बिहार के बाद अब देश के 12 राज्यों में SIR, 28 अक्टूबर से शुरू होकर 7 फरवरी तक चलेगा अभियान

SIR in India 2025: भारतीय चुनाव आयोग ने देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया शुरू करने का ऐलान किया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि SIR का दूसरा चरण 28 अक्टूबर से शुरू होकर 7 फरवरी तक चलेगा। इस दौरान नए वोटरों के नाम जोड़े जाएंगे और पुरानी सूची में त्रुटियों को सुधारा जाएगा।
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इन 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में होगा SIR
- अंडमान निकोबार
- छत्तीसगढ़
- गोवा
- गुजरात
- केरल
- लक्षद्वीप
- मध्य प्रदेश
- पुडुचेरी
- राजस्थान
- तमिलनाडु
- उत्तर प्रदेश
- पश्चिम बंगाल
अगले साल चुनाव होने वाले पश्चिम बंगाल में SIR होगा, लेकिन असम में नहीं होगा। चुनाव आयोग ने कहा कि वहां नागरिकता से जुड़े नियम अलग हैं, इसलिए मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया अलग तरीके से की जाएगी।
जानिए क्या है SIR ?
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन चुनाव आयोग की एक नियमित प्रक्रिया है, जिसके तहत मतदाता सूची को अपडेट किया जाता है, जिसके तहत 18 साल से ज्यादा उम्र के नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं, जिन लोगों की मृत्यु हो चुकी है या जो स्थानांतरित हो गए हैं, उनके नाम हटाए जाते हैं। मतदाता सूची में नाम, पते या अन्य विवरणों में हुई गलतियों को सुधारा जाता है। बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करते हैं और फॉर्म भरवाते हैं। SIR का पहला चरण बिहार में पूरा हो चुका है। वहां की फाइनल वोटर लिस्ट में 7.42 करोड़ मतदाता शामिल हैं, जो नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव में वोट डालेंगे। (SIR in India 2025)
बिहार में 65 लाख नाम हटाए गए
बिहार में इस प्रक्रिया के दौरान करीब 65 लाख नाम हटाए गए थे, जिससे विवाद हुआ था और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। बाद में कोर्ट के आदेश पर आधार कार्ड को पहचान प्रमाण के रूप में स्वीकार किया गया और नए नाम जोड़े गए। SIR वाले 12 राज्यों में करीब 51 करोड़ मतदाता हैं। इस काम में 5.33 लाख BLO (बूथ लेवल अधिकारी) और 7 लाख से ज्यादा BLA (बूथ लेवल एजेंट) राजनीतिक दलों की ओर शामिल किए जाएंगे। (SIR in India 2025)
कब कहां चुनाव
- 2026: पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी
- 2027: गोवा, गुजरात, उत्तर प्रदेश
- 2028: छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान
SIR के लिए मान्य दस्तावेज
- पेंशनर पहचान पत्र
- किसी सरकारी विभाग द्वारा जारी पहचान पत्र
- जन्म प्रमाणपत्र
- पासपोर्ट
- 10वीं की मार्कशीट
- स्थायी निवास प्रमाणपत्र
- वन अधिकार प्रमाणपत्र
- जाति प्रमाणपत्र
- राष्ट्रीय रजिस्टर (NRC) में नाम
- परिवार रजिस्टर या राशन कार्ड में नाम
- जमीन या मकान आवंटन पत्र
- आधार कार्ड
1951 से 2004 तक नियमित SIR होते रहे, लेकिन पिछले 21 सालों से यह प्रक्रिया नहीं हुई थी। इस दौरान जनसंख्या में भारी बदलाव, माइग्रेशन, और तकनीकी त्रुटियों के कारण मतदाता सूची में कई गड़बड़ियां पाई गई हैं। SIR का मुख्य मकसद दो जगह वोटर लिस्ट में नाम होने जैसी त्रुटियों को दूर करना है। इसके साथ ही मृत व्यक्तियों के नाम हटाना। विदेशी नागरिकों के नाम हटाना। किसी भी योग्य मतदाता का नाम छूटने से रोकना भी है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि चुनाव आयोग का उद्देश्य है कि देश के हर योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल हो और कोई भी अयोग्य नाम सूची में न रहे। यह लोकतंत्र की नींव को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।



