Anmol News Special: बरसात में सांप काटने से मौत का आंकड़ा बढ़ा, जानिए क्या करें और क्या नहीं…?

Snake Bite Cases: देश में बारिश का मौसम शुरू होने के साथ ही नमी और उमस बढ़ जाती है। बारिश का पानी बिलों में जाने के कारण सांप-बिच्छू समेत अन्य जंतु सुरक्षित स्थान की तलाश में अक्सर बाहर आ जाते हैं। भोजन की खोज में ये घरों में घुस जाते हैं, जिससे लोगों को इसके काटे जाने का खतरा बढ़ जाता है। सर्पदंश जानलेवा भी हो जाता है। इस मौसम में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं। भारत सरकार के आंकड़ों के मुताबिक देश में हर साल 30 से 40 लाख लोग सर्पदंश का शिकार होते हैं, जिसमें से 50 हजार से ज्यादा की मौत हो जाती है। यह आंकड़ा दुनियाभर के सर्पदंश से होने वाली मौतों का आधे से ज्यादा है। चौंकाने वाली बात यह है कि सिर्फ 30% लोग ही हॉस्पिटल पहुंच पाते हैं। सांप काटने के अधिकांश मामले मानसून में सामने आते हैं।
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भारत में हर साल करीब 58,000 लोगों की मौत सर्पदंश के कारण होती है। जशपुर को छत्तीसगढ़ का सर्पलोक कहा जाता है, जहां 2022, 2023 और 2024 में तीन साल के अंदर सर्पदंश से 96 मौतें हुई है। जबकि बिलासपुर में सर्पदंश से 431 मौतें हुई है। छत्तीसगढ़ में पिछले 5 सालों में 17,088 लोगों को सांप ने काटा है। जशपुर, कोरबा, रायगढ़, सरगुजा और बस्तर में स्नेक बाइट के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। अंबिकापुर के सर्प मित्र सत्यम द्विवेदी ने बताया कि सांप इकोलॉजी तंत्र में संतुलन बनाए रखने वाले अत्यंत आवश्यक जीव हैं। ये छोटे-छोटे जानवर जैसे चूहे, मेंढक, छिपकली और अन्य कीड़ों को खाते हैं, जिससे उनकी संख्या नियंत्रित रहती है। अगर सांप नहीं हों तो ये जीव बहुत ज्यादा बढ़ सकते हैं और फसलें भी बर्बाद हो सकती हैं। इसलिए सर्प किसान मित्र भी माने जाते हैं। द्विवेदी ने बताया कि विशेष रूप से छत्तीसगढ़ में चार सबसे विषैले सांप पाए जाते हैं। (Snake Bite Cases)
इंडियन कोबरा- वैज्ञानिक नाम नाजा नाजा है। यह सांप अपने फैले हुए फन के लिए पहचाने जाते हैं। इसका जहर न्यूरोटॉक्सिक होता है, जो सीधे तंत्रिका तंत्र पर असर डालता है, जिससे लकवा और श्वास में कठिनाई हो सकती है।
कॉमन करैत- वैज्ञानिक नाम बंगारस कैर्यूलस। यह रात में सक्रिय रहता है। इसका जहर भी न्यूरोटॉक्सिक होता है और इसका असर धीरे-धीरे होता है, जिससे व्यक्ति को नींद में ही लकवा हो सकता है।
रसेल वाइपर- वैज्ञानिक नाम दबोइया रसेली है। यह सबसे ज्यादा पाए जाने वाला विषैला सांप है। इसका जहर हीमोटॉक्सिक होता है, जो रक्तस्राव, ऊतक क्षति और अंग विफलता का कारण बन सकता है।
स्केल्ड वाइपर- वैज्ञानिक नाम इचीस कैरिनेटस है। यह आकार में छोटा, लेकिन अत्यंत आक्रामक होता है। इसका जहर भी हीमोटॉक्सिक होता है और इसके काटने से मृत्यु दर ज्यादा होती है। (Snake Bite Cases)
बता दें कि करैत भारत में पाए जाने वाले सर्वाधिक जहरीले सांपों में से एक है। इसका जहर न्यूरोटॉक्सिक होता है, जिससे नर्वस सिस्टम पर असर पड़ता है। सही समय पर इलाज न मिले तो जान बचने की गुंजाइश कम होती है। द्विवेदी ने बताया कि इन सभी सांपों के काटने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता आवश्यक है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सांपों से डरने की बजाय, उनके बारे में सही जानकारी रखना जरूरी है। अगर कहीं सांप दिखाई दे तो उसे छेड़ने की कोशिश न करें, बल्कि वन विभाग या सर्प मित्रों को सूचित करें, ताकि सांप को सुरक्षित रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा जा सके। (Snake Bite Cases)
छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवायजरी
स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि सर्पदंश में ओझा-बैगा के झाड़-फूंक में विश्वास कर समय गंवाने से व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है। सर्पदंश की स्थिति में सीधे नजदीकी अस्पताल पहुंचकर इलाज कराना जरुरी है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से झाड़-फूंक जैसे अंधविश्वास से बाहर आकर सर्पदंश की स्थिति में अस्पताल में अपना इलाज कराने की अपील की है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार विषैले सांपों के काटने का इलाज अस्पतालों में उपलब्ध एंटीवेनम से ही होता है। किसी प्रकार के झाड़-फूंक करवाने से यह ठीक नहीं हो सकता, बल्कि इसमें समय गंवा देने पर अक्सर पीड़ित व्यक्ति गंभीर हो जाता है और बाद में अस्पताल लाने पर चिकित्सकों को उस मरीज पर बहुत मेहनत करनी पड़ती है। कई प्रकरणों में विष पूरे शरीर में फैल जाता है, जिस कारण जान बचाना भी काफी मुश्किल रहता है। इसलिए ऐसे प्रकरणों में तत्काल अस्पताल आना ही सही है, जहां इसका निःशुल्क इलाज किया जाता है। (Snake Bite Cases)
सांप काटने पर क्या ना करें
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार सर्पदंश की स्थित में मरीज को घबराने नहीं देना है, क्योंकि इससे हृदय गति बढ़ने से विष तेजी से फैलता है। सर्पदंश के शिकार व्यक्ति के लिए यह घातक साबित हो सकता है। काटे गए अंग को हिलाना नहीं है और न ही कोई कड़ा कपड़ा बांधना है। यह बेहद हानिकारक हो सकती है। सांप के काटने वाली जगह पर कुछ भी बांधने से इलाज के लिए हटाए जाने पर विष तेजी से फैल सकता है। सर्पदंश से प्रभावित अंग को हिलाए-डुलाएं नहीं। हिलाने-डुलाने से शरीर के अन्य अंगों में जहर तेजी से फैल सकता है। सर्पदंश वाली जगह के आसपास काटे और जलाएं नहीं। झोलाछाप डॉक्टर के पास भी न जाएं। नजदीक के अस्पताल में तुरंत ले जाएं। घर से बाहर जाने और उस जगह पर रोशनी कम होने पर टार्च लेकर जाएं और जूते पहनें, आसपास सफाई रखें और कमरे में भोजन सामग्री, धान न रखें, जिससे चूहे न आने पाएं। ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादातर लोग सर्पदंश के मामले में चिकित्सा विज्ञान पर विश्वास नहीं करते और बैगा-गुनिया से झाड़-फूंक कराते हैं। सर्पदंश के शिकार लोग अंधविश्वास और अज्ञानता के कारण असमय काल-कवलित हो जाते हैं। (Snake Bite Cases)



