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राज्यसभा चुनाव 2026: 3 राज्यों की 11 सीटों पर वोटिंग जारी, शाम 5 बजे से गिनती, 7 राज्यों की 26 सीटों पर निर्विरोध चुने गए उम्मीदवार

Rajya Sabha Election 2026: राज्यसभा चुनाव के लिए सुबह 9 बजे से मतदान शुरू हो गया है। बिहार, ओडिशा और हरियाणा की 11 सीटों के लिए वोटिंग हो रही है। मतदान शाम 4 बजे तक चलेगा। इसके बाद शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी। इस बार देश के 10 राज्यों की कुल 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव हो रहा है। इनमें से 7 राज्यों की 26 सीटों पर उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं। इन सीटों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को 13-13 सीटें मिली हैं। वहीं बाकी 3 राज्यों की 11 सीटों के लिए कुल 14 उम्मीदवार मैदान में हैं। मौजूदा स्थिति में 37 सीटों में से 25 सीटें INDIA गठबंधन के पास थी, जबकि 12 सीटें NDA के खाते में थी, लेकिन चुनाव के बाद समीकरण बदलने की संभावना है और NDA को करीब 8 सीटों का फायदा हो सकता है।

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहली बार राज्यसभा सांसद बनेंगे। वहीं महाराष्ट्र से शरद पवार 84 साल की उम्र में निर्विरोध राज्यसभा सदस्य चुने गए हैं। बिहार विधानसभा में कुल 243 सीटें हैं, जहां राज्यसभा की 5 सीटों के लिए 6 उम्मीदवार मैदान में हैं। संख्याबल के आधार पर NDA को 4 सीटें आसानी से मिलने की उम्मीद है। NDA के पास 202 विधायक हैं, जबकि महागठबंधन के पास 35 विधायक हैं। एक सीट जीतने के लिए 41 वोट जरूरी हैं। ऐसे में NDA को चार सीटों के लिए 164 वोट मिलना तय माना जा रहा है। चार सीटें जीतने के बाद NDA के पास 38 विधायक बचेंगे और पांचवीं सीट जीतने के लिए उसे तीन और विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। (Rajya Sabha Election 2026)

ओडिशा में चौथी सीट पर फंसा पेंच

वहीं महागठबंधन को AIMIM और BSP विधायकों का समर्थन मिल जाए तो वह एक सीट जीत सकता है। इसलिए पांचवीं सीट पर मुकाबला रोचक बना हुआ है। ओडिशा में विधानसभा की 147 सीटें हैं और यहां 4 राज्यसभा सीटों के लिए 5 उम्मीदवार मैदान में हैं। एक सीट जीतने के लिए 30 विधायकों का समर्थन जरूरी है। भाजपा के उम्मीदवार मनमोहन सामल और सुजीत कुमार की जीत लगभग तय मानी जा रही है। वहीं बीजेडी ने संत्रुप्त मिश्रा और दत्तेश्वर होता को उम्मीदवार बनाया है। मिश्रा की जीत तय मानी जा रही है, लेकिन चौथी सीट पर मुकाबला दिलचस्प है। भाजपा ने निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय को समर्थन दिया है। कांग्रेस और माकपा के विधायक होता के समर्थन में हैं। ऐसे में क्रॉस वोटिंग की स्थिति में नतीजे पलट सकते हैं।

हरियाणा में 2 सीटों के लिए 3 उम्मीदवार

हरियाणा विधानसभा में कुल 90 सीटें हैं, जहां 2 राज्यसभा सीटों के लिए 3 उम्मीदवार मैदान में हैं। जीत के लिए 31 वोट जरूरी हैं। भाजपा के पास 48 विधायक हैं। पार्टी के उम्मीदवार संजय भाटिया की जीत लगभग तय मानी जा रही है। उनके जीतने के बाद बचने वाले वोट निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को मिल सकते हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं। अगर सभी विधायक एकजुट रहते हैं तो पार्टी उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध की जीत संभव है। हालांकि हरियाणा में पहले भी क्रॉस वोटिंग के कारण समीकरण बदल चुके हैं। साल 2016 और 2022 में कांग्रेस के पास संख्याबल होने के बावजूद उसके उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा था। (Rajya Sabha Election 2026)

ओडिशा और हरियाणा में विधायकों की बाड़बंदी

संभावित क्रॉस वोटिंग को देखते हुए पार्टियों ने अपने विधायकों को एकजुट रखने की रणनीति अपनाई है। ओडिशा में भाजपा ने अपने 82 विधायकों को पारादीप भेज दिया, जबकि बीजेडी और कांग्रेस ने अपने विधायकों को नोटिस जारी किए। हरियाणा में कांग्रेस ने अपने 31 विधायकों को शिमला के एक रिजॉर्ट में भेजा, जबकि भाजपा ने अपने 47 विधायकों को एक निजी होटल में ठहराया है। कुल 37 सीटों में से 26 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने जा चुके हैं। इन सीटों में पहले NDA के पास 8 सीट थी, जो अब बढ़कर 13 हो सकती हैं। यानी NDA को 5 सीटों का फायदा हो सकता है। वहीं बिहार, हरियाणा और ओडिशा की 11 सीटों में पहले NDA के पास 4 सीटें थी। चुनाव के बाद यह संख्या बढ़कर 7 हो सकती है। इस तरह कुल मिलाकर NDA को करीब 8 सीटों का फायदा मिलने के आसार हैं।

7 राज्यों में 26 उम्मीदवार निर्विरोध

राज्यसभा चुनाव में महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और हिमाचल प्रदेश की 26 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं। सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में 7 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। कुल मिलाकर राज्यसभा चुनाव में कई राज्यों में मुकाबला दिलचस्प बना हुआ है, जहां कुछ सीटों पर जीत का गणित पहले से तय नजर आ रहा है। वहीं बिहार, ओडिशा और हरियाणा की कई सीटों पर क्रॉस वोटिंग और आखिरी समय की रणनीति नतीजों को प्रभावित कर सकती है। अब सभी की नजर शाम 5 बजे शुरू होने वाली मतगणना पर टिकी है, जिसके बाद यह साफ हो जाएगा कि राज्यसभा में किस दल की ताकत कितनी बढ़ती है और किसे कितना राजनीतिक फायदा मिलता है।

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