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पहाड़ियों में फंसी उम्मीद, जानिए नारायणपुर के ऐसे गांव…जहां हर कदम पर है संघर्ष

Story of Narayanpur Villages: छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में करमरी ग्राम पंचायत के ताडोनार, हिक्कोनार, परलभाट, कुरुषनार और कोडोली गांव ऐसे हैं, जहां आज भी विकास सिर्फ खबरों में है। असली जिंदगी आज भी उबड़-खाबड़ रास्तों और कठिन पहाड़ियों से गुजरती है। इन गांवों में सड़क न होना सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि हर दिन का संघर्ष बन चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि इन गांवों में सफर का मतलब वही है, जो आम शहर में चलना है, लेकिन यहां हर यात्रा जोखिम भरी होती है।

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बारिश के दिनों में कीचड़ और गड्ढों से भरे रास्ते लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। कुछ गांव तो पहाड़ी पगडंडियों से होकर ही जुड़े हैं, जहां न कोई वाहन पहुंच सकता है, न कोई तत्काल मदद। जब देश डिजिटल इंडिया और स्मार्ट सिटी की बात कर रहा है, तब इन गांवों के लोग राशन लेने 8 से 10 किलोमीटर पैदल चलते हैं। सिर पर बोझ उठाकर घर लौटना उनकी मजबूरी है। स्वास्थ्य की स्थिति भी चिंताजनक है। बीमार पड़ने पर मरीज को सड़क तक ले जाना पड़ता है, वहां से 108 एंबुलेंस मिलती है। कई बार ये देरी जानलेवा साबित होती है। (Story of Narayanpur Villages)

बच्चों की पढ़ाई पर असर

स्कूल जाने वाले बच्चों को भी इसी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। लंबी दूरी और खराब रास्तों की वजह से कई बच्चे स्कूल छोड़ने पर मजबूर होते हैं। बाइक वालों को भी खतरे के डर से सफर करने में हिचकिचाहट होती है। सरपंच गड़वा राम सलाम बताते हैं कि प्रशासन को कई बार ज्ञापन भेजे, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिला। उन्होंने कहा कि हमारे गांव की पुकार सुनवाई तक नहीं पाती। ऐसा लगता है जैसे हमारी आवाज हवा में खो जाती है। गांव वालों की मांग सीधी है- एक मजबूत, पक्की सड़क। उनका मानना है कि जब सड़क बनेगी, तब शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं में बदलाव आएगा। (Story of Narayanpur Villages)

नारायणपुर के इन गांवों की कहानी बताती है कि विकास सिर्फ योजनाओं में नहीं, बल्कि उन रास्तों में छुपा है, जो लोगों को उनकी रोजमर्रा की जिंदगी तक जोड़ते हैं। अब सवाल यही है- क्या इन आवाजों को प्रशासन सुनेगा, या ये लोग आज भी पहाड़ियों और संघर्ष की राह पर ही चलते रहेंगे ? यह कहानी सिर्फ गांवों की नहीं, बल्कि हमारी संवेदनशीलता और प्राथमिकताओं की भी है। जब तक इन पहाड़ी रास्तों पर पक्की सड़क नहीं पहुंचेगी, तब तक यहां की हर मुस्कान के पीछे संघर्ष छुपा रहेगा। सड़क के बिना शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन के हर अवसर दूर हैं। नारायणपुर के ये गांव हमें याद दिलाते हैं कि असली विकास वही है, जो हर नागरिक तक पहुंच सके और उस सड़क का इंतजार अभी भी जारी है।

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