इस सबके साथ सागर की लहरों का जय घोष ऐसा लग रहा है जैसे ये सृष्टी एक साथ बोल रही है जय सोमनाथ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि समय खुद जिनकी इच्छा से प्रकट होता है, जो स्वयं कालातीत हैं, जो स्वयं काल स्वरुप हैं, आज उन देवाधिदेव महादेव की विग्रह प्रतिष्ठा के हम 75 वर्ष मना रहे हैं।
यह भी पढ़ें:- ई-ऑफिस का विस्तार: छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक कार्यसंस्कृति में डिजिटल क्रांति का आगाज
उन्होंने कहा कि ये सृष्टि जिनसे सृजित होती है, जिनमें लय हो जाती है। आज हम उनके धाम के पुनर्निर्माण का उत्सव मना रहे हैं। जो हलाहल पीकर नीलकंठ हो गए, आज उन्हीं की शरण में यहां सोमनाथ अमृत महोत्सव हो रहा है। ये सब भगवान सदाशिव की ही लीला है। प्रधानमंत्री ने कहा कि दादा सोमनाथ के अनन्य भक्त के रूप में मैं कितनी बार यहां आया हूं, कितनी ही बार उनके सामने नतमस्तक हुआ हूं। लेकिन आज जब मैं यहां आ रहा था, तो समय की ये यात्रा एक सुखद अनुभूति दे रही थी। अभी कुछ ही महीने पहले मैं यहां आया था, तब हम सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मना रहे थे। प्रथम विध्वंस के 1,000 वर्ष बाद भी सोमनाथ के अविनाशी होने का गर्व और आज इस आधुनिक स्वरूप की प्राण प्रतिष्ठा के 75 वर्ष, हम केवल 2 आयोजनों का हिस्सा भर नहीं बनें, हमें हजार वर्षों की अमृत यात्रा को अनुभव करने का शिवजी ने मौका दिया है। (PM in Gir Somnath)

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 75 साल पहले आज के ही दिन सोमनाथ मंदिर की पुनर्स्थापना कोई साधारण अवसर नहीं था। अगर 1947 में भारत आजाद हुआ था तो 1951 में सोमनाथ की प्राण प्रतिष्ठा ने भारत की स्वतंत्र चेतना का उद्घोष किया था। आजादी के समय सरदार साहब ने 500 से ज्यादा रियासतों को जोड़कर एक भारत का स्वरुप गढ़ा था तो साथ ही सोमनाथ के पुनर्निर्माण से उन्होंने दुनिया को बताया था भारत केवल आजाद नहीं हुआ है, भारत अपने प्राचीन गौरव को फिर हासिल करने के मार्ग पर भी अब आगे बढ़ चुका है। दुनिया की कोई ताकत भारत को झुका नहीं सकती। देश ने पोखरण परमाणु परीक्षण को ऑपरेशन शक्ति नाम दिया था, क्योंकि शिव के साथ शक्ति की आराधना हमारी परंपरा रही है। चंद्रयाण मिशन में चंद्रमा पर जहां भारत का रोवर लैंड हुआ उस जगह का नाम भी हमने शिव शक्ति प्वाइंट रखा है, क्योंकि हमारी आस्था में चंद्रमा शिव से जुड़े हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज का दिन एक और वजह से भी विशेष है। 11 मई 1998 यानी आज के ही दिन देश ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किया था। देश ने 11 मई को पहले 3 परमाणु परीक्षण किए। हमारे वैज्ञानिकों ने भारत के सामर्थ्य को, भारत की क्षमता को दुनिया के सामने रखा। दुनिया में तूफान आ गया कि भारत कौन होता है, उसकी ये हैसियत, जो परमाणु परीक्षण करें। दुनिया भर की शक्तियां भारत को दबोचने के लिए मैदान में उतरी, अनेक प्रकार के बंधन लग गए, आर्थिक संभावनाओं के सारे रास्ते बंद कर दिए गए। 11 मई के बाद दुनिया हम पर टूट पड़ी थी, लेकिन 13 मई को फिर 2 और परमाणु परीक्षण हुए थे। उससे दुनिया को पता चला था कि भारत की राजनीतिक इच्छाशक्ति कितनी अटल है। उस समय पूरी दुनिया का दबाव भारत पर था, लेकिन अटल जी के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने दिखाया था कि हमारे लिए राष्ट्र प्रथम है। (PM in Gir Somnath)



