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आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका, राघव चड्ढा समेत 3 सांसदों ने थामा BJP का दामन, 4 और MP हो सकते हैं शामिल

Shock to AAP: आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। दरअसल, राज्यसभा के 10 में से 7 सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का ऐलान किया है। यह घोषणा पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने शुक्रवार शाम 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस में की। राघव ने बताया कि इस फैसले में संदीप पाठक, अशोक कुमार मित्तल, हरभजन सिंह, विक्रमजीत सिंह साहनी, स्वाति मालीवाल और राजेंद्र गुप्ता समेत अन्य सांसद शामिल हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में संदीप पाठक और अशोक मित्तल भी मौजूद रहे। बता दें कि अशोक मित्तल लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के चेयरमैन हैं और 15 अप्रैल को जालंधर स्थित उनके आवास पर ED की छापेमारी हुई थी।

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प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल BJP मुख्यालय पहुंचे और पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। वहीं अन्य चार सांसद फिलहाल सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। स्वाति मालीवाल ने कहा कि वह इस समय ईटानगर में हैं और दिल्ली लौटकर अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगी। राघव चड्ढा ने कहा कि यह फैसला पार्टी के दो-तिहाई सांसदों की ओर से लिया गया है, इसलिए संविधान के तहत दलबदल कानून लागू नहीं होगा। उन्होंने कहा कि हम संविधान के प्रावधानों का पालन करते हुए BJP में विलय कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि पिछले कुछ सालों में उन्हें महसूस हुआ कि वह गलत पार्टी में सही व्यक्ति हैं। (Shock to AAP)

PM नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की तारीफ

सांसद राघव चड्ढा ने PM नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने कई ऐसे फैसले लिए हैं, जिन्हें लेने से पहले नेता डरते थे। उन्होंने कहा कि जनता ने तीन बार इस नेतृत्व पर भरोसा जताया है और अब वह इसी नेतृत्व में देश के लिए काम करेंगे। AAP से अलग होने के फैसले को लेकर राघव ने कहा कि जिस पार्टी को मैंने सालों तक अपने खून से सींचा, वह अब अपने मूल रास्ते से भटक गई है। अब यह देशहित के बजाय निजी हितों के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि वह AAP से दूर होकर जनता के पास जा रहे हैं। राघव चड्ढा ने बताया कि 7 सांसदों ने संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर राज्यसभा के सभापति को सौंप दिए हैं। उन्होंने खुद दो अन्य सांसदों के साथ दस्तावेज जमा किए। (Shock to AAP)

पहले भी मिल रहे थे संकेत

राज्यसभा में AAP के 10 सांसद थे, जिनमें से 7 के अलग होने से पार्टी की संसदीय ताकत पर बड़ा असर पड़ेगा। राघव चड्ढा के इस कदम के संकेत पहले से मिल रहे थे। दरअसल, मार्च 2024 में अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी पर उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। 2025 दिल्ली विधानसभा चुनाव में AAP की हार के बाद भी वह चुप रहे। सोशल मीडिया से AAP का प्रचार सामग्री हटाने लगे। पार्टी गतिविधियों से दूरी बढ़ती गई। संसद में कई मौकों पर पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाया। AAP ने 2024 लोकसभा चुनाव में पंजाब में 3 सीटें जीती थी, लेकिन राज्यसभा में इस बड़े घटनाक्रम के बाद पार्टी की स्थिति कमजोर मानी जा रही है। वहीं 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले यह घटनाक्रम राजनीतिक समीकरण बदल सकता है। AAP के भीतर यह अब तक की सबसे बड़ी टूट मानी जा रही है। अगर सभी 7 सांसद औपचारिक रूप से BJP में शामिल हो जाते हैं तो यह न सिर्फ AAP, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

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